बोर्ड परीक्षा के दौरान पेरेंट्स की ये बातें तोड़ देती हैं आत्मविश्वास, मनोचिकित्सक से जानें किन बातों का रखें ख्याल CBSE board exams 2026 psychotherapist shares what parents say during board exams can increase or reduce anxiety in kids, पेरेंटिंग टिप्स - Hindustan
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बोर्ड परीक्षा के दौरान पेरेंट्स की ये बातें तोड़ देती हैं आत्मविश्वास, मनोचिकित्सक से जानें किन बातों का रखें ख्याल

इस समय क्या कहा जा रहा है, उसका असर उतना ही होता है जितना कैसे कहा जा रहा है। गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और फेमस मनोचिकित्सक डॉ. चांदनी तुगनाइट से जानते हैं बोर्ड परीक्षा के दौरान माता-पिता की वो कौन सी बातें हैं जो बच्चों की चिंता बढ़ भी सकती है और कम भी कर सकती हैं।

Thu, 29 Jan 2026 11:44 PMManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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बोर्ड परीक्षा के दौरान पेरेंट्स की ये बातें तोड़ देती हैं आत्मविश्वास, मनोचिकित्सक से जानें किन बातों का रखें ख्याल

बोर्ड एग्जाम सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, पूरे घर के लिए एक तनाव भरा समय बन जाता है। किताबें खुली रहती हैं, माहौल सख्त हो जाता है और हर बातचीत किसी न किसी तरह एग्जाम से जुड़ जाती है। इस दौरान माता-पिता का मन भले ही बच्चों की मदद करने का हो, लेकिन कई बार उनके शब्द अनजाने में बच्चों की एंग्जायटी बढ़ा देते हैं। सच यह है कि इस समय क्या कहा जा रहा है, उसका असर उतना ही होता है जितना कैसे कहा जा रहा है। गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और फेमस मनोचिकित्सक डॉ. चांदनी तुगनाइट से जानते हैं बोर्ड परीक्षा के दौरान माता-पिता की वो कौन सी बातें हैं जो बच्चों की चिंता बढ़ भी सकती है और कम भी कर सकती हैं।

जब एक एग्जाम को भविष्य से जोड़ दिया जाता है

अक्सर माता-पिता कहते हैं, ‘यह बोर्ड है, इससे ही सब तय होगा’ या ‘अब नहीं पढ़े तो आगे कुछ नहीं होगा।’ ये बातें बच्चों को मोटिवेट करने के लिए कही जाती हैं, लेकिन बच्चों के दिमाग में यह डर बैठा देती हैं कि एक गलती उनका पूरा भविष्य खराब कर सकती है। इससे पढ़ाई पर ध्यान कम और डर ज्यादा हो जाता है। बच्चा कोशिश करने के बजाय घबराने लगता है।

तुलना करना सेल्फ कॉन्फिडेंस तोड़ देता है

‘देखो शर्मा जी का बेटा कितना पढ़ रहा है’ या ‘तुम्हारे दोस्त को तो सब आता है’ जैसी बातें बहुत आम हैं। लेकिन तुलना बच्चों की एंग्जायटी को तेजी से बढ़ाती है। इससे बच्चा यह मानने लगता है कि वह किसी से कम है। पढ़ाई एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है, लेकिन तुलना उसे प्रतियोगिता और डर में बदल देती है।

हर समय पढ़ाई की याद दिलाना थका देता है

कुछ माता-पिता पूरे दिन यही पूछते रहते हैं, ‘पढ़ लिया?’, ‘कितना हुआ?’, ‘रिवीजन किया?’ यह पूछना चिंता से आता है, लेकिन बच्चों के लिए यह लगातार दबाव बन जाता है। उन्हें लगता है कि चाहे वे कितना भी पढ़ लें, वह कभी काफी नहीं होगा। इससे थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है।

कौन सी बातें एंग्जायटी कम करती हैं

जब माता-पिता कहते हैं, ‘हम तुम्हारे साथ हैं’, ‘पूरी कोशिश करना ही काफी है’ या ‘नंबर तुम्हें नहीं, तुम्हारी मेहनत को दिखाते हैं’, तो बच्चे को राहत मिलती है। इससे उसे यह भरोसा मिलता है कि उसका मूल्य सिर्फ रिजल्ट से तय नहीं होगा। ऐसा भरोसा बच्चों को शांत रखता है और उनका फोकस बेहतर करता है।

प्रयास पर बात करना, रिजल्ट पर नहीं

अगर बातचीत का केंद्र यह हो कि ‘आज कितनी देर ध्यान से पढ़ा’ या ‘कौन सा चैप्टर थोड़ा मुश्किल लग रहा है’, तो बच्चा खुलकर बात करता है। जब सिर्फ नंबरों की बात होती है, तो बच्चा अपनी परेशानी छुपाने लगता है। प्रयास पर ध्यान देने से बच्चा सीखने की प्रक्रिया में जुड़ा रहता है।

शांत माहौल शब्दों से ज्यादा असर करता है

माता-पिता का अपना तनाव भी बच्चों तक पहुंचता है। अगर घर में लगातार चिंता, फुसफुसाहट या सख्त माहौल हो, तो बच्चे भले कुछ न कहें, लेकिन सब महसूस करते हैं। शांत आवाज, सामान्य दिनचर्या और छोटे ब्रेक बच्चों को सुरक्षित महसूस कराते हैं।

सलाह- बोर्ड एग्जाम जरूरी हैं, लेकिन बच्चे उनसे ज्यादा जरूरी हैं। इस समय माता-पिता के शब्द बच्चों के लिए या तो सहारा बन सकते हैं या बोझ। थोड़ी समझ, थोड़ा धैर्य और सही भाषा बच्चों की एंग्जायटी को काफी हद तक कम कर सकती है। याद रखिए, एग्जाम कुछ दिनों के होते हैं, लेकिन इस दौरान बच्चों के मन में बैठी बातें बहुत लंबे समय तक साथ रहती हैं।

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