अमित शाह ने जारी की वंदे मातरम् गाने से मना करने वाले विपक्षी नेताओं की लिस्ट, इसमें MP से भी एक विधायक का नाम
शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष होने पर उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए उम्मीद जतायी कि इस चर्चा के माध्यम से देश के बच्चे, युवा और आने वाली पीढ़ी यह बात समझ सकेंगे कि वंदे मातरम् का देश को स्वतंत्रता दिलाने में क्या योगदान रहा है।

संसद के शीतकालीन सत्र में पिछले दो दिनों से वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही है, इसी दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक ऐसी सूची सदन के पटल पर रखी जिसमें वंदे मातरम् को लेकर आपत्ति दर्ज कराने वाले विपक्षी राजनेताओं के नाम शामिल हैं। इस लिस्ट में मध्य प्रदेश के एक कांग्रेसी विधायक आरिफ मसूद का भी नाम शामिल है। मसूद भोपाल मध्य सीट से विधायक हैं, वह वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर करते हुए इसे गाने से इनकार कर चुके हैं। वहीं जब उन्हें अमित शाह द्वारा जारी की गई लिस्ट के बारे में बताते हुए उनसे इस बारे में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि मैंने वंदे मातरम् का विरोध नहीं किया है, लेकिन मैं बस यही कहना चाहता हूं कि मैं उसे नहीं गा पाऊंगा।
मसूद ने कहा, 'देश में इंडिगो की फ्लाइट बंद है, पैसेंजर परेशान हैं, किसान को खाद नहीं मिल रही, नौजवान तो शुरू से ही रोजगार के लिए रो रहा है, लेकिन देश की सबसे बड़ी संसद में एक गान को लेकर चर्चा हो रही है, यह अफसोस और चिंता की बात है।'

इसके बाद जब आरिफ मसूद से पूछा गया कि आपका नाम भी वंदे मातरम् अस्वीकार्य करने वालों की सूची में शामिल है। तो उन्होंने कहा, ‘मैंने विरोध नहीं किया, मैंने सिर्फ यह कहा कि मैं इसको नहीं गा पाऊंगा। तो इसमें क्या गलत कहा। हंसी की बात तो यह है कि संसद में वो लोग वंदे मातरम् की बात कर रहे हैं जो आजादी के लड़ाई में नहीं थे, ना उनके हाथ में तिरंगा था, ना वंदे मातरम् उनके मुंह पर था। ये लोग तो अंग्रेजों की गुलामी कर रहे थे, या माफी मांग रहे थे, हमारे पूर्वज हाथ में तिरंगा लिए हुए थे और गोलियां खा रहे थे। उन्हें तो इस पर बात करने तक का अधिकार नहीं है।’

गृहमंत्री अमित शाह की लिस्ट में आरिफ मसूद का नाम इसलिए आया है, क्योंकि साल 2019 में उन्होंने वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि मैं वंदे मातरम् नहीं गा पाऊंगा, क्योंकि मेरे धार्मिक सिद्धांत इसकी इजाजत नहीं देते।




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