MP में धार भोजशाला विवाद मामले में हाई कोर्ट में पूरी हुई सुनवाई, अब सबको फैसले का इंतजार
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सभी पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, तकनीकी रिपोर्ट, पुरातात्विक अवशेषों और सर्वे की वीडियोग्राफी का गहन अध्ययन किया। लंबे समय तक चली बहस और विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

मध्य प्रदेश के धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में इंदौर हाई कोर्ट में पिछले कई सप्ताह से चल रही लगातार सुनवाई मंगलवार को पूरी हो गई। इस दौरान हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले के सभी पक्षों हिंदू पक्ष, मुस्लिम पक्ष, जैन पक्ष और ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं अब इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मामले में अदालत के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है, जिस पर पूरे प्रदेश सहित देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।
इस मामले में इंदौर हाई कोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने ASI द्वारा कराए गए वैज्ञानिक सर्वे, वीडियोग्राफी, तकनीकी रिपोर्ट और पुरातात्विक साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। ASI ने कोर्ट के समक्ष करीब दो हजार से अधिक पन्नों की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पेश की, जिसमें भोजशाला परिसर से जुड़े कई ऐतिहासिक और संरचनात्मक तथ्यों का उल्लेख किया गया।
ASI ने 98 दिन तक किया था वैज्ञानिक सर्वे
मामले में ASI द्वारा लगभग 98 दिनों तक वैज्ञानिक तरीके से सर्वे किया गया था। सर्वे के दौरान परिसर की मैपिंग, संरचनात्मक अध्ययन, वीडियोग्राफी और पुरातात्विक अवशेषों की जांच की गई। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने ASI की रिपोर्ट और सर्वे प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए। मुस्लिम पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि सर्वे प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और रिपोर्ट में कई तथ्यों को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया गया। इस पर कोर्ट ने ASI से विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा।
हिंदू पक्ष ने भोजशाला को बताया सरस्वती मंदिर
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर है और यहां लंबे समय से हिंदू पक्ष पूजा-अर्चना की मांग करता रहा है। हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में कई ऐतिहासिक दस्तावेज, प्रतिमाओं के अवशेष, स्तंभों की संरचना और पुरातात्विक प्रमाण पेश करते हुए अपने दावे को मजबूत बताया।
मुस्लिम पक्ष ने किया मस्जिद होने का दावा
दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने इसे कमाल मौला मस्जिद परिसर बताते हुए अपनी धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला दिया। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह स्थल वर्षों से मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और ASI रिपोर्ट को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
जैन पक्ष ने बताया भोजशाला से अपना कनेक्शन
इस विवाद में जैन समाज ने भी अपना पक्ष रखते हुए भोजशाला परिसर की जमीन पर अधिकार होने का दावा किया। जैन समाज की ओर से कहा गया कि परिसर का इतिहास जैन परंपराओं से भी जुड़ा रहा है और इस पहलू को भी अदालत के समक्ष रखा गया। साथ ही जैन समाज ने उस मूर्ति को भी अपना बताया जिसके देवी सरस्वती की होने का दावा करते हुए लंदन में होना बताया जा रहा है। जैन पक्ष ने बताया कि वह जैन देवी अंबिका की मूर्ति है, और इसके बारे में उसने ब्रिटिश म्यूजियम से प्राप्त पत्र का हवाला दिया।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सभी पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, तकनीकी रिपोर्ट, पुरातात्विक अवशेषों और सर्वे की वीडियोग्राफी का गहन अध्ययन किया। लंबे समय तक चली बहस और विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
रिपोर्ट- हेमंत




साइन इन