भोजशाला विवाद : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट आज सुना सकता है फैसला, सभी पक्षों की नजरें टिकीं
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट 'पक्षपातपूर्ण' है और इसे हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं के दावों का समर्थन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति के विवाद के मामले में आज अपना फैसला सुना सकता है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट पिटीशन पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की थी। सभी संबद्ध पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने मंगलवार 12 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इस मामले से जुड़े वकीलों ने बताया कि हाईकोर्ट द्वारा शुक्रवार के लिए जारी वाद सूची में भोजशाला विवाद को लेकर दायर सभी छह मुकदमों में निर्णय सुनाने का जिक्र किया गया है।
हाईकोर्ट ने विवादित स्मारक से जुड़े अलग-अलग धार्मिक विश्वासों, ऐतिहासिक दावों, कानूनी प्रावधानों की जटिलताओं के साथ ही हजारों दस्तावेजों की पृष्ठभूमि में सुनवाई की है।
एएसआई द्वारा संरक्षित है स्मारक
सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश कीं और स्मारक में अपने-अपने समुदाय के लोगों के लिए उपासना का विशेष अधिकार मांगा है। यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
बता दें कि धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं, जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने विवादित परिसर में मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है।
एएसआई ने सौंपी थी 2000 पन्नों की रिपोर्ट
एएसआई ने स्मारक के वैज्ञानिक सर्वे के बाद 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था।
हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वे में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख गवाही देते हैं कि यह परिसर मूलत: एक मंदिर था।
उधर, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट 'पक्षपातपूर्ण' है और इसे हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं के दावों का समर्थन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
एएसआई ने इस दलील का खंडन करते हुए अदालत में कहा था कि सर्वे की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विशेषज्ञों की मदद से अंजाम दिया गया है। एएसआई ने कहा कि सर्वे टीम में तीन मुस्लिम जानकार शामिल थे और सर्वे के दौरान इस समुदाय के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद थे।
हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने का आदेश दिया था। एएसआई ने 22 मार्च 2024 से इस परिसर का सर्वे शुरू किया था। एएसआई ने 98 दिनों के विस्तृत सर्वे के बाद 15 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की थी।




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