आज की डेटिंग इतनी थकाने वाली क्यों है? डॉक्टर ने बताया दिमाग का खेल Why Dating Is Harder Than Ever Today According to a Neurologist, रिलेशनशिप टिप्स - Hindustan
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आज की डेटिंग इतनी थकाने वाली क्यों है? डॉक्टर ने बताया दिमाग का खेल

क्या आज के समय में डेटिंग ज्यादा मुश्किल लगती है? न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि कैसे डेटिंग ऐप्स, डोपामिन क्रेविंग और विकल्पों की भरमार रिश्तों को जटिल बना रही है।

Fri, 9 Jan 2026 08:26 AMShubhangi Gupta लाइव हिन्दुस्तान
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आज की डेटिंग इतनी थकाने वाली क्यों है? डॉक्टर ने बताया दिमाग का खेल

आज के दौर में डेटिंग पहले से कहीं ज्यादा जटिल, थकाने वाली और भावनात्मक रूप से उलझी हुई महसूस होती है। जहां पहले रिश्ते समय, धैर्य और धीरे-धीरे समझ विकसित होने पर टिकते थे, वहीं आज डेटिंग ऐप्स, तेज लाइफस्टाइल और लगातार विकल्पों की मौजूदगी ने कनेक्शन को सतही बना दिया है। कई लोग यह महसूस करते हैं कि सही इंसान मिलने के बावजूद भी मन पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। मुंबई के न्यूरोलॉजिस्ट और TEDx स्पीकर डॉ सिद्धार्थ वारियर बताते हैं कि आज की डेटिंग इसलिए मुश्किल हो गई है क्योंकि लोग एक साथ दो सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं- क्या यह इंसान मेरे लिए सही है और क्या कहीं कोई इससे बेहतर विकल्प मौजूद है?

क्या आपको भी लगता है कि आज के समय में डेटिंग पहले से कहीं ज्यादा उलझन भरी, थकाने वाली और भावनात्मक रूप से कठिन हो गई है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। न्यूरोसाइंस के अनुसार, इसके पीछे हमारे दिमाग और डिजिटल माहौल की बड़ी भूमिका है।

  1. समय की कमी बन रही है सबसे बड़ी रुकावट: किसी को सही मायनों में जानने के लिए समय देना जरूरी होता है। लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी, लगातार स्क्रीन पर बने रहना और काम का दबाव लोगों को रिश्तों में समय देने से रोकता है। बिना समय दिए रिश्ते सतही ही रह जाते हैं।
  2. विकल्पों की भरमार और कन्फ्यूजन: डेटिंग ऐप्स ने विकल्पों की कोई कमी नहीं छोड़ी। हर स्वाइप के साथ दिमाग को लगता है कि शायद अगला इंसान और बेहतर हो सकता है। इसे न्यूरोसाइंस में Paradox of Choice कहा जाता है, जहां ज्यादा विकल्प इंसान को असंतुष्ट और असमंजस में डाल देते हैं।
  3. डोपामिन का जाल: नई चैट, नया मैच और पहली डेट दिमाग में डोपामिन रिलीज करती है जिससे खुशी और एक्साइटमेंट महसूस होता है। लेकिन जैसे ही यह नयापन खत्म होता है, दिमाग फिर से नई उत्तेजना ढूंढने लगता है। यही वजह है कि लोग जल्दी बोर होकर आगे बढ़ जाते हैं।
  4. कमिटमेंट एक प्रोसेस है: डॉ वारियर कहते हैं कि रिश्ते किसी पार्टी ड्रग की तरह नहीं, बल्कि एक वर्कआउट की तरह होते हैं जिसमें नियमित मेहनत और धैर्य चाहिए। असली कमिटमेंट किसी इंसान से नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया से होता है जिसमें दोनों लोग समय और भावनाएं निवेश करते हैं। आज की डेटिंग मुश्किल इसलिए नहीं है क्योंकि प्यार खत्म हो गया है, बल्कि इसलिए क्योंकि हमारा दिमाग और डिजिटल दुनिया दोनों हमें टिकने नहीं देते।

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