ये डब्बा है और मैं इसका मंत्री; ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मोबाइल पर जो कहा वह मजेदार और मानने लायक है
लोगों को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि 'एक दिन आपको जाना है, मंच पर बैठे लोगों को जाना है, मुझे जाना है, हम सबको जाना है, लेकिन ऐसा कर्म करो कि जाने के दिन पर हर एक व्यक्ति की आंखों में आंसू आपके दिल के संबंध के आधार पर आ पाएं।'

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी में रिश्तों को जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए, लोगों को परिवार में निवेश करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि भले ही आज का युग मोबाइल व कम्प्यूटर का युग हो, लेकिन इन चीजों से परिवार दूर हो रहे हैं और लोगों का आपस में बातचीत करना भी कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि मोबाइल जैसी चीजों से रिश्ते कभी बनते नहीं हैं, बल्कि रिश्ते अपनों के साथ समय गुजारने से बनते हैं। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने लोगों को परिवार के साथ बैठकर खाना खाने और इस दौरान एक घंटे के लिए खुद को मोबाइल से दूर रखने के लिए भी कहा।
सिंधिया ने मोबाइल को बताया डब्बा और खुद को डब्बा मंत्री
सिंधिया ने ये सारी बातें हाल ही में मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चन्देरी शहर में स्थित शासकीय माधव महाविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही, जहां पर वे अपने पिता माधवराव सिंधिया की प्रतिमा और 2.86 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित नवीन माधव विज्ञान महाविद्यालय भवन का लोकार्पण करने पहुंचे थे। यहां लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्थानीय भाषा में मोबाइल को डब्बा कहा और मजाकिया अंदाज में खुद को डब्बा मंत्री भी बताया।
सिंधिया बोले- एक दिन सबको जाना है, लेकिन..
कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'आधुनिक युग की इस प्रतिस्पर्धा की दौड़ में हमें मानवता कभी नहीं भूलना चाहिए। एक दिन हम सबको जाना है, एक दिन आपको जाना है, मंच पर बैठे लोगों को जाना है, मुझे जाना है, हम सबको जाना है, लेकिन ऐसा कर्म करो कि जाने के दिन पर हर एक व्यक्ति की आंखों में आंसू आपके दिल के संबंध के आधार पर आ पाएं।'
'रिश्ते सबसे बड़ी पूंजी, वे कंप्यूटर व मोबाइल से नहीं बनते'
आगे उन्होंने वहां बैठी बच्चियों को समझाते हुए कहा, 'जिंदगी का सफर बहुत लंबा होता है, लेकिन समय बहुत जल्दी निकल जाता है, और इस आधुनिक जगत में जब हमारे पास सबकुछ है, ये डब्बा (मोबाइल) है, कंप्यूटर है, ढेर सारी चीजें हमारे हाथों में आ गई हैं, ये कभी मत भूलना कि सबसे बड़ी पूंजी आपकी अपनी जिंदगी में आपके रिश्ते होंगे और रिश्ते डिब्बे से नहीं बन सकते, रिश्ते कम्प्यूटर के आधार पर नहीं बन सकते। रिश्ते बनाने के लिए आपको निवेश करना पड़ता है, रिश्ते बनाने के लिए आपको समय गुजारना पड़ता है।'
'खाना खाते समय मोबाइल को बंद करके साइड में रखो'
इसके बाद उन्होंने मोबाइल की वजह से पारिवारिक व सामाजिक रिश्तों में आई दूरी के बारे में बताते हुए कहा, 'आज मैं जहां पर भी देखता हूं, मंच पर भी, मंच से नीचे भी, गाड़ी में भी, प्लेन में भी, कहीं भी देख लो, अगर कहीं पांच लोग बैठे हुए हैं, तो उनमें से कोई भी व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से बात नहीं करेगा, सब अपने डब्बे में कैद हैं, सब अपने डब्बे में मस्त हैं, अरे पति-पत्नी भी आपस में बात नहीं करते। पति अपने डब्बे में पत्नी अपने डब्बे में मस्त है। रिश्ते कैसे बनेंगे? ये डब्बा, अब मैं खुद डब्बा मंत्री हूं, तो डब्बा का जितना इस्तेमाल हो, मेरे लिए अच्छा है, पर मैं कह रहा हूं, कम से कम भोजन के समय में, दिन में एक घंटा, जब परिवार के साथ बैठे हो, जब दोस्तों के साथ बैठे हो, डब्बे को बंद करके साइड में रखो।'




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