सास या बहु, घर तोड़ने में कौन ज्यादा जिम्मेदार है? साइकोलॉजिस्ट ने बताई 80% परिवारों की सच्चाई! Psychologist Explains Who Really Affects Family Harmony Mother in Law or Daughter in Law, रिलेशनशिप टिप्स - Hindustan
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सास या बहु, घर तोड़ने में कौन ज्यादा जिम्मेदार है? साइकोलॉजिस्ट ने बताई 80% परिवारों की सच्चाई!

साइकोलॉजिस्ट डॉ माला वोहरा खन्ना के अनुसार, परिवार टूटने की जिम्मेदारी सास या बहू में से किसी एक के कंधे पर डालना सही नहीं है। कहीं ना कहीं ये दोनों ही इसकी जिम्मेदार होती हैं। चलिए जानते हैं कैसे-

Fri, 19 Dec 2025 05:42 PMAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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सास या बहु, घर तोड़ने में कौन ज्यादा जिम्मेदार है? साइकोलॉजिस्ट ने बताई 80% परिवारों की सच्चाई!

किसी भी फैमिली के लिए सास और बहू का रिश्ता बहुत ही इंपोर्टेंट होता है। यह रिश्ता अगर प्यार और समझ से भरा हो, तो पूरा परिवार खुश रहता है, वहीं अगर इस रिश्ते में कड़वाहट आ जाए तो इसका असर पूरे परिवार की शांति पर पड़ता है। कई परिवार तो इसी वजह से टूटने की कगार पर आ जाते हैं। यहां एक एक बड़ा सवाल ये ही की घर तोड़ने के पीछे आखिर ज्यादा जिम्मेदार कौन है, सास या बहु? लेकिन सच इतना सीधा नहीं होता। साइकोलॉजिस्ट डॉ माला वोहरा खन्ना के अनुसार, परिवार टूटने की जिम्मेदारी सास या बहू में से किसी एक के कंधे पर डालना सही नहीं है। कहीं ना कहीं ये दोनों ही इसकी जिम्मेदार होती हैं। चलिए जानते हैं कैसे।

सास की भूमिका और इमोशन

साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, मां और बेटे का रिश्ता बहुत गहरा और इमोशनल होता है। एक मां अपने बेटे को पालने में अपनी पूरी जिंदगी लगा देती है। अब जब बेटे की शादी होती है और उसकी जिंदगी में पत्नी आती है, तो कई बार मां के मन में इनसिक्योरिटी की भावना पैदा हो जाती है। उन्हें लगने लगता है कि कहीं उनका बेटा उससे दूर न हो जाए या अब उन्हें पहले जैसी अहमियत ना मिले। यही भावना धीरे-धीरे जलन का रूप ले सकती है।

सास की तरफ से समझदारी है जरूरी

डॉ माला आगे कहती हैं कि अगर सास इस भावना को समझ लें और यह स्वीकार कर लें कि बेटे की जिंदगी में पत्नी की जगह अलग है, तो बहुत सी समस्याएं वहीं खत्म हो सकती हैं। मां अगर ये ना सोचें कि बेटे को अब उनकी जरूरत नहीं है, तो रिश्तों में बैलेंस बना रह सकता है।

बहू की तरफ से भी समझ और जिम्मेदारी जरूरी है

बहू के लिए भी यह जरूरी है कि वह अपने पति और उसकी मां के रिश्ते को सम्मान दे। डॉ माला बताती हैं कि जिस तरह एक महिला अपनी मां से जुड़ी होती है, उसी तरह एक पुरुष भी अपनी मां से इमोशनली जुड़ा हुआ होता है। अगर बहू ये समझ लें कि सास के जो इमोशन है वो नेचुरल हैं और उन्हें पूरी तरह नकारना सही नहीं है, तो रिश्ते आसान हो सकते हैं।

बहू का यह सोचना कि शादी के बाद पति सिर्फ उसी का हो गया है, कई बार रिश्तों में टकराव को बढ़ाता है। अगर बहू सास को भी परिवार का अहम हिस्सा मानें और उन्हें सम्मान दे, तो परिवार में अपनापन बना रहता है।

स्पेस और सम्मान की जरूरत

हर रिश्ते में स्पेस बहुत जरूरी होता है। सास और बहू दोनों को एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। हर बात में दखल देना या हर फैसले पर सवाल उठाना रिश्तों को कमजोर करता है। अगर सास बहू को घर के कामों और फैसलों में अपनी पहचान बनाने दें और बहू सास के अनुभव और उम्र का सम्मान करें, तो घर का माहौल पॉजिटिव बना रहता है। सम्मान और समझ से दिया गया स्पेस रिश्तों को मजबूत बनाता है।

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