बच्चों को बिल्कुल न दें स्मार्टफोन, रिसर्च में दावा- दिमाग के साथ शरीर के लिए भी जानलेवा!
बच्चे आजकल कम उम्र में ही मोबाइल चलाना सीख लेते हैं और फिर उन्हें बुरी लत लग जाती है। रिसर्च में दावा किया जा रहा है कि 13 साल की उम्र से बच्चों को स्मार्टफोन देना काफी खतरनाक हो सकता है। चलिए बताते हैं इसके नुकसान क्या हैं।

आजकल छोटे बच्चे मोबाइल की लत का शिकार हो रहे हैं। घंटों स्क्रीन पर नजरें टिकाकर बच्चे बैठ जाते हैं और फिर खाने-पीने या खेलने पर ध्यान नहीं देते। मोबाइल न सिर्फ उनकी आंखों के लिए बुरा है बल्कि उनके फिजिकल-मेंटल ग्रोथ के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। 13 साल से कम उम्र वाले बच्चे स्मार्टफोन चला रहे हैं, जो काफी गलत है। अमेरिका में हजारों बच्चों के मानसिक और मस्तिष्क विकास पर की गई एक स्टडी (Adolescent Brain Cognitive Development Study) में पाया गया है कि 13 साल से कम उम्र वाले बच्चे जो मोबाइल चला रहे हैं, उनका शरीर कई बीमारियों को सीधा न्योता दे रहा है। स्टडी में ये नहीं कहा गया है कि सिर्फ फोन ही इसका कारण है लेकिन लॉन्ग स्क्रीन टाइम उनकी ग्रोथ पर कैसे बुरा असर डाल रहा है, ये बताया गया है।
क्या कहती है रिसर्च
स्टडी में बताए गए आंकड़ों के अनुसार, 12 साल से कम उम्र में फोन पाने वाले बच्चों में नींद की समस्याओं का जोखिम 60%, मोटापा 40% और डिप्रेशन का खतरा 30% तक ज्यादा पाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12-13 साल तक बच्चों का दिमाग बेहद कोमल होता है, ऐसे में सोशल मीडिया वाली लाइफ और चकाचौंध उनके दिमाग को कंट्रोल करती है। उन्हें खुद की दूसरों से तुलना, अच्छा बुरा, बुलिंग करना समझ नहीं आता है।
स्क्रोलिंग के शिकार
फोन के अंदर बसी अलग चकाचौंध वाली दुनिया बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। ऐसे में बच्चे उसमें और घुसते जाते हैं और बाहरी दुनिया यानी रिलेशन, खेलकूद, पढ़ाई से उनका मन कटने लगता है। ऐसे में बच्चों के दिमाग पर फोन का एक कंट्रोल सा बन जाता है। उन्हें हर समय फोन की कमी महसूस होने लगती है और वह खाते-पीते सिर्फ स्क्रीन स्क्रॉल करना पसंद करते हैं।

स्लीप साइकिल पर असर
मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट बच्चों की आंखों के साथ उनके दिमाग के लिए भी खतरनाक होती है। ये लाइट मस्तिष्क में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन को कम कर देती है, जो नींद लाने के लिए होता है। इससे नींद कम आती है और स्लीप साइकिल बिगड़ जाती है। ऐसे में बच्चे किसी भी चीज पर फोकस नहीं कर पाते हैं।
मोटापा
बच्चे मोबाइल चलाते हुए खाते रहते हैं, ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता कि वह क्या खा रहे हैं। खान-पान से मिलने वाला पोषण शरीर में फायदा नहीं करता। दिनभर खाने से मोटापा बढ़ जाता है।
कमजोर हड्डियां
बच्चे मोबाइल लेकर दिनभर एक ही जगह बैठे रहते हैं। बिल्कुल फिजिकल एक्टिविटी न होने के कारण बच्चों की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। बच्चों के लिए खेलना-कूदना काफी जरूरी है, खेल से ही मांसपेशियां मजबूत होती हैं। अगर वह एक जगह बैठे रहेंगे, तो शरीर एक्टिव नहीं रहेगा।
डिप्रेशन
सोशल मीडिया वाली लाइफ से बच्चे आपस में तुलना करने लगते हैं, माता-पिता भी उन्हें दूसरों के अच्छे लगते हैं। ऐसे में वह डिप्रेशन में आ जाते हैं। उन्हें तनाव बना रहता है और खुद को परफेक्ट बनाने की होड़ में वह गलत रास्ते निकल जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को 12 साल की उम्र के बाद फोन देना चाहिए। तब तक बच्चों के लिए स्मार्टफोन चलाने की एक लिमिट तय करें।
लत कैसे छुड़ाएं
अगर बच्चे को फोन की लत लग गई है, तो उसे छुड़ाने के लिए आप खेलकूल का सहारा लें। उनके साथ एक्टिविटीज में पार्ट लें, कलर करने के लिए दें या फिर छोटे टास्क दें। इन्हें पूरा करने पर बच्चों को प्राइज दें। पढ़ाई और आउटडोर एक्टिविटीज पर जोर दें। अगर बच्चा स्मार्टफोन देखता है, तो थोड़ी देर का समय निर्धारित करें।
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