बच्चे की उम्र 5 से ज्यादा है? सेक्स एजुकेशन से जुड़ी ये 7 बातें आज ही समझाएं, रहेंगे सेफ! 7 Sex Education Lessons Parents Must Teach Kids After Age 5 for safety, पेरेंटिंग टिप्स - Hindustan
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बच्चे की उम्र 5 से ज्यादा है? सेक्स एजुकेशन से जुड़ी ये 7 बातें आज ही समझाएं, रहेंगे सेफ!

Parenting Tips: एक उम्र के बाद बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना जरूरी है। ये शर्म की बात नहीं, बल्कि बच्चों की सेफ्टी के लिए बेहद जरूरी है। बच्चे की उम्र 5 साल से ज्यादा हैं, तो कम से कम ये बातें तो उन्हें हर हाल में बता ही दें।

Tue, 28 April 2026 09:02 PMAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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बच्चे की उम्र 5 से ज्यादा है? सेक्स एजुकेशन से जुड़ी ये 7 बातें आज ही समझाएं, रहेंगे सेफ!

बच्चों को सुरक्षित रखना हर माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आज के समय में केवल अच्छा खाना, पढ़ाई और अच्छे संस्कार देना ही काफी नहीं है, बल्कि बच्चों को अपने शरीर, बाउंड्रीज और सेफ्टी के बारे में सही जानकारी देना भी बहुत जरूरी है। ये सब तभी पॉसिबल है जब बच्चे को सही उम्र में सेक्स एजुकेशन दी जाए। कई लोग सेक्स एजुकेशन का नाम सुनते ही असहज हो जाते हैं, जबकि सच बात तो यह है कि सही उम्र में सही जानकारी देना बच्चों को समझदार, अलर्ट और आत्मविश्वासी बनाता है। सेक्स एजुकेशन शर्म की बात नहीं, बल्कि सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। इसलिए अगर बच्चा 5 साल से ऊपर का है, तो उसे कुछ जरूरी बातें जरूर समझानी चाहिए।

असली खेल और छिपे हुए खेल का फर्क समझाएं

बच्चों को साफ शब्दों में बताइए कि अच्छे खेल हमेशा खुले में, सबके सामने और खुशी से खेले जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति कहे कि चलो छुपकर खेलते हैं, किसी को मत बताना या अकेले चलो, तो बच्चे को तुरंत वहां से हट जाना चाहिए। उसे समझाएं कि ऐसी बात घर आ कर तुरंत बतानी है। यह सीख बच्चे को खतरे से बचा सकती है।

गुड टच और बैड टच की जानकारी दें

बच्चों को समझाएं कि हर टच सही नहीं होता। अगर किसी के छूने से बच्चा डर जाए, असहज महसूस करे, दुखी हो जाए या अजीब लगे तो वह बैड टच है। बच्चे को यह भी बताएं कि अगर कोई परिचित व्यक्ति भी ऐसा करे, तब भी उसे तुरंत मना करना है और घर में बताना जरूरी है।

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शरीर के अंगों के सही नाम सिखाएं

बच्चों को उनके शरीर के सभी अंगों के सही और सरल नाम बताइए। प्राइवेट पार्ट्स के लिए भी स्पष्ट शब्दों का उपयोग करें। जब बच्चा सही शब्द जानता है, तो वह किसी भी परेशानी को साफ तरीके से बता सकता है। उलझे हुए शब्द या इशारों में बात करने से कई बार बात समझ नहीं आती।

स्विमिंग सूट नियम समझाएं

बच्चों को बताइए कि शरीर के वे हिस्से जो अंडरवियर या स्विमिंग सूट से ढके रहते हैं, वे प्राइवेट हिस्से हैं। उन्हें पैरेंट्स के अलावा कोई नहीं देख सकता और ना ही छू सकता है। आग कोई ऐसा करने की कोशिश करे, तो तुरंत पेरेंट्स को ये बात बताएं।

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'ना' कहना सिखाएं

बच्चे को यह अधिकार दीजिए कि अगर उसे कुछ गलत लगे तो वह साफ शब्दों में 'ना' कह सके। कई बार बच्चे बड़े लोगों से डर जाते हैं, इसलिए उन्हें समझाएं कि गलत बात के सामने चुप रहना जरूरी नहीं है। चाहे सामने कोई बड़ा हो, रिश्तेदार हो या हम उम्र बच्चा, अगर कुछ गलत लगे तो मना करना बिल्कुल सही है।

सीक्रेट रखने की आदत से बचाएं

बच्चों को समझाएं कि शरीर से जुड़ी कोई भी बात सीक्रेट नहीं होती। अगर कोई कहे कि यह बात किसी को मत बताना, तो बच्चे को तुरंत माता-पिता को बताना चाहिए। अच्छे सरप्राइज और बुरे सीक्रेट का फर्क भी समझाएं। जो बात डर पैदा करे, वह छिपाने वाली नहीं होती।

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बच्चों का भरोसा जीतना सबसे जरूरी है

सबसे जरूरी बात ये है कि अगर बच्चा कभी कोई बात बताता है, तो उसे डांटिए नहीं, डराइए नहीं और तुरंत उस पर शक मत कीजिए। उसकी बात ध्यान से सुनिए और भरोसा दीजिए कि आपने सही किया जो बताया। जब बच्चा देखता है कि घर वाले उसकी बात मानते हैं, तब वह खुलकर अपनी हर बात शेयर करता है।

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