इंदौर अग्निकांड: 8 मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली चौंकाने वाली बात, बच्चे का ‘शव’ निकला सोफे का फोम
आठ लोगों की दर्दनाक मौत वाले इंदौर अग्निकांड में एक बेहद ही हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। पुलिस जिसे बच्चे का शव समझ कर पोस्टमार्टम के लिए ले गई थी, असल में वह सोफे का फोम निकला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यह सनसनीखेज लापरवाही उजागर हुई, जिससे जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

आठ लोगों की दर्दनाक मौत वाले इंदौर अग्निकांड में एक बेहद ही हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। पुलिस जिसे बच्चे का शव समझ कर पोस्टमार्टम के लिए ले गई थी, असल में वह सोफे का फोम निकला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यह सनसनीखेज लापरवाही उजागर हुई, जिससे जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
इंदौर में हुए भयावह अग्निकांड में पुलिस की लापरवाही के कारण एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। 8 लोगों की दर्दनाक मौत वाले इस हादसे में पुलिस जिस जली हुई वस्तु को मासूम बच्चे का शव मानकर पोस्टमार्टम के लिए ले गई थी, वह दरअसल सोफे का जला हुआ फोम निकला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद यह सनसनीखेज गलती उजागर हुई, जिससे जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
धुएं और झुलसने से सभी ने दम तोड़ा
डॉक्टरों द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले 8 साल के तनय के शरीर का केवल एक पैर ही बरामद हो सका है, जबकि धड़ और सिर चार दिन बाद भी नहीं मिल पाए हैं। इस खुलासे के बाद फोरेंसिक टीम ने एक बार फिर दुर्घटनाग्रस्त मकान का रुख किया है और मलबे में बच्चे के शेष अंगों की तलाश तेज कर दी है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी की भी मौत करंट लगने से नहीं हुई, बल्कि जहरीले धुएं और आग की लपटों में झुलसने से सभी ने दम तोड़ा।
मासूम तनय समेत कुल 8 लोगों की मौत
इस भीषण हादसे में उद्योगपति मनोज पुगलिया, उनकी बहू सिमरन, विजय सेठिया, सुमन सेठिया, रुचिका उर्फ टीनू, कार्तिक, राशि और मासूम तनय समेत कुल 8 लोगों की मौत हो गई थी। एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों ने शनिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंपी। इसमें एक और अहम तथ्य सामने आया। सिमरन के गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई, जबकि परिजनों और नौकरानी ने उन्हें चार माह की गर्भवती बताया था।
करंट फैलने की आशंका खारिज
हादसे के बाद मृतक मनोज पुगलिया के बेटे सौरभ ने डॉ. मोहन यादव के सामने आरोप लगाया था कि फायर ब्रिगेड ने बिजली सप्लाई बंद किए बिना पानी डाला, जिससे करंट फैलने की आशंका बनी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि करंट से किसी की मौत नहीं हुई। वहीं, विजय सेठिया और कार्तिक की मौत कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के प्रभाव से होना सामने आया है।
शव बुरी तरह झुलस गए थे
घटनास्थल के हालात इतने भयावह थे कि कई शव बुरी तरह झुलस गए थे। मनोज पुगलिया और सिमरन के शव छत पर चैनल गेट के पास मिले, जबकि सबसे अंत में एसडीईआरएफ टीम ने मलबे से तनय का अधजला हिस्सा निकाला। डॉक्टरों के अनुसार, पहचान के लिए बेहद सीमित अवशेष ही मौजूद थे। तनय के जिस हिस्से को पुलिस ने धड़ समझा, वह दरअसल फर्नीचर का जला फोम था।
बिजली के खंभे से नहीं हुई थी आग की शुरुआत
जांच में यह भी सामने आया है कि आग की शुरुआत बिजली के खंभे से नहीं, बल्कि घर के बाहर खड़ी कार से हुई थी। कार में बैटरी ब्लास्ट होने की बात भी सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। फायर, बिजली, पुलिस और फोरेंसिक विभाग मिलकर घटना की जांच कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना के वक्त सुबह करीब साढ़े तीन बजे एक राहगीर ने आग की लपटें देख शोर मचाया और घरवालों को जगाने की कोशिश की थी। अब पुलिस उस व्यक्ति की तलाश में जुटी है, ताकि घटना की कड़ी को पूरी तरह जोड़ा जा सके।
नए आशियाने की तलाश
इस दर्दनाक हादसे के बाद पुगलिया परिवार पूरी तरह बिखर गया है। घर जलकर राख हो गया। परिवार के बचे सदस्य अब भी उसी इलाके में नया आशियाना ढूंढ रहे हैं। मनोज पुगलिया की पत्नी सुनीता की तबीयत भी फिर बिगड़ गई है और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजस्थान के सादलगढ़ से वर्षों पहले रोजगार की तलाश में निकले मनोज ने इंदौर में कड़ी मेहनत से कारोबार खड़ा किया था, जो इस हादसे में पूरी तरह स्वाहा हो गया।




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