गुजराती डॉक्टर ने बताया शराब पीने के बाद भी यूरोपियन की तुलना में इंडियन के लिवर ज्यादा होते हैं खराब? gujarat doctor reveals why European who drinks had a healthier liver than Indian, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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गुजराती डॉक्टर ने बताया शराब पीने के बाद भी यूरोपियन की तुलना में इंडियन के लिवर ज्यादा होते हैं खराब?

why European who drinks had a healthier liver than Indian: गुजरात के डॉक्टर ने रिपोर्ट शेयर कर बताया कि यूरोपियन के भारतीय की तुलना में ज्यादा एल्कोहल ड्रिंक करने के बाद भी लिवर कम डैमेज क्यों होता है।  

Mon, 23 Feb 2026 12:10 AMAparajita लाइव हिन्दुस्तान
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गुजराती डॉक्टर ने बताया शराब पीने के बाद भी यूरोपियन की तुलना में इंडियन के लिवर ज्यादा होते हैं खराब?

इंडिया में ज्यादातर जनसंख्या नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर की शिकार निकल रही। जबकि यूरोप में एक इंसान जो शराब पीता है उसका लिवर किसी भी शराब ना पीने वाले के लिवर से ज्यादा हेल्दी है? इस तरह की रिपोर्ट पर गुजराती डॉक्टर ने कारण शेयर किए हैं और बताया है कि आखिर क्यों यूरोपियंस को एल्कोहल कम साइड इफेक्ट करता है।

इंस्टाग्राम वीडियो पर दिखाई रिपोर्ट

गुजरात बेस्ड डॉक्टर हर्ष व्यास ने दो 37 साल वाले आदमी जिसमे से एक इंडियन है और दूसरा इटैलियन के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को रीड कर बताया कि हफ्ते में दो से तीन बार शराब पीने के बाद भी इटली के मरीज का लिवर भारतीय मरीज की तुलना में हेल्दी है।

यूरोपीय लोगों को क्यों एल्कोहल से जुड़ी दिक्कत कम होती है

डॉक्टर व्यास ने बताया कि काफी सारे लोग पूछते हैं कि रोजाना एल्कोहल पीने के बाद भी यूरोपीय लोगों में फैटी लिवर के केस कम देखने को मिलते हैं। इसके बारे में डॉक्टर ने एक्सप्लेन किया है कि इसके कई कारण है। जिसमे से तीन मेजर फैक्टर काम करते हैं- जेनेटिक्स, डाइट और एक्सरसाइज।

जेनेटिक्स

एल्कोहल के बॉडी में प्रोसेस होने में एंजाइम की एक्टीविटी काफी अहम रोल प्ले करती है। यूरोपीय लोगों में एल्कोहल डिहाइड्रोनाइज, एल्डीहाइड डिहाइड्रोजनाइज एंजाइम एक्टीविटी अच्ची होती है। जो कि एशियन पॉपुलेशन में नहीं होती। ये एंजाइम एल्कोहल को ब्रेकडाउन करके टॉक्सिंस को फौरन बाहर निकालते हैं। जिन लोगों में ये एंजाइम अच्छे से काम करते हैं, उनमे हार्मफुल बाई-प्रोडक्ट्स ज्यादा अच्छे से प्रोसेस होते हैं और खत्म हो जाते हैं। हालांकि, कई एशियाई लोगों में, एंजाइम की धीमी एक्टिविटी का मतलब है कि टॉक्सिक मेटाबोलाइट्स शरीर में ज़्यादा समय तक रहते हैं, जिससे लिवर पर स्ट्रेस और दूसरे साइड इफेक्ट होते हैं।

डाइट

डॉक्टर व्यास बताते हैं कि डाइट का भी खास रोल होता है। ज्यादातर यूरोपियन की डाइट में कॉमप्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, फिश और सी फूड से मिलने वाला हेल्दी फैट, ऑलिव ऑयल और पर्याप्त प्रोटीन होता है। ये न्यूट्रिएंट्स मेटाबॉलिक हेल्थ और लिवर फंक्शन को ज्यादा अच्छे तरीके से सपोर्ट करते हैं।

जबकि टिपिकल इंडियन डाइट रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स पर डिपेंट होती है। साथ ही उनकी डाइट में हेल्दी फैट और प्रोटीन का अभाव होता है। हाई रिफाइंड कार्ब का इनटेक लिवर में फैट का एक्यूमुलेशन बढ़ा देता है जो कि एल्कोहल पीने के बराबर है।

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फिजिकल एक्टीविटी

यूरोपियन पेशेंट 5-6 किलोमीटर डेली चलते हैं और साथ 30-40 मिनट की एक्सरसाइज रूटीन में रखते हैं। वहीं इंडिया की मेजर पॉपुलेशन रोजाना एक्सरसाइज करती ही नही हैं। यहीं नहीं हममे से कितने लोग रोजाना 5 किमी की दूरी भी पैदल नहीं तय करते।

डॉक्टर व्यास बताते हैं कि भले ही यूरोपियन एल्कोहल पीते हैं लेकिन वो बैलेंस डाइट, हेल्दी लाइफस्टाइल, रेगुलर एक्सरसाइज करते हैं। जिससे लिमिटेड डैमेज होता है।

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