Congress raises questions over Indore receiving the cleanest city award, suspects fraud कांग्रेस ने इंदौर को सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिलने पर उठाए सवाल, फर्जीवाड़े की जताई आशंका, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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कांग्रेस ने इंदौर को सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिलने पर उठाए सवाल, फर्जीवाड़े की जताई आशंका

मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पिछले दिनों दूषित पेयजल के सेवन से लोगों की मौत के बाद बृहस्पतिवार को राज्य की वाणिज्यिक राजधानी को लगातार आठ बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिलने पर सवाल उठाए और इसमें फर्जीवाड़े की आशंका जताई।

Thu, 8 Jan 2026 02:24 PMRatan Gupta भाषा, भोपाल
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कांग्रेस ने इंदौर को सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिलने पर उठाए सवाल, फर्जीवाड़े की जताई आशंका

मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पिछले दिनों दूषित पेयजल के सेवन से लोगों की मौत के बाद बृहस्पतिवार को राज्य की वाणिज्यिक राजधानी को लगातार आठ बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिलने पर सवाल उठाए और इसमें फर्जीवाड़े की आशंका जताई।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिंघार ने इंदौर के कई इलाकों का दौरा करने और मौके पर पानी की गुणवत्ता की जांच करने के बाद यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के ‘स्वच्छता’ और ‘विकसित भारत’ के दावे जमीनी हकीकत में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं क्योंकि वहां के नलों में ‘जहर’ बह रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘इंदौर को आठ बार सबसे स्वच्छ शहर का इनाम मिला और वह पहले नंबर पर आया। अगर लोग सीवेज का पानी पीने को मजबूर हैं तो स्वच्छता रैंकिंग का कोई अर्थ नहीं। कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है... कागजों की गड़बड़ है। इंदौर के अंदर जो स्थिति है... आठ बार इनाम कैसे मिला? इनाम इन्होंने कैसे फर्जी दस्तावेज लगाकर लिए, यह सरकारी अधिकारी जानते हैं।’’

सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या यही देश का सबसे साफ शहर है, जिसके नगर निगम का बजट 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है और जो प्रदेश में सबसे ज़्यादा है। उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी नागरिकों को पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है।’’

इंदौर प्रशासन ने शहर में इस प्रकोप में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि की है जबकि स्थानीय लोगों ने दूषित जल पीने से छह माह के बच्चे समेत 17 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। हालांकि, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो जनवरी को कहा था कि उन्हें घटना में 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। इन सब दावों के बीच सरकार ने मंगलवार को 18 पीड़ित परिवारों के बीच मुआवजे का वितरण कर दिया।

सिंघार ने भागीरथपुरा से 5 से 18 किलोमीटर की दूरी पर बसे मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग और कनाडिया इलाकों का दौरा किया और दावा किया कि इंदौर में नल का पानी ‘जहर’ बन चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इन इलाकों के जल की गुणवत्ता की जांच की और इसका निष्कर्ष यह है कि भाजपा सरकार के स्वच्छता और विकसित भारत के दावे जमीनी हकीकत में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भागीरथपुरा से लेकर इंदौर के कई अन्य इलाकों में नलों से दूषित, बदबूदार और सीवेज मिला पानी आ रहा है जो इस बात का प्रमाण है कि यह केवल एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहरी प्रशासन की प्रणालीगत विफलता है।’’ कांग्रेस नेता ने सरकार पर सच्चाई को दबाने का भी आरोप लगाया और दावा किया कि इंदौर में दूषित पानी से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता के पुरस्कारों से लोग जिंदा नहीं रहते बल्कि जिंदा रहने के लिए साफ पानी चाहिए और राज्य सरकार इसमें विफल रही है। नेता प्रतिपक्ष ने पूरे प्रदेश में जल की गुणवत्ता की जांच कराए जाने की मांग की और सभी जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से अपील की कि वे भी अपने-अपने क्षेत्र में यह काम करें ताकि सच्चाई सामने आ सके और लोगों को मरने से बचाया जा सके। उन्होंने इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, दोषियों पर तत्काल कार्रवाई किए जाने और इंदौर के महापौर के इस्तीफे की मांग की।

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