बोर्ड एग्जाम के तनाव को मात देने के 3 सबसे असरदार तरीके, जानें क्या है मनोचिकित्सक की सलाह
आपके अंदर चलने वाली बातें ही या तो आपको संभालती हैं, या आपको और तोड़कर रख देती हैं। ऐसे में जब कभी आपको लगे कि आप बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार नहीं हैं, तो खुद से कैसे बात करें, बता रही हैं गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और मनोचिकित्सक चांदनी तुगनैत।

बोर्ड एग्जाम के समय बच्चों के मन को कई विचार अकसर परेशान करने लगते हैं जैसे, ‘सबको सब आता है, बस मुझे ही नहीं,’ ‘मैं कितना भी पढ़ लूं, फिर भी काफी नहीं है, ‘अगर फेल हो गया तो क्या होगा?’ यह विचार मन में आना कोई कमजोरी नहीं है। दरअसल, यह डर, थकान और दबाव का नतीजा होते हैं। इस समय सबसे ज्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि आप खुद से कैसे बात कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके अंदर चलने वाली बातें ही या तो आपको संभालती हैं, या आपको और तोड़कर रख देती हैं। ऐसे में जब कभी आपको लगे कि आप बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार नहीं हैं, तो खुद से कैसे बात करें, बता रही हैं गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और मनोचिकित्सक चांदनी तुगनैत।
ऐसे समय पर इन बातों पर ज्यादा ध्यान दीजिए
खुद को जज करने की जगह खुद को समझना सीखें- जब मन में यह ख्याल आए कि ‘मैं अच्छा नहीं हूं’, तो तुरंत खुद पर गुस्सा करने की जरूरत नहीं है। यह सोच अक्सर तब आती है जब दिमाग थक जाता है या डर हावी हो जाता है। ऐसे समय खुद से यह कहने की कोशिश करें कि ‘मैं डर रहा हूं, इसलिए ऐसा महसूस हो रहा है।’ डर को पहचानना, खुद को कमजोर मानने से कहीं ज्यादा अच्छा है।
रिजल्ट को अपनी वैल्यू से अलग रखें- अक्सर बोर्ड एग्जाम के दौरान बच्चे अपनी पूरी पहचान नंबरों से जोड़ लेते हैं। ऐसा लगता है कि अगर नंबर अच्छे नहीं आए, तो वे अच्छे इंसान भी नहीं रहेंगे। यह सोच बहुत भारी होती है। खुद से यह कहना जरूरी है कि एग्जाम सिर्फ यह दिखाता है कि आपने कितना याद रखा, यह नहीं कि आप कितने समझदार या मेहनती हैं। आपकी वैल्यू रिजल्ट से बड़ी है।
खुद से वही बात कहें, जो आप अपने दोस्त से कहते- सोचिए, अगर आपका दोस्त कहे कि वह अच्छा नहीं है, तो क्या आप उसे डांटेंगे। शायद नहीं। आप उसे समझाएंगे, उसका हौसला बढ़ाएंगे। लेकिन खुद से बात करते समय हम बहुत सख्त हो जाते हैं। जब मन टूटे, तो खुद से वही भाषा इस्तेमाल करें जो आप किसी अपने के लिए करते हैं। नरमी कमजोरी नहीं होती, सहारा होती है।
डर को दबाने की जगह उसे शब्द दें- डर से भागने की कोशिश अक्सर उसे और बड़ा बना देती है। बेहतर है कि आप खुद से साफ कहें कि आपको किस बात का डर लग रहा है। फेल होने का डर, लोगों को निराश करने का डर, या खुद से उम्मीदें पूरी न कर पाने का डर। जब डर को नाम मिल जाता है, तो वह थोड़ा हल्का हो जाता है।
आज की कोशिश को काफी मानना सीखें- हर दिन बेस्ट देना हमेशा मुमकिन नहीं होता। कुछ दिन दिमाग चलता है, कुछ दिन नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि आप पीछे जा रहे हैं। खुद से यह कहना सीखें कि ‘आज जितना हो सका, मैंने किया।’ यह सोच आपको अगले दिन फिर उठने की ताकत देती है।
एक्सपर्ट की सलाह- बोर्ड एग्जाम के समय खुद से बात करने का तरीका बहुत मायने रखता है। अगर आपकी अंदर की आवाज लगातार आपको नीचा दिखाएगी, तो पढ़ाई करना और मुश्किल हो जाएगा। लेकिन अगर वही आवाज आपको समझेगी, संभालेगी और थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ने में मदद करेगी, तो डर कम होने लगेगा। याद रखें, यह समय आपकी काबिलियत को नहीं, आपकी हिम्मत को परख रहा है। और हिम्मत सिर्फ पढ़ाई से नहीं, खुद से सही तरीके से बात करने से भी बनती है।
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