भोजशाला में पूजा करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने मोहन यादव, BJP के लिए क्यों खास है ये दौरा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट फैसले के बाद सीएम मोहन यादव भोजशाला पहुंचकर पूजा अर्चना करने वाले पहले मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए। बीजेपी के लिए हाई कोर्ट का ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है और उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है सीएम का यह दौरा।

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर आए हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी यहां पहुंचे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा अर्चना की।हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित हिंदू मंदिर घोषित किया था। इस फैसले के बाद सीएम मोहन यादव भोजशाला पहुंचकर पूजा अर्चना करने वाले पहले मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए। बीजेपी के लिए हाई कोर्ट का ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है और उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है सीएम का यह दौरा। उन्होंने ये दौरान ऐसे समय में किया जब शुक्रवार को ही सैकड़ों हिंदू श्रद्धालुओं ने वहां 'महा आरती' में भाग लिया, जबकि मुसलमानों ने इस फैसले के विरोध में काली पट्टी बांधकर अपने घरों में नमाज अदा की। इस बीच सीएम मोहन यादव ने भोजशाला पहुंच कर बीजेपी के हिंदू भावना के विचार और विकास की राजनीति को एक साथ साधने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार में 'मां सरस्वती लोक' और 'राजा भोज शोध संस्थान' स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने हालांकि इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दी, लेकिन माना जा रहा है कि सरस्वती लोक ज्ञान की देवी को समर्पित एक आध्यात्मिक गलियारा होगा। उन्होंने कहा, पिछले 750 सालों में पहली बार भोजशाला में देवी वाग्देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई और यह पहला अवसर है जब किसी मुख्यमंत्री ने यहां पूजा की है।
बीजेपी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जुड़े संगठनों के लिए धार की 'भोजशाला' का मुद्दा उतना ही जरूरी रहा है, जितने अयोध्या, काशी और मथुरा के विवाद रहे। फर्क सिर्फ इतना था कि यह अयोध्या की तरह राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा ना रहकर स्थानीय पहचान और इतिहास से जुड़ा हुआ मामला है। अब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है और वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में शाही ईदगाह वाला विवाद कोर्ट में है। इस बीच भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट का फैसला बीजेपी के लिए बहुत बड़ी जीत माना जा रहा है।
मोहन यादव के लिए क्यों मानी जा रही बड़ी जीत
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह जीत राज्य की मौजूदा सरकार, खासकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए एक बड़ी राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धि मानी जा रही है। भाजपा के बड़े नेताओं का मानना है कि इस फैसले से पार्टी को जनता के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने का मौका मिल गया है। चुनाव के दौरान पार्टी इश सफलता को जोर शोर से भुनाएगी। इसके जरिए बीजेपी को ये दर्शाने का बहुत अच्छा मौका मिल गया है कि पार्टी हिंदू भावना के विचार के साथ विकास को भी साथ लेकर चलना चाहती है।
सीएम यादव ने सोमवार को धार के विकास का आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार शहर के निवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार राजा भोज की नगरी है, जिन्हें मालवा क्षेत्र से जुड़े सम्राट विक्रमादित्य और हर्षवर्धन के समकक्ष माना जाता है।
उन्होंने कहा, राजा भोज ने अनेक ग्रंथों की रचना की और प्राचीन महत्व की कई इमारतों का निर्माण कराया। उन्होंने विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बनवाया। उन्होंने नदी के मुख्य प्रवाह को रोकने के बजाय भोपाल तालाब का निर्माण कराया। उनकी तकनीक से विद्वान भी आश्चर्यचकित हैं। यादव ने कहा कि राजा भोज ने एक सम्मेलन आयोजित कर उसमें भाग लेने वाले कवियों को सोने की ईंट पुरस्कार स्वरूप दी थीं, जो हमारे गौरवशाली अतीत का प्रमाण है।
हाई कोर्ट के फैसले को बताया 750 सालों का संघर्ष
मुख्यमंत्री ने कहा, यह निर्णय 750 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। अदालत ने इस मामले में सही निर्णय दिया है। आने वाले समय में हमें धार जिले को और आगे बढ़ाने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा, हमने मां सरस्वती के दर्शन कर धार के विकास का संकल्प लिया है। हम इसे मां सरस्वती की भूमि बनाएंगे। यहां लोगों की सभी इच्छाएं पूरी होंगी। यह पर्यटन और साहित्य का केंद्र बनेगा। राजा भोज के कार्यकाल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भी जल संरक्षण से जुड़े अनेक कार्य किए जा रहे हैं। इस अवसर पर 88 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 12 परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया गया।




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