ED Attaches Assets Worth 1 06 Crore of Indore Civic Official Rajesh Parmar in Disproportionate Assets Case आय से 175% अधिक संपत्ति, ED ने इंदौर के अधिकारी राजेश परमार और परिवार की संपत्तियां कीं जब्त, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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आय से 175% अधिक संपत्ति, ED ने इंदौर के अधिकारी राजेश परमार और परिवार की संपत्तियां कीं जब्त

प्नवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज एक मामले में सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिवार के सदस्यों की 1.06 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क की हैं।

Tue, 10 Feb 2026 06:18 PMAditi Sharma लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर, वार्ता
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आय से 175% अधिक संपत्ति,  ED ने  इंदौर के अधिकारी राजेश परमार और परिवार की संपत्तियां कीं जब्त

प्नवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज एक मामले में सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिवार के सदस्यों की 1.06 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क की हैं।

ईडी के दौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने मंगलवार को बताया कि उसने यह कुर्की श्री परमार द्वारा अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर कथित रूप से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में एक आवासीय घर, प्लॉट, एक फ्लैट और कृषि भूमि शामिल है, जो श्री परमार और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं।

ईडी ने इंदौर नगर निगम के अधिकारी परमार के खिलाफ भोपाल की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए जांच शुरू की थी।

प्राथमिकी के अनुसार, श्री परमार ने कथित तौर पर अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। आरोप है कि 2007 और 2022 के बीच लगभग 1.66 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की गई, जो उक्त अवधि के दौरान उनकी ज्ञात आय से 175 प्रतिशत से अधिक थी। अपराध से अर्जित संदिग्ध आय का मूल्य 1.21 करोड़ रुपये आंका गया था।

ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ कि अवैध गतिविधियों के माध्यम से अर्जित धन का उपयोग सीधे श्री परमार और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियों को खरीदने के लिए किया गया था। यह भी पाया गया कि धन के अवैध स्रोत को छिपाने के लिए परमार और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा किया गया था। बाद में इन निधियों को बैंक हस्तांतरण के माध्यम से घुमाया गया और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए उपयोग किया गया।

पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जांच के दौरान, श्री परमार अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियों की खरीद के लिए उपयोग किए गए धन के कानूनी स्रोत के बारे में कोई स्पष्टीकरण या दस्तावेजी सबूत देने में विफल रहे।

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