बच्चों की सेफ्टी के लिए अंगूर खिलाने का सही तरीका, पीडियाट्रिशियन ने बताया
अंगूर सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए ये गंभीर खतरा बन सकते हैं। गलत तरीके से दिए गए अंगूर बच्चों में कई बार चोकिंग का कारण बन जाते हैं।

माता-पिता अक्सर बच्चों की डाइट में फल शामिल करते समय यह मान लेते हैं कि जो चीज सेहतमंद है, वह पूरी तरह सुरक्षित भी होगी। लेकिन कई बार यही सोच अनजाने में बच्चों के लिए खतरा बन जाती है। अंगूर ऐसा ही एक फल है, जिसे लोग बिना सोचे-समझे छोटे बच्चों को दे देते हैं। गोल आकार और फिसलन भरी सतह के कारण अंगूर बच्चों में चोकिंग का बड़ा कारण बन सकते हैं।
पीडियाट्रिशियन Dr Nimish Kulkarni के अनुसार, 4–5 साल से कम उम्र के बच्चों को पूरे या बिना कटे अंगूर देना बेहद जोखिम भरा है। सही तरीके से फल देना बच्चों की सुरक्षा के लिए उतना ही जरूरी है जितना उसका पोषण मूल्य।
अंगूर बच्चों के लिए क्यों खतरनाक हैं?
अंगूर का आकार गोल और चिकना होता है, जो बच्चे के गले की नली (airway) के आकार से मिलता-जुलता है। अगर अंगूर फिसलकर गले में चला जाए, तो वह पूरी तरह सांस की नली को ब्लॉक कर सकता है। ऐसे में बच्चा ना रो पाता है, ना खांस पाता है और कुछ ही सेकंड में स्थिति गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि दुनियाभर की चाइल्ड सेफ्टी गाइडलाइंस और पीडियाट्रिशियन लगातार इस पर चेतावनी देते रहे हैं।
6 महीने से 1 साल के बच्चों के लिए सही तरीका
अगर आप अपने बच्चे को अंगूर देना चाहते हैं, तो कच्चे या पूरे अंगूर बिल्कुल ना दें। अंगूर को पहले अच्छी तरह धो लें, फिर स्टीम या प्रेशर कुक करें और उसे अच्छे से मैश करके सॉफ्ट प्यूरी बनाएं। इस तरह अंगूर देना सुरक्षित रहता है और चोकिंग का खतरा नहीं होता।
1 साल से बड़े बच्चों के लिए क्या करें?
एक साल से ऊपर के बच्चों को भी पूरे अंगूर देना सुरक्षित नहीं है। अंगूर को लंबाई में काटें (vertically), कभी भी गोल टुकड़ों में ना काटें, बेहतर है कि अंगूर को 4 हिस्सों (quarters) में काटकर दें। यह छोटा सा बदलाव अंगूर के गले में फंसने के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है।
किन बातों का रखें खास ध्यान
- 4–5 साल से कम उम्र के बच्चों को पूरे अंगूर ना दें।
- खेलते या दौड़ते समय अंगूर खाने ना दें।
- हमेशा बच्चे की निगरानी में ही फल खिलाएं।
- अंगूर के साथ-साथ चेरी टमाटर और छोटे गोल फल भी इसी तरह काटकर दें।
एक्सपर्ट की सलाह: डॉ. निमिश कुलकर्णी के अनुसार, 'अधिकतर चोकिंग एक्सीडेंट्स घर पर ही होते हैं और इन्हें थोड़ी सी समझदारी से रोका जा सकता है। सही तरीके से खाना देना बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।'
नोट: अंगूर पौष्टिक जरूर हैं, लेकिन बच्चों के लिए सही तरीके से ना दिए जाएं तो खतरा बन सकते हैं। थोड़ी सी सावधानी और सही कटिंग तकनीक अपनाकर आप अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकते हैं। स्मार्ट फीडिंग ही सेफ फीडिंग है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।
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