एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; धार की भोजशाला का खुद मुआयना करेंगे जज
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह 2 अप्रैल से पहले धार में स्थित भोजशाला मंदिर परिसर का मुआयना करेगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह भोजशाला मंदिर/कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े विवादों को देखते हुए 2 अप्रैल से पहले इसका मुआयना करेगा। हिंदू समुदाय इस परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे 11वीं सदी की कमाल मौला मस्जिद बताता है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की है। अदालत ने यह भी कहा कि मौके का दौरा करने के दौरान कोई पक्ष वहां मौजूद नहीं रहेगा।
मौके का होगा मुआयना
हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने सोमवार को विवादित परिसर से जुड़ी याचिकाओं की नियमित सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की। बेंच ने अपनी मौखिक टिप्पणियों में कहा कि कई विवादों को देखते हुए हम इस परिसर का दौरा करना और मौके का मुआयना करना चाहेंगे।
2 अप्रैल से पहले परिसर का दौरा करेंगे जज
अदालत ने कहा कि हम 2 अप्रैल से पहले इस परिसर का दौरा करेंगे। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस दौरे के दौरान मामले से जुड़े किसी भी पक्ष को वहां मौजूद रहने की अनुमति नहीं होगी। लंबी बहस सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने मामले में दायर अलग-अलग अंतरिम आवेदनों को स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि संबंधित पक्ष इन आवेदनों से जुड़े दस्तावेज और हलफनामे कोर्ट में पेश कर सकते हैं।
एक विशाल इमारत पहले वहां थी मौजूद
एएसआई की 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट से पता चलता है कि धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल इमारत मस्जिद से पहले से वहां मौजूद थी। मौजूदा विवादित इमारत प्राचीन मंदिरों के हिस्सों का दोबारा इस्तेमाल करके बनाई गई थी।
शैक्षिक गतिविधियों से जुड़ी इमारत थी मौजूद
रिपोर्ट के मुताबिक, मौके से मिले वास्तुशिल्प अवशेष, मूर्तियों के टुकड़े, साहित्यिक लेखों वाली शिलालेखों की बड़ी पट्टियां, खंभों पर नागाकर्णिका शिलालेख आदि से पता चलता है कि इस जगह पर साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से जुड़ी एक विशाल इमारत मौजूद थी।
परमार काल के हैं अवशेष
रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल से प्राप्त वास्तुशिल्प अवशेष, मूर्तियों के खंड, साहित्यिक लेखों वाले शिलालेख और खंभों पर नागाकर्णिका शिलालेख यह दर्शाते हैं कि यहां साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र था। वैज्ञानिक जांच और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर इस ढांचे को परमार काल का माना जा सकता है।
मंदिरों के अवशेषों से बना है ढांचा
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण, पुरातात्विक खुदाई, साक्ष्यों के विश्लेषण, वास्तुकला, मूर्तियों और शिलालेखों के आधार पर यह स्पष्ट है कि मौजूदा ढांचा पहले से मौजूद मंदिरों के अवशेषों से बना है। सजावटी खंभों की कला और वास्तुकला दर्शाती है कि वे पहले के मंदिरों के हिस्से थे जिन्हें बाद में मस्जिद के गलियारे के निर्माण में काम में लाया गया था।




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