सावधान! आपकी दी हुई टॉफी-चिप्स बदल रहे हैं बच्चे का स्वभाव, एक्सपर्ट ने दी ये सलाह beware excessive eating of toffees chips could increase behavioural issues in kids side effects of ultra processed foods, पेरेंटिंग टिप्स - Hindustan
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सावधान! आपकी दी हुई टॉफी-चिप्स बदल रहे हैं बच्चे का स्वभाव, एक्सपर्ट ने दी ये सलाह

कई शोध बताते हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPFs) और शुगर का बढ़ता सेवन बच्चों के मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन पैदा करता है। रंग-बिरंगे पैकेटों में बंद ये खाद्य पदार्थ न केवल शरीर को बीमार कर रहे हैं, बल्कि बच्चों के व्यवहार को भी अनियंत्रित बना रहे हैं।

Wed, 31 Dec 2025 07:06 PMManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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सावधान! आपकी दी हुई टॉफी-चिप्स बदल रहे हैं बच्चे का स्वभाव, एक्सपर्ट ने दी ये सलाह

आज के समय में बच्चों का जिद्दी होना, एकाग्रता की कमी और छोटी-छोटी बात पर चिड़चिड़ाना आम समस्या बनता जा रहा है। लोग अकसर इस समस्या को बच्चों की बढ़ती उम्र या अनुशासन की कमी से जोड़कर देखने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इसका असली दोषी बच्चों का स्वभाव नहीं बल्कि आपकी रसोई में छिपा हुआ हो सकता है। कई शोध बताते हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPFs) और शुगर का बढ़ता सेवन बच्चों के मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन पैदा करता है। रंग-बिरंगे पैकेटों में बंद ये खाद्य पदार्थ न केवल शरीर को बीमार कर रहे हैं, बल्कि बच्चों के व्यवहार को भी अनियंत्रित बना रहे हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मेधा कहती हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPFs) जैसे चिप्स, पैकेज्ड नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, मीठे सीरियल्स, टॉफी-कैंडी और मीठे ड्रिंक्स देखने में भले ही आकर्षक लगते हैं लेकिन इनका बच्चों के मूड, व्यवहार और सीखने की क्षमता पर गहरा असर पड़ सकता है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन से बच्चों में दिखते हैं ये बदलाव

सीके बिरला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम सिदाना कहती हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में आर्टिफिशियल रंग, प्रिजर्वेटिव्स, नमक की अधिकता, अनहेल्दी फैट और रिफाइंड शुगर मौजूद होती है। इसके अलावा तेजी से पचने वाली शुगर ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा देती है और फिर तेजी से गिरा देती है। इस उतार-चढ़ाव के कारण शरीर में स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे बच्चों में चिड़चिड़ापन, जरूरत से ज्यादा उछल-कूद, ध्यान की कमी, मूड स्विंग्स, जल्दी थकान, घबराहट और बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया देने की आदत बढ़ जाती है। लंबे समय तक UPFs खाने से गट-ब्रेन एक्सिस भी प्रभावित होता है। ये खाद्य पदार्थ आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ऐसे फैटी एसिड्स कम बनते हैं जो दिमाग की सेहत और भावनाओं को संतुलित रखने के लिए जरूरी होते हैं। कई शोध बताते हैं कि जो बच्चे नियमित रूप से UPFs खाते हैं, उनमें एंग्जायटी, आक्रामक व्यवहार और भावनात्मक असंतुलन का खतरा ज्यादा होता है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के सेहत को नुकसान

ये खाद्य पदार्थ बच्चों की आंतों (गट) की सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं। गट हमारे दिमाग से सीधा जुड़ा हुआ होता है। यहीं से सेरोटोनिन जैसे 'फील-गुड हार्मोन' बनते हैं। जब गट हेल्थ बिगड़ती है, तो बच्चों की भावनात्मक स्थिरता और व्यवहार पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, UPFs पौष्टिक भोजन की जगह ले लेते हैं, जिससे बच्चों को प्रोटीन, हेल्दी फैट, आयरन, जिंक और जरूरी विटामिन नहीं मिल पाते-जो दिमाग के विकास के लिए बेहद जरूरी होते हैं।

पेरेंट्स उठाएं जरूरी कदम

माता-पिता घर का फ्रेश और संतुलित भोजन बच्चों की डाइट में शामिल करके उनके स्वभाव में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बाहर से कुछ भी खरीदते समय फूड लेबल पढ़ना, मीठे स्नैक्स कम करना और फलों से बने हेल्दी ट्रीट्स बच्चों के लिए फायदेमंद हो सकती है। बच्चों के स्कूल टिफिन को थोड़ा हेल्दी बनाएं, मीठे ड्रिंक्स की जगह पानी या घर का बना पेय देना जैसे छोटे-छोटे बदलाव भी बच्चों के व्यवहार को शांत, ध्यान को बेहतर और भावनाओं को संतुलित बना सकते हैं।

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