एक और; MP में बाघ की मौत से हाहाकार, इस साल 55वीं, 1973 के बाद सबसे ज्यादा
ताजा घटना सागर-धाना रोड पर हिलगन गांव के पास, दक्षिण सागर वन मंडल के धाना फॉरेस्ट रेंज की है। यह लगभग 8 से 10 वर्ष की वयस्क मादा बाघिन थी। शरीर पर चोट के कोई बाहरी निशान नहीं मिले हैं, जिससे शिकार (Poaching) की संभावना कम दिखती है।

बाघों का गढ़ कहें या टाइगर स्टेट, हिंदुस्तान का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश को लोग इस एक नाम से भी जानते हैं, लेकिन बाघों के घर में टाइगर सुरक्षित नहीं हैं। एमपी के सागर में एक और बाघिन की मौत ने इस साल कुल मौतों का आंकड़ा 55 पहुंचा दिया है। यह घटना न केवल राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर सवाल उठाती है, बल्कि 2025 को मध्य प्रदेश में बाघों के लिए अब तक का सबसे खतरनाक साल बना देती है।
ताजा घटना सागर-धाना रोड पर हिलगन गांव के पास, दक्षिण सागर वन मंडल के धाना फॉरेस्ट रेंज की है। यह लगभग 8 से 10 वर्ष की वयस्क मादा बाघिन थी। शरीर पर चोट के कोई बाहरी निशान नहीं मिले हैं, जिससे शिकार (Poaching) की संभावना कम दिखती है। हालांकि, अधिकारियों को आशंका है कि करंट इसकी वजह हो सकती है, क्योंकि ग्रामीण अक्सर जंगली सूअरों से फसल बचाने के लिए खेतों के चारों ओर बिजली के तार बिछाते हैं। वन विभाग यह भी पता लगा रहा है कि यह बाघिन पन्ना टाइगर रिजर्व या वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से भटक कर यहां आई थी या नहीं।
2025: रिकॉर्ड तोड़ मौतें
दिसंबर के अंत तक मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का आंकड़ा 55 तक पहुंच गया है, जो कि 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' शुरू होने के बाद से एक साल में दर्ज की गई सबसे अधिक संख्या है।
जैसा कि रेंज ऑफिसर प्रतीक श्रीवास्तव और उनकी टीम ने नोट किया, बाघिन के शरीर पर बाहरी घाव नहीं हैं। यह अक्सर 'इलेक्ट्रोक्यूशन' के मामलों में देखा जाता है, जहां शिकारी या किसान GI तारों में सीधा हाई-वोल्टेज करंट छोड़ देते हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में जंगली सूअरों और नीलगायों को रोकने के लिए खेतों में बिजली के तार बिछाना एक आम लेकिन अवैध प्रक्रिया है। अक्सर बाघ जैसे बड़े शिकारी अनजाने में इनकी चपेट में आ जाते हैं। जंगलों के किनारों पर बिजली के अवैध तार बाघों के लिए "साइलेंट किलर" साबित हो रहे हैं।

देख लीजिए आंकड़े
मध्य प्रदेश के लिए यह सप्ताह "टाइगर स्टेट" के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक साबित हो रहा है। एक सप्ताह के भीतर 6 बाघों की मौत और साल का आंकड़ा 55 तक पहुंचना यह दर्शाता है कि राज्य का संरक्षण ढांचा (Conservation structure) ढहने की कगार पर है। अजय दुबे जैसे कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवाल अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक भी हो गए हैं।
| विवरण | सांख्यिकी / जानकारी |
|---|---|
| कुल बाघों की मौत (2025) | 55 (प्रोजेक्ट टाइगर के बाद सर्वाधिक) |
| अप्राकृतिक मौतें (Unnatural) | 11 |
| इलेक्ट्रोक्यूशन (करंट से मौत) | 08 (लगभग) |
| पिछले 7 दिनों में मौतें | 06 |
प्रमुख हालिया घटनाएं (एक ही सप्ताह में)
सागर (दिसंबर 28-29): वयस्क बाघिन की मौत, अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग का संदेह।
बांधवगढ़ (दिसंबर 27): उमरिया जिले की चंदिया रेंज में पावर लाइन के पास शव मिला। यहाँ भी इलेक्ट्रोक्यूशन की प्रबल आशंका है।
अन्य 4 घटनाएं: पन्ना, कान्हा और सतपुड़ा के कॉरिडोर क्षेत्रों से रिपोर्ट की गई हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे का यह कहना कि "जवाबदेही की पूर्ण कमी है", निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित है:
➤बफर जोन और कॉरिडोर (जैसे चंदिया और धाना) में बाघों की मूवमेंट पर नजर रखने के लिए पर्याप्त गश्ती (Patrolling) नहीं हो रही है।
➤जंगलों से गुजरने वाली हाई-टेंशन लाइनों की ऊंचाई और खेतों में बिछाए जाने वाले तारों पर अंकुश लगाने में बिजली विभाग और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी है।
➤करंट लगने के मामलों में अक्सर निचले स्तर के किसानों पर कार्रवाई होती है, लेकिन शिकार के संगठित नेटवर्क तक जांच नहीं पहुंच पाती।
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