Bhojshala Dispute ASI Submits Evidence in High Court Sanskrit Inscriptions on Stones Temple Converted into Mosque पत्थरों पर श्लोक, फिर मंदिर को मस्जिद बनाया; भोजशाला विवाद में हाई कोर्ट में नए सबूत, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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पत्थरों पर श्लोक, फिर मंदिर को मस्जिद बनाया; भोजशाला विवाद में हाई कोर्ट में नए सबूत

भोजशाला विवाद में एएसआई ने हाई कोर्ट में नए सबूत रखे। संस्था की ओर से बताया कि यहां मंदिर होने के पुख्ता सबूत हैं। पत्थरों पर संस्कृत श्लोक उकेरे हुए हैं। यह भी उल्लेख मिलता है कि बाद के दौर में इसे मस्जिद के रूप में परिवर्तित किया गया।

Tue, 5 May 2026 09:03 AMGaurav Kala भोपाल
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पत्थरों पर श्लोक, फिर मंदिर को मस्जिद बनाया; भोजशाला विवाद में हाई कोर्ट में नए सबूत

इंदौर में धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में एक बार फिर बड़ा तथ्य सामने आया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने साफ कहा है कि यहां मौजूद ढांचे का निर्माण मूल मंदिर की सामग्री से ही किया गया था। यही वजह है कि परिसर में मौजूद पत्थरों पर आज भी संस्कृत के श्लोक उकेरे हुए मिलते हैं।

एएसआई के अनुसार, वर्ष 1902-03 में हुए सर्वेक्षण में ही यह स्पष्ट हो गया था कि भोजशाला मूल रूप से मंदिर थी। समय-समय पर यहां पहुंचे कई विदेशी और भारतीय यात्रियों ने भी अपने विवरणों में इसे सरस्वती मंदिर के रूप में दर्ज किया है। इन विवरणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि बाद के दौर में इसे मस्जिद के रूप में परिवर्तित किया गया।

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दो घंटे चली तीखी बहस

मध्यय प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सोमवार को करीब दो घंटे तक चली सुनवाई में एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने मस्जिद पक्ष की आपत्तियों का एक-एक कर जवाब देते हुए सर्वे रिपोर्ट को प्रमाणिक बताया।

ब्रिटिश दौर के दस्तावेज भी पेश

एएसआई ने दलीलों के दौरान 1935 के उस आदेश पर भी सवाल उठाया, जिसमें इसे मस्जिद बताया गया था। तर्क दिया गया कि उस समय धार दरबार को ऐसी अधिसूचना जारी करने का अधिकार ही नहीं था। साथ ही ब्रिटिश अधिकारियों के बीच हुए पत्राचार का हवाला देते हुए बताया गया कि वे भोजशाला को लेकर बेहद संवेदनशील थे और इसके संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताते थे।

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राष्ट्रीय धरोहर, एएसआई सिर्फ संरक्षक

एएसआई ने कोर्ट को बताया कि 1904 से ही भोजशाला को राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर घोषित किया जा चुका है। संस्था खुद को इसका मालिक नहीं, बल्कि अभिभावक मानते हुए समय-समय पर इसके संरक्षण का काम करती रही है। वर्ष 1935 में इसके रखरखाव पर करीब 50 हजार रुपये खर्च किए जाने का भी उल्लेख किया गया।

वीडियोग्राफी पर उठा विवाद

सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष ने यह मुद्दा उठाया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद सर्वे की वीडियोग्राफी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फाइलें गूगल ड्राइव पर उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर आईटी सहायता लेकर उन्हें देखा जा सकता है। साथ ही 7 मई तक आपत्तियां प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

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हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने अतिरिक्त जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने साफ संकेत दे दिए कि सुनवाई अंतिम चरण में है। कोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि ग्रीष्मावकाश से पहले इस बहुचर्चित मामले में फैसला आ सकता है।

रिपोर्ट –हेमंत

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