अब युद्ध की परिभाषा बदल चुकी है... ग्वालियर में बोले CDS जनरल अनिल चौहान
ग्वालियर में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि अब युद्ध की परिभाषा बदल चुकी है और भारत किसी भी रूप में आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि आधुनिक युद्ध में जीत का नया आधार स्थिरता, गति और सटीक समय पर समन्वित कार्रवाई है।

ग्वालियर पहुंचे देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध की परिभाषा अब बदल चुकी है। भारत अब आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा। पहले युद्ध में जीत का आधार यह होता था कि कितने सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया या कितने विमान नष्ट किए गए, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने इन परंपरागत मानकों को गलत साबित कर दिया। आधुनिक युद्ध में जीत का नया आधार स्थिरता, गति, एक साथ कई मोर्चों पर कार्रवाई की क्षमता, सभी ऑपरेशनों का समन्वय, शुद्धता, सटीक समय और नुकसान का सही मूल्यांकन है।
द सिंधिया स्कूल के स्थापना दिवस में शामिल हुए सीडीएस
जनरल अनिल चौहान ग्वालियर के द सिंधिया स्कूल के 128वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि युद्ध किसी देश की नीति की निरंतरता है। सरकार नीति बनाती है और सेना उसका कार्यान्वयन करती है। यही सच्चे नेतृत्व का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि यह अमृतकाल देश की दिशा और दशा बदलने का समय है। प्रत्येक छात्र को अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
नेतृत्व और प्रतिबद्धता पर विचार
अपने संबोधन में जनरल चौहान ने लेफ्टिनेंट जनरल सिन्हा के एक उद्धरण का उल्लेख करते हुए राजनेता, नौकरशाह और सैनिकों के सोचने के तरीके को रोचक ढंग से समझाया। उन्होंने कहा, “जब कोई राजनेता ‘हां’ कहता है, तो उसका मतलब ‘शायद’ होता है; ‘शायद’ कहे, तो ‘न’ होता है; और यदि वह ‘न’ कहे, तो वह अच्छा राजनेता नहीं है। जब कोई नौकरशाह ‘न’ कहता है, तो उसका मतलब ‘शायद’ होता है; ‘शायद’ कहे, तो ‘हां’ होता है; और यदि वह शुरुआत में ही ‘हां’ कह दे, तो वह नौकरशाह नहीं है। लेकिन जब एक सैनिक ‘न’ कहता है, तो उसका मतलब स्पष्ट रूप से ‘न’ होता है; जब वह ‘हां’ कहता है, तो वह हर हाल में उस पर कायम रहता है। यदि सैनिक ‘शायद’ कहे, तो वह सैनिक नहीं है।” उन्होंने कहा कि सेना की यही स्पष्टता और प्रतिबद्धता राष्ट्र की असली ताकत है।
माधव पुरस्कार और ऐतिहासिक गौरव
इस वर्ष का माधव पुरस्कार भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री को प्रदान किया गया। समारोह में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि उनके पूर्वज, महाराजा महादजी सिंधिया ने भारतीय सेना का आधुनिकीकरण किया। उन्होंने हजारों सैनिकों को नवीनतम प्रशिक्षण प्रदान किया और सेना को आधुनिक तोपखाने व हथियारों से सुसज्जित किया। उनकी सेना ने अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली को अफगानिस्तान में वापस खदेड़ दिया। 1771 में दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराकर छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदू स्वराज के सपने को साकार किया। इसके अलावा, 1779 में महाराष्ट्र के वडगांव के युद्ध में निर्णायक जीत के साथ प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध में अंग्रेजों को परास्त किया।




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