मंदिर में गेहूं दान नहीं करने पर दलित परिवार को पीटा, पीड़ित बोले- बच्चों को क्या खिलाएंगे? VIDEO
घटना महाराजगंज गांव की बताई जा रही है, जहां दबंगों ने परिवार से मंदिर के नाम पर तय मात्रा में गेहूं देने की मांग की थी। परिवार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए कहा कि हम दान देने की हालत में नहीं हैं, जिसके पीड़ितों पर लाठी-डंडे बरसाए गए।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां कथित तौर पर मंदिर के लिए गेहूं दान न दे पाने पर एक दलित परिवार के साथ बुरी तरह से मारपीट की गई। घटना महाराजगंज गांव की बताई जा रही है, जहां दबंगों ने परिवार से मंदिर के नाम पर तय मात्रा में गेहूं देने की मांग की थी। परिवार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए कहा कि हम दान देने की हालत में नहीं हैं, जिसके पीड़ितों पर लाठी-डंडे बरसाए गए।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी उनके घर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे। धीरे-धीरे उन लोगों ने हमला करना शुरू कर दिया। घर के सदस्यों को बाहर घसीटकर लाए और लाठी-डंडों, सरियों, ईंट और पत्थरों से हमला कर दिया। महिलाएं और बच्चे भी हिंसा की चपेट में आए। हमले में परिवार के पांच सदस्य घायल हुए हैं, जिन्हें बाद में इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार पहले ही गेहूं दे दिया था और अधिक देने की स्थिति में नहीं थे। परिवार के एक सदस्य ने कहा, “अगर हम अपना सारा गेहूं दान कर देंगे, तो सालभर बच्चों को क्या खिलाएंगे?” घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर आरोपियों को परिवार पर हमला करते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश है और एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जातीय दबाव और सामाजिक असमानता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ितों ने श्याम पटेल, हरदयाल पटेल, कृपाल पटेल, राजा भैया पटेल, रामस्वरूप पटेल और भगवतदयाल पटेल सहित अन्य लोगों पर हमला करने का आरोप लगाया है। उनका यह भी कहना है कि आरोपियों ने घर में रखा बचा हुआ गेहूं भी जबरन उठा लिया, लेकिन उसे ले जाने वाले वाहन को अब तक जब्त नहीं किया गया है।
मामले में पुलिस ने कार्रवाई की बात कही है। मध्य प्रदेश पुलिस के सिविल लाइंस थाना प्रभारी आशुतोष श्रोती के मुताबिक, मंदिर के लिए गेहूं दान को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद में हिंसा में बदल गया। पुलिस ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी फरार है।
हालांकि, पीड़ित परिवार पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि यह अचानक हुआ झगड़ा नहीं, बल्कि योजना बनाकर किया गया हमला था। परिवार ने यह भी सवाल उठाया है कि मंदिर समिति के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिस पर जबरन दान वसूली का आरोप है। यह घटना एक बार फिर समाज में मौजूद जातीय असमानता और दबंगई की गंभीर तस्वीर सामने लाती है।




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