बिहार में बना है एकमात्र मंदिर, जहां अपना खुद का ही श्राद्ध कर सकते हैं लोग pitru paksha 2025 janarden vedi mandir in gya bihar where people do himself shradh pind daan while alive, Travel news in Hindi - Hindustan
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बिहार में बना है एकमात्र मंदिर, जहां अपना खुद का ही श्राद्ध कर सकते हैं लोग

Pitru Paksha 2025: बिहार के गया में हर साल लाखों लोग पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए पहुंचते हैं। यहां पर फल्गु नदी के साथ ही विभिन्न वेदियों पर पिंड दान करते हैं। लेकिन इसी गया में एक मंदिर ऐसा है जहां पर लोग जीते जी अपना खुद का पिंड दान और श्राद्ध करते हैं। 

Sat, 6 Sep 2025 04:57 PMAparajita लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार में बना है एकमात्र मंदिर, जहां अपना खुद का ही श्राद्ध कर सकते हैं लोग

भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन महीने की अमावस्या तक पितृ पक्ष होता है। इन दिनों लोग अपने परिवार में मरे पूर्वजों, पिता-माता, दादा-दादी आदि मृतकों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ करते हैं। इन पूर्वजों को ही पितृ बोला जाता है। पितृ के लिए दान-पुण्य करना फलदायी होता है और मान्यता है कि इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं। अब एक बाद तो समझ आ गई होगी कि पिंड दान हमेशा मरने के बाद अगली पीढ़ी का वंशज देता है। गया में पिंडदान देने और पितृों की आत्मा की शांति के लिए दान-पुण्य करने दूर-दूर से लोग आते हैं। लेकिन क्या आपने कोई ऐसी जगह सुनी है जहां लोग खुद का ही पिंडदान करें।

गया में बना है आत्म पिंडदान का मंदिर

गया में पितरों का श्राद्ध,तर्पण और पिंड दान करने के बाद कुछ भी बचता नही है। मान्यता है कि यहां पर श्राद्ध करने के बाद पितृ ऋण से मुक्ति मिल जाती है। गया मे फल्गु नदी के तट पर भगवान राम ने अपने भाईयों समेत राजा दशरथ का पिंड दान कर उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष दिलवाया था। इसी मान्यता के आधार पर गया में लोग पिंड दान के लिए आते हैं। लेकिन इसी गया में एक मंदिर है जनार्दन वेदी मंदिर, जहां पर लोग खुद का श्राद्ध करते हैं।

यहां किया जाता है खुद का पिंड दान

कहा गया है कि गया में 54 पिंड वेदी और 53 ऐसी जगह हैं जहां पर पितरों का पिंड दान किया जाता है। लेकिन जनार्दन मंदिर वेदी एकमात्र ऐसी वेदी हैं जहां पर आत्मश्राद्ध किया जाता है। यहां लोग जीते जी खुद का पिंड दान करते हैं। गया में भस्मकूट पर्वत पर माता मंगला गौरी मंदिर में उत्तर में ये वेदी स्थित है। जहां पर स्वयं भगवान विष्णु जनार्दन स्वामी के रुप में पिंड ग्रहण करते हैं।

कौन लोग करते हैं अपना श्राद्ध

ऐसे लोग जिनका परिवार में कोई नहीं बचता या जिनके श्राद्ध करने के लिए कोई संतान नहीं होती। वो इस जगह पर जीते जी अपना पिंड दान कर देते हैं। वहीं गृहस्थ जीवन त्याग चुके वैरागी हो रहे लोग भी अपना पिंड दान करने इस जगह पर आते हैं।

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