किसी को हार्ट अटैक आ रहा हो तो क्या करना चाहिए? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया 6 स्टेप फॉर्मूला! What to do if someone has a heart attack? Doctor explains the correct step by step response, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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किसी को हार्ट अटैक आ रहा हो तो क्या करना चाहिए? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया 6 स्टेप फॉर्मूला!

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ जीवितेश सतीजा बताते हैं कि अधिकतर मरीजों की जान इसलिए भी चली जाती है, क्योंकि आसपास मौजूद लोगों को पता ही नहीं होता कि करना क्या है। जबकि अगर शुरुआती कुछ मिनटों में सही कदम उठाया जाए, तो जान बच सकती है।

Fri, 12 Dec 2025 08:54 AMAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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किसी को हार्ट अटैक आ रहा हो तो क्या करना चाहिए? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया 6 स्टेप फॉर्मूला!

हार्ट अटैक के मामले आजकल काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में तो युवा भी इससे सुरक्षित नहीं हैं। एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में पहले दिल के दौरे पड़ने की औसत उम्र पश्चिमी देशों की तुलना में 10 साल कम है। इतना ही नहीं कुछ आंकड़ों के मुताबिक हर मिनट 4 भारतीयों की जान हार्ट अटैक की वजह से ही जा रही है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ जीवितेश सतीजा एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताते हैं कि अधिकतर मरीजों की जान इसलिए भी चली जाती है, क्योंकि आसपास मौजूद लोगों को पता ही नहीं होता कि करना क्या है। जबकि अगर शुरुआती कुछ मिनटों में सही कदम उठाया जाए, तो जान बच सकती है। डॉक्टर ने आगे विस्तार में बताया है कि किसी को हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए। आइए जानते हैं।

स्टेप 1: चेतावनी के संकेतों को पहचानें

सबसे पहले लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। अगर सीने में दर्द या भारीपन है, खासतौर से सीने के बीचों-बीच और ये दर्द आमतौर पर 5 मिनट से ज्यादा समय के लिए बना हुआ है। ये पेन बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैल सकता है। इस दौरान पसीना आना, मतली, सांस फूलना, चक्कर आना और घबराहट जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

बुजुर्ग, डायबिटीज के मरीज या कुछ महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक भी हो सकता है। इस दौरान बस कमजोरी, गैस जैसे बेचैनी या थकान महसूस होती है। अगर आपको ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं या ये अचानक से बढ़ जाते हैं, तो डॉक्टर को तुरंत सम्पर्क करें।

स्टेप 2: मदद के कॉल करें / अस्पताल पहुंचे

तुरंत 108/112 डॉयल करें और 'संभावित हार्ट अटैक' बताते हुए, कैथ लैब (एंजियोप्लास्टी सुविधा) वाले अस्पताल के लिए एम्बुलेंस की मांग करें। अगर आपके घर की 5-10 मिनट की दूरी पर कोई कैथ लैब सुविधा वाला अस्पताल है, जो वहां जानें पर विचार करें। इस समय छोटे मोटे अस्पताल ना जाएं। अगर एम्बुलेंस में 20-30 मिनट की देरी हो तो आप प्राइवेट वाहन की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन खुद गाड़ी ड्राइव ना करें।

स्टेप 3: तुरंत एस्पिरिन लें

अस्पताल जाते समय या फिर एम्बुलेंस को मदद के लिए बुलाने के बाद तुरंत मरीज को एस्पिरिन (300mg) की गोली दें। इसे चबा-चबाकर खाना है। आप घुलनशील एस्प्रिन की गोलियां जैसे डिस्प्रिन आदि भी ले सकते हैं। ये मौत के खतरे को 23% तक कम कर सकती है। हालांकि अगर आपको कोई एलर्जी हो या ब्लीडिंग अल्सर की हिस्ट्री हो तो अवॉइड करें।

स्टेप 4: मरीज को कंफर्टेबल महसूस कराएं

सबसे पहले मरीज को आधा झुकाकर (45°) लेटा दें, पूरा सीधा ना लिटाएं। आसपास ताजी हवा आने दें, उनके टाइट कपड़े ढीले करें और उन्हें शांत रखने की कोशिश करें ताकि दिल पर ज्यादा प्रेशर ना पड़े। उन्हें ज्यादा चलने, सीढ़ी उतरने या बेवजह हिलने-डुलने ना दें। बाकी अगर उन्हें पहले से डॉक्टर से सबलिंगुअल नाइट्रोग्लिसरीन (या सॉर्बिट्रेट) लेने की सलाह दी है, तो वे मदद के इंतजार में इसे ले सकते हैं। हालांकि तभी जब उनका बीपी 110mmHg से ज्यादा हो।

स्टेप 5: प्रतिक्रिया और सांस पर नजर रखें

लगातार मरीज के रिस्पॉन्स और सांस लेने की गति पर नजर बनाए रखें।अगर वे प्रतिक्रिया (रिस्पॉन्स) देना बंद कर दें, सांस ना ले पाएं या नाड़ी ना चल रही हो, तो ये कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। लगभग 10-20 प्रतिशत हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकते हैं। इस स्थिति में तुरंत एस-ओ-एस प्रोटोकॉल फॉलो करें और मरीज को बिना समय बर्बाद किए सीपीआर देना शुरू करें।

स्टेप 6: कार्डियक अरेस्ट होने पर करें ये काम

कार्डियक अरेस्ट होने पर तुरंत एस-ओ-एस प्रोटोकॉल फॉलो करें-

S: Shout for help, ensure safety- मदद के लिए चिल्लाएं और घटनास्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करें।

O: Observe and Assess- जीवन के संकेतों का निरीक्षण और आकलन करें (प्रतिक्रिया और सांस ऑब्जर्व करें)

S: Start CPR- यदि जीवन का कोई संकेत ना मिले तो तुरंत CPR देना शुरू करें।

ऐसे दें सीपीआर (CPR)

छाती के बीचों-बीच जोर से और तेजी से धक्का दें। ये लगभग 2 इंच की गहराई का होना चाहिए और 100-120 प्रति मिनट यानी 1 सेकंड में लगभग दो बार की गति से होना चाहिए। इसे तबतक जारी रखें जबतक डॉक्टर की मदद ना मिले या मरीज जीवन के कोई संकेत ना दिखाए। एक रिपोर्ट की मानें तो बिना सीपीआर दिए कार्डियक अरेस्ट में मौत की संभावना हर मिनट 10 प्रतिशत ज्यादा होती जाती है।

सामान्य गलतियां जो लोग करते हैं

* हार्ट अटैक को एसिडिटी समझकर घंटों इंतजार करना।

* पानी, सोडा या पेनकिलर ले कर काम चलाना।

* छाती की मालिश करना।

* मरीज को सीधा लिटा देना या खुद गाड़ी चलाना।

* परिवार की सलाह के लिए अस्पताल जाने में देरी करना।

* छोटे क्लीनिकों में समय बर्बाद करना। एक रिपोर्ट की मानें तो 70 प्रतिशत भारतीय हार्ट अटैक के मरीज अस्पताल 2 घंटे से ज्यादा देरी से पहुंचते हैं।

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