रात में कई बार नींद से जागता है बच्चा? डॉक्टर की बात पर दें ध्यान pediatrician advice How to reduce your child frequent night wakes up, पेरेंटिंग टिप्स - Hindustan
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रात में कई बार नींद से जागता है बच्चा? डॉक्टर की बात पर दें ध्यान

बहुत से पेरेंट्स इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा रात में कई बार जागता है और फिर से बच्चे को सुलाने के लिए खूब मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में बच्चों की डॉक्टर की सलाह जरूर सुनें। 

Sat, 7 March 2026 06:26 PMAvantika Jain लाइव हिन्दुस्तान
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रात में कई बार नींद से जागता है बच्चा? डॉक्टर की बात पर दें ध्यान

बच्चों को समझना काफी मुश्किल होता है। खासतौर से तब जब बच्चा बोल नहीं सकता हो। पेरेंट्स अक्सर शिकायत करते हैं कि रात में उनका बच्चा कई बार जागता है और रोने लगता है। बच्चे की इस आदत की वजह से पेरेंट्स की भी नींद पूरी नहीं होती है। ऐसे में बच्चों की डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर बताया है कि कैसे आप रात में बच्चे के बार-बार उठने की आदत को कम कर सकते हैं। जानिए-

क्या कहती हैं डॉक्टर

बहुत से पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनका बच्चा रात में बार-बार उठता है। जिसकी वजह से पेरेंट्स खासतौर से मां परेशान हो जाती हैं। जिसपर बच्चों की डॉक्टर माधवी कहती हैं कि 2 से 3 साल की उम्र में बच्चे कई बार रात में बहुत बार उठते हैं और कभी कम उठते हैं। अगर आपका बच्चा रात में कई बार उठता है तो जानिए इसे कैसे कम कर सकते हैं।

सबसे पहले इस बात पर करें गौर

बच्चों का स्लीप रूटीन रोजाना एक समय पर होना चाहिए। डेली 8 से 9 बजे के बीच में सुलाएं जिससे सर्केडियन रिदम को मेंटेन किया जा सके। लेकिन अगर आपका बच्चा कभी 10 कभी 12 या 1 बजे सोता है कोई रिदम नहीं है तो शरीर का मेलाटोनिन हार्मोन सर्केडियन रिदम या नींद को ट्रिगर करता है। वहीं अगर बच्चा देर रात तक जगता है तो स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है। जो रात में कई बार जगने का कारण बनता है।

स्लीप रूटीन टाइम पर है तो क्या करें

डॉक्टर कहती हैं कि बच्चे का अगर स्लीप रूटीन सही है लेकिन फिर भी रात में जगता है तो सुलाने से पहले गुनगुने पानी से नहलाएं। ऐसा करने से बच्चा बहुत रिलेक्स हो जाता है। ओवर स्टीम्यूलेशन भी कम होता है, जिससे बच्चे को रात की अच्छी नींद मिलती है और बच्चे का रात में बार-बार उठना भी कम होता है।

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सोने से पहले मालिश

बच्चों के जब दांत आ रहे होते हैं तब वह काफी परेशान होता है। इसलिए बच्चे के सोने से पहले फेस, खासतौर से जबड़ों के आसपास की अच्छी तरह से मालिश करें। इसे भी स्लीप रूटीन का हिस्सा बना सकते हैं।

कमरे में न हो रौशनी

अगर आपको डिम लाइट में सोने की आदत है तो इसे बंद कर दें। क्योंकि बच्चा जैसे जैसे बड़ा होता है लाइट उसे परेशान कर सकती है। कमरे में बिल्कुल अंधेरा करके सोने से बच्चे के बार-बार जागने की आदत अपने आप कम हो जाती है। क्योंकि 5-6 महीने का बच्चा एसी की लाइट को देखकर भी जाग सकता है।

को-स्लीपिंग है बेस्ट

बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जो अपने क्रिब में आराम से सो जाते हैं। लेकिन अगर बहुत बार बच्चा जागता है तो आप उसके साथ सोएं। आपके टच, खुशबू से बच्चा अपनी स्लीप रेगुलेट कर सकता है। अगर आपका बच्चा हर घंटे में सोकर उठता है तो इस तरह से सोने पर वह कम से 3-4 घंटे के लिए लगातार सो सकता है।

खुद के सोने का रूटीन

आज कल पेरेंट्स का भी कोई रूटीन नहीं है। जिसपर डॉक्टर कहती हैं कि अगर आप लोगों का कोई रूटीन नहीं होगा तो बच्चे का भी रूटीन नहीं बन पाएगा।

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