कोविड के बाद महिलाओं में बढ़ा कैंसर का जोखिम? फोर्टिस के डॉक्टर ने बताएं कारण world cancer day 2026 fortis doctor reveals women specific cancer trends post COVID 19 breast and ovary cancer rates, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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कोविड के बाद महिलाओं में बढ़ा कैंसर का जोखिम? फोर्टिस के डॉक्टर ने बताएं कारण

World Cancer Day 2026 : शोध बताते हैं कि 2020 और 2021 के दौरान स्तन कैंसर स्क्रीनिंग, सर्वाइकल कैंसर के पैप टेस्ट और एचपीवी परीक्षण में तेजी से गिरावट आई। भारत सहित कई देशों में मैमोग्राफी और पैप स्मीयर की दरें कोविड की लहरों के दौरान 40–60 प्रतिशत से अधिक कम हो गईं।

Tue, 3 Feb 2026 01:48 PMManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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कोविड के बाद महिलाओं में बढ़ा कैंसर का जोखिम? फोर्टिस के डॉक्टर ने बताएं कारण

कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया में महिलाओं की कैंसर देखभाल पर गहरा प्रभाव डाला। वैज्ञानिक अध्ययनों और अस्पतालों के आंकड़ों से पता चलता है कि इस अवधि में जांच और इलाज में हुई देरी ने हाल के वर्षों में कैंसर के रुझानों को बदलकर रख दिया है। लोगों के बीच कैंसर के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल दुनियाभर में 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस 2026 मनाया जाता है। फोर्टिस हॉस्पिटल (शालीमार बाग) के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुहैल कुरैशी कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान कैंसर के कई स्क्रीनिंग कार्यक्रम बंद कर दिए गए या सीमित कर दिए गए। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित शोध बताते हैं कि 2020 और 2021 के दौरान स्तन कैंसर स्क्रीनिंग, सर्वाइकल कैंसर के पैप टेस्ट और एचपीवी परीक्षण में तेजी से गिरावट आई। भारत सहित कई देशों में मैमोग्राफी और पैप स्मीयर की दरें कोविड की लहरों के दौरान 40–60 प्रतिशत से अधिक कम हो गईं। जिसके परिणामस्वरूप कई शुरुआती चरण के कैंसर की पहचान नहीं हो पाई। कई ऐसे कैंसर जो समय पर पकड़ में आने पर ठीक हो सकते थे, देर से पहचान के कारण एडवांस या असाध्य अवस्था में पहुंच गए।

स्तन व सर्वाइकल कैंसर के मामलों में वृद्धि

ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुहैल कुरैशी कहते हैं कि इन कारणों की वजह से कई महिलाएं कैंसर की एडवांस स्टेज में पहुंच रही हैं। एशिया, यूरोप और अमेरिका के कैंसर केंद्रों के अध्ययन बताते हैं कि कोविड के बाद स्टेज 2 और स्टेज 3 स्तन व सर्वाइकल कैंसर के मामलों में वृद्धि हुई है। हमारे देश में तो कई बार कैंसर अंतिम चरण में पता चल रहा है, जहां इलाज से पूर्ण ठीक होने की संभावना बहुत कम रह जाती है। देर से पहचान होने पर इलाज अधिक जटिल हो जाता है और रिकवरी भी कठिन हो सकती है।

इलाज में देरी

इलाज में देरी भी एक बड़ी समस्या रही। कई मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाए, और कुछ मामलों में कीमोथेरेपी तथा सर्जरी की तारीखें टालनी पड़ीं। क्लिनिकल रिसर्च के अनुसार, कुछ कैंसर विशेषकर स्तन और ओवरी कैंसर में 8 से 12 सप्ताह की देरी भी जीवित रहने की संभावना को प्रभावित कर सकती है।

मोटापा, स्तन और गर्भाशय कैंसर का कारण

महामारी के दौरान जीवनशैली में हुए बदलावों ने भी कैंसर जोखिम बढ़ाया। वैज्ञानिक रिपोर्टों में पाया गया कि लॉकडाउन के दौरान शारीरिक निष्क्रियता, वजन बढ़ना, खराब खान-पान, तनाव और नींद की गड़बड़ी बढ़ी। मोटापा स्तन और गर्भाशय कैंसर का ज्ञात जोखिम कारक है, और अब डॉक्टर इन जोखिम कारकों वाली महिलाओं की संख्या बढ़ते देख रहे हैं।

मानसिक तनाव

कोविड काल में लोग मानसिक तनाव और अवसाद से भी अछूते नहीं रहे। मेडिकल अध्ययनों से संकेत मिलता है कि लंबे समय तक तनाव प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है और हार्मोन संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से कैंसर के विकास और रिकवरी पर असर डाल सकता है।

महामारी के बाद बढ़ती स्क्रीनिंग और टीकाकरण ने दी राहत

सकारात्मक पहलू यह है कि महामारी के बाद जागरूकता बढ़ी है। अब कई महिलाएं स्क्रीनिंग और टीकाकरण के लिए अधिक तैयार हैं। एचपीवी वैक्सीनेशन और सर्वाइकल कैंसर जागरूकता अभियानों में हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है। टेलीमेडिसिन ने शुरुआती परामर्श और फॉलो-अप में भी मदद की है।

सलाह- वैज्ञानिक प्रमाण दर्शाते हैं कि कोविड के कारण स्क्रीनिंग, निदान और इलाज में देरी हुई, जिससे महिलाओं में कैंसर के बढ़ते मामले देखे गए। आगे की राह नियमित स्क्रीनिंग को मजबूत करना, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, एचपीवी टीकाकरण को प्रोत्साहित करना और समय पर कैंसर देखभाल सुनिश्चित करना है।

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