परफेक्ट मां नहीं, खुश मां बनें: ‘मॉम गिल्ट’ से बाहर आने के 5 असरदार तरीके
Tips To Deal With Mom Guilt : मॉम गिल्ट ज्यादातर महिलाओं को हर रोज 'परफेक्ट' बनने के लिए उकसाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, असल जीवन में एक बच्चे को 'परफेक्ट मां' नहीं, बल्कि एक 'खुश और स्वस्थ मां' की जरूरत होती है।

एक मां चाहे वर्किंग हो या हाउस वाइफ, ज्यादातर समय इसी अपराध बोध से घिरी रहती है कि वो चाहते हुए भी अपने बच्चे को अपना पूरा समय नहीं दे पाती है या उसे सही से अनुशासित नहीं कर पा रही, या शायद मैं खुद के लिए समय निकालकर कुछ गलत या स्वार्थी हो रही हूं। अगर आप भी कहीं ना कहीं खुद को इन्हीं सवालों और अपराध बोध से घिरा हुआ पाती हैं तो इस लेख के माध्यम से आज आपको मॉम गिल्ट से बाहर निकलने के 5 असरदार तरीके पता चलने वाले हैं। जी हां, यह मॉम गिल्ट ज्यादातर महिलाओं को हर रोज 'परफेक्ट' बनने के लिए उकसाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, असल जीवन में एक बच्चे को 'परफेक्ट मां' नहीं, बल्कि एक 'खुश और स्वस्थ मां' की जरूरत होती है।
मॉम गिल्ट से बाहर निकलने के 5 असरदार तरीके
1. 'परफेक्शन' का मोह त्यागें
सोशल मीडिया पर दिखने वाली तस्वीरों जैसी लाइफ असलियत में किसी भी मां की नहीं होती। कोई भी मां हर समय मुस्कुराती हुई और घर को चकाचक नहीं रख सकती। आप इस सच को जितना जल्दी स्वीकार कर लेंगी उतनी जल्दी मॉम गिल्ट से बाहर निकलने में आपको मदद मिलेगी। हकीकत यह है कि बच्चे आपकी सफाई नहीं, आपकी उपस्थिति और हंसी याद रखेंगे।
2. खुद की देखभाल स्वार्थ नहीं है
कई माएं यह गलतफहमी पाल लेती हैं कि अगर वो घर पर अपने बच्चे को पार्टनर के पास छोड़कर जिम या सहेलियों के साथ समय गुजारने के लिए कुछ देर घर से निकल जाएंगी तो वो स्वार्थी हो जाएंगी। ऐसा करके वो अपने बच्चे पर अन्याय करेंगी। जबकि आपको यह समझने की जरूरत है कि आप एक खाली कप से दूसरों को चाय नहीं पिला सकते। जब आप खुद मानसिक रूप से तरोताजा महसूस करेंगी, तभी आप अपने बच्चे को बेहतर ऊर्जा दे पाएंगी।
3. 'क्वालिटी' बनाम 'क्वांटिटी'
दिन भर बच्चे के पास रहकर फोन पर लगे रहने से बेहतर है कि आप उसे दिन के सिर्फ 30 मिनट दें, लेकिन वो 30 मिनट पूरी तरह से आपके बच्चे के लिए होने चाहिए। बिना किसी गैजेट के साथ बिताया गया वह छोटा सा समय बच्चे के साथ आपके रिश्ते को कहीं अधिक मजबूत बनाता है।
4. अपनी तुलना दूसरों से न करें
हर मां की परिस्थितियां, सपोर्ट सिस्टम, परिवार और बच्चे अलग होते हैं। किसी और को देखकर खुद को कम आंकना बंद करें। आप अपने बच्चे की जरूरतों को किसी और से बेहतर समझती हैं। जिन्हें पूरा करने के लिए आप दिन-रात मेहनत करती हैं।
5. मदद मांगने में न करें संकोच
महिलाएं अकसर घर और बाहर, दोनों जगह की जिम्मेदारियां अकेले संभालने के चक्कर में खुद को इतना थका देती हैं कि उनके पास कई बार अपने बच्चे को देने के लिए भी एनर्जी नहीं बचती है। सुपरवुमन बनने की कोशिश में खुद को न थकाएं। अगर घर के कामों में या बच्चे की देखभाल में पार्टनर, परिवार या दोस्तों की मदद की जरूरत है, तो खुलकर मांगें। मदद लेना आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी जरूरत है।
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