ठंडा पड़ चुका था शरीर, थम गई थीं धड़कनें, उज्जैन में फांसी लगाए युवक की पुलिस ने कैसे बचाई जान
मध्य प्रदेश की उज्जैन पुलिस ने फांसी लगाए एक युवक की जान बचा ली। पुलिस अधिकारी ने अपनी ट्रेनिंग में मिली जानकारी का उपयोग करते हुए सीपीआर दिया, जिससे रुकी हुई सांसें फिर से चलने लगीं।

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की पुलिस ने तत्परता, सूझबूझ और मानवीय संवेदना का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो पुलिस सेवा की सच्ची भावना को दिखाती है। घटना सोमवार-मंगलवार रात की है, जब थाना प्रभारी गस्त कर रहे थे। इस दौरान एक शख्श दौड़ते हुए आया और बोला मेरे बेटे ने फांसी लगा ली है, बचा लीजिए। उम्मीद का दामन छोड़ चुके घर के लोगों ने रोना और चीखना शुरू कर दिया था, लेकिन थाना प्रभारी ने कुछ ऐसा किया, जिससे परिवार में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी।
थाना प्रभारी को सूचना मिली की एक युवक ने फांसी लगा ली है। जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और कमरे का दरवाजा तोड़ते हुए युवक को फंदे से नीचे उतार लिया। इस दौरान परिजन युवक को मृत समझकर रोना शुरू कर देते हैं। लेकिन थाना प्रभारी हार नहीं मानते हैं और युवक को सीपीआर देना शुरू कर देते हैं और कुछ ही सेकंड में उसके शरीर में हलचल होने लगती है। इसके तुरंत बाद वो अपनी गाड़ी से उसे एमपी-13 अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने तत्काल जांच कर इलाज शुरू किया और बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण युवक की जान बच गई है। बताया जा रहा है कि युवक ने फांसी अपने पारिवारिक कारणों से लगाई थी। इसके पहले भी वह 2 बार अलग-अलग तरीके जान देने की कोशिश कर चुका है।
कैसे बचाई युवक की जान
उज्जैन जिले के नागदा शहर में जन्मेजय मार्ग स्थित पानी की टंकी के पास 20 साल के एक युवक ने फांसी लगा ली। यह देख उसके पिता इलाके में गश्त कर रहे नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी के पास दौड़ते हुए पहुंचे और उन्होंने बेटे के फंदे से झूलने की बात थाना प्रभारी अमृतलाल से बताई। सूचना की गंभीरता को तत्काल समझते हुए थाना प्रभारी में एक क्षण भी देरी किए बिना पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर पहुंचते ही पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़ा और युवक को फंदे से नीचे उतारा। अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सिखाई गई सीपीआर तकनीक का उपयोग किया। कुछ ही मिनटों की सतर्कता और निरंतर प्रयासों से युवक की धड़कनें सामान्य हुईं। इसके बाद उसे तत्काल इलाज के लिए रतलाम हॉस्पिटल भेजा गया। पीड़ित परिवारजनों ने थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी और नागदा पुलिस के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया। हालात सामान्य होने पर अस्पताल से युवक को छुट्टी दे दी गई है। इस घटना के बाद डीजीपी कैलाश मकवाना ने थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी को 10 हजार रुपए से पुरस्कृत देने के आदेश जारी किए हैं।
क्या बोले डॉक्टर
हॉस्पिटल के संचालक डॉ प्रमोद बाथम ने बताया की युवक के स्वस्थ होने के बाद थाना प्रभारी गवरी ने उसकी काउंसलिंग भी की और उसे समझाकर घर भेजा। युवक को जब लाया गया तब तो वो बेहोशी की हालत में था। उसका ऑक्सीजन लेवल कम आ रहा था, बीपी थोड़ा बढ़ा हुआ था। प्राथमिक उपचार के दौरान उसे ऑक्सीजन लगाई गई और थोड़ी देर निगरानी में रखने बाद वो ठीक हो गया और उसके परिजन उसे साथ ले गए।
पुलिस थाना प्रभारी अमृत लाल गवरी ने बताया की जब वो युवक को बचाने पहुंचे तब तक उसका शरीर कड़क पड़ चुका था। फिर भी कोशिश की उसकी जान बचाने में और कामयाबी मिली। युवक को 2-3 से तीन मिनिट तक सीपीआर दिया। इसके बाद नजदीक के अस्पताल युवक को पहुंचा दिया गया। 6 माह पहले भी सीपीआर देकर एक अधीनस्थ सिपाही की जान बचा चुके हैं।
पुलिस मुख्यालय भोपाल को इस त्वरित, साहसिक और मानवीय काम की जानकारी लगी तो पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी की सराहना करते हुए उन्हें 10 हजार रूपए का नगद पुरस्कार से पुरस्कृत करने के आदेश दिए, पुलिस महानिदेशक ने इस कार्य को पूरे मध्यप्रदेश पुलिस बल के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण पुलिस और समाज के बीच विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। पुलिस केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में नागरिकों के जीवन की रक्षा करने में अपनी भूमिका निभाती है।
रिपोर्ट विजेन्द्र यादव




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