प्यास बुझाने की जद्दोजहद में कुएं में गिरा 5 महीने का तेंदुआ शावक, डूबने से मौत
वन विभाग के एसडीओ सुनील सुलिया ने बताया कि मृत शावक का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के तीन सदस्यीय पैनल द्वारा कराया जा रहा है। इसके बाद प्रोटोकॉल के तहत उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में धार जिले के बाग वन परिक्षेत्र में पानी की तलाश में भटक रहा एक पांच माह का तेंदुआ शावक कुएं में गिर गया, जिससे उसकी डूबने से मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार पाडल्या बीट क्षेत्र में दोपहर के समय एक चौकीदार जब कुएं पर मोटर चालू करने पहुंचा, तब उसने पानी में तैरता हुआ शावक का शव देखा और इसकी सूचना अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
मौके पर बाग पंचायत के सरपंच धर्मेंद्र बामनिया ने कुएं में उतरकर करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद शावक के शव को बाहर निकाला और वन विभाग को सौंप दिया। वन विभाग के एसडीओ सुनील सुलिया ने बताया कि मृत शावक का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के तीन सदस्यीय पैनल द्वारा कराया जा रहा है। इसके बाद प्रोटोकॉल के तहत उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
प्राकृतिक जल स्रोत सूखने के कारण
वन परिक्षेत्र अधिकारी एचएस कनोजे ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंगलों के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने के कारण वन्यजीव पानी की तलाश में बस्तियों के पास आ जाते हैं, जिससे ऐसे हादसे बढ़ जाते हैं। वन विभाग ने वन्यजीवों के लिए जंगल में अस्थायी जलस्रोत विकसित करने की योजना बनाई है, ताकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर पानी उपलब्ध कराया जा सके।
बीते महीने हो गई थी तेंदुए की मौत
बीते महीने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक दुखद खबर सामने आई थी, जहां पनपथा में एक तेंदुए की मौत हो गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही पार्क प्रबंधन के आला अधिकारी और रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। तेंदुआ एक खुले कुएं में गिर गया था, जिससे उसकी डूबने या चोट लगने के कारण मौत हो गई। तेंदुए की उम्र करीब 4 साल के आस-पास थी। जैसे ही स्थानीय लोगों के माध्यम से सूचना मिली, बीटीआर प्रबंधन की टीम सक्रिय हो गई थी। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए के शव को कुएं से बाहर निकाला लिया था।
नेशनल पार्क में लगातार बढ़ रही चीतों की संख्या
चंबल संभाग के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में भारतीय मूल की मादा चीता 'गामिनी' ने हाल में खुले जंगल में चार शावकों को जन्म दिया था। इसके साथ ही पार्क में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 57 हो गई है, जिनमें 37 चीते भारतीय मूल के हैं। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार यह पहली बार है जब भारत में जन्मी किसी मादा चीता ने खुले जंगल में शावकों को जन्म दिया। वर्ष 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्वास कार्यक्रम के बाद यह जंगल में दर्ज पहली सफल जन्म घटना मानी जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि कूनो का वातावरण अब चीतों के लिए अनुकूल होता जा रहा है।




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