एक उम्र के बाद पिता से क्यों दूर होने लगते हैं बच्चे? एक्सपर्ट बता रहीं 4 वजह
अक्सर देखा जाता है कि 12–13 साल के बाद बच्चे अपने पिता से दूरी बनाने लगते हैं। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा का कहना है कि इसके पीछे एक ही कारण नहीं होता, बल्कि कई छोटी-छोटी बातें मिलकर पिता और बच्चे के बीच की दूरी को जन्म देती हैं।

किशोरावस्था वह दौर है जब बच्चा ना तो पूरी तरह छोटा रहता है, ना ही पूरी तरह बड़ा बन पाता है। यह समय उसके लिए खुद को पहचानने, अपनी सोच बनाने और दुनिया को अपने नजरिए से देखने का होता है। इस उम्र में बच्चे ज्यादा सेंसिटिव होते हैं और अपने आस-पास के रिश्तों को गहराई से महसूस करते हैं। खासकर पिता के साथ उनका रिश्ता इस समय बड़ी तेजी से बदल सकता है। कई बार ये बदलाव पॉजिटिव भी होता है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि 12–13 साल के बाद बच्चे अपने पिता से दूरी बनाने लगते हैं। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा का कहना है कि इसके पीछे एक ही कारण नहीं होता, बल्कि कई छोटी-छोटी बातें मिलकर पिता और बच्चे के बीच की दूरी को जन्म देती हैं। चलिए जानते हैं ये बातें क्या हैं-
मौजूद रहना ही काफी नहीं
अक्सर कई फादर्स को ये लगता है कि अगर वे घर में हैं, तो अपने बच्चे के पास ही हैं। लेकिन घर में मौजूद रहने और वास्तव में बच्चे के पास होने में फर्क है। अगर पिता घर पर होते हुए भी अपना ज्यादातर समय किसी कोने में, टीवी या फोन में बिताते हैं, तो बच्चा ये महसूस कर लेता है कि उसकी जिंदगी में उनका इमोशनल कनेक्शन कमजोर है। बच्चों को परफेक्ट पिता की नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की जरूरत होती है जो उनके साथ समय बिताए, उनकी बातें सुनें और उनकी छोटी-छोटी खुशियों में शामिल हो।
सिर्फ नियम नहीं, भरोसा भी जरूरी
लड़के अक्सर अपनी ताकत और क्षमता को परखना चाहते हैं, जबकि लड़कियां यह जानना चाहती हैं कि वे कितनी अहम हैं। अगर पिता का रिश्ता बच्चों से सिर्फ नियम लागू करने और डांटने तक सीमित रह जाए, तो भरोसा और अपनापन खत्म होने लगता है। इस स्थिति में बच्चे अपनी बात शेयर करना छोड़ देते हैं और दोस्तों या सोशल मीडिया में वो अटेंशन या वैलिडेशन खोजने लगते हैं जो उन्हें घर में नहीं मिल रही होती।
ग्रेड से ज्यादा जरूरी है बच्चे को समझना
पुष्पा शर्मा के अनुसार, बच्चों से अक्सर यह सुनने को मिलता है कि पापा को सिर्फ ग्रेड और रूल्स की परवाह थी। यह सोच इस वजह से बनती है क्योंकि कुछ पिता बच्चों को इंसान के रूप में देखने से ज्यादा उन्हें एक प्रोजेक्ट की तरह ट्रीट करते हैं, जहां सिर्फ बच्चे का रिजल्ट और डिसिप्लिन मायने रखता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपके करीब रहे, तो उसे कंट्रोल करने के बजाय उसके इमोशंस को समझें और पेशेंस के साथ पेरेंटिंग करें।
इंतजार हमेशा काम नहीं आता
कुछ पिता सोचते हैं कि अभी सख्त रहेंगे और बच्चे बड़े हो जाने पर उनसे दोस्ती कर लेंगे। लेकिन हकीकत यह है कि बच्चे इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं करते। अगर 12 साल तक आपने उनसे जुड़ाव नहीं बनाया, तो हाई स्कूल या कॉलेज के समय अचानक से करीब आना मुश्किल हो जाता है। तब तक वे यह तय कर चुके होते हैं कि कौन उनकी सुनता है और कौन नहीं, कौन उन्हें सुरक्षित महसूस कराता है और कौन नहीं। पेरेंटिंग कोच के मुताबिक इस एज आते-आते धीरे-धीरे पिता और बच्चे के बीच में एक दूरी मेंटेन हो जाती है, जिसे काम करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
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