MP हाईकोर्ट से तोतों को फौरी राहत, इंदौर मेट्रो के लिए पेड़ काटने पर लगाई अंतरिम रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शहर के एक बिजी रूट पर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण की राह आसान करने के लिए हजारों तोतों की बसाहट वाले पेड़ों की प्रस्तावित कटाई पर शुक्रवार को अंतरिम रोक लगा दी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शहर के एक बिजी रूट पर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण की राह आसान करने के लिए हजारों तोतों की बसाहट वाले पेड़ों की प्रस्तावित कटाई पर शुक्रवार को अंतरिम रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने 'पीपुल फॉर एनिमल्स' की इंदौर इकाई के अध्यक्ष प्रियांशु जैन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगाई। हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
करीब 200 घने पेड़ों पर कटाई का खतरा मंडरा रहा
जनहित याचिका में कहा गया है कि शहर के रीगल चौराहे के पास रानी सराय क्षेत्र में मेट्रो रेल परियोजना का प्रस्तावित पुल बनाए जाने के लिए करीब 200 घने पेड़ों पर कटाई का खतरा मंडरा रहा है। इसके चलते हजारों तोतों से उनकी प्राकृतिक बसाहट छिन सकती है।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा, ''अंतरिम उपाय के रूप में निर्देश दिया जाता है कि सुनवाई की अगली तारीख तक रानी सराय क्षेत्र में किसी भी पेड़ को काटा या शिफ्ट नहीं किया जाएगा।''
रानी सराय क्षेत्र में पेड़ों की प्रस्तावित कटाई पर रोक
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है।याचिकाकर्ता के वकील लवेश सारस्वत ने रानी सराय क्षेत्र में पेड़ों की प्रस्तावित कटाई को अलग-अलग नियम-कायदों के खिलाफ बताते हुए हाईकोर्ट में कहा कि अगर पेड़ कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो पर्यावरण व हरित आवरण को नुकसान पहुंचेगा और पारिस्थितिकी तंत्र का असंतुलन उत्पन्न होगा।
याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि रानी सराय क्षेत्र के पेड़ हजारों तोतों का घर हैं और इन पक्षियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित किया गया है।
डिवीजन बेंच ने इन दलीलों और हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मेन बेंच के एक आदेश पर गौर करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि सक्षम प्राधिकारी की वैध अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48-ए और 51 का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने से संबंधित यह मामला उस पर्यावरण संरक्षण से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 का अभिन्न अंग है। यह अनुच्छेद प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।
इंदौर में 2019 से जारी है मेट्रो रेल कॉरिडोर का निर्माण
इंदौर में 31.32 किलोमीटर लंबे मेट्रो रेल कॉरिडोर का निर्माण वर्ष 2019 से जारी है, लेकिन घनी आबादी वाले आवासीय और वाणिज्यिक इलाकों में इस परियोजना को लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
मूल परियोजना के मुताबिक, शहर में कुल 31.32 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल कॉरिडोर बनाया जाना है और इसकी प्रस्तावित लागत 7,500.80 करोड़ रुपये है। हालांकि, प्रोजेक्ट में किए जा रहे बदलावों के कारण इसकी लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है।




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