दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर केंद्र का अलर्ट, डॉक्टरों से जानें त्वचा, बाल और फेफड़ों पर कैसे डाल सकता है बुरा असर
Air Pollution and Its Impact on Skin, Hair and Lungs : वायु प्रदूषण का असर हमारे फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि त्वचा और बालों पर भी पड़ता है। डॉ. राजेश कुमार सिंह से जानने की कोशिश करते हैं आखिर कैसे बढ़ता प्रदूषण आपके फेफड़ों के साथ आपकी त्वचा और बालों की खूबसूरती को भी कम कर सकता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी वायु गुणवत्ता बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के लोगों की सेहत खतरे में है। बता दें, मंगलवार को राजधानी का 24 घंटे का औसत AQI 428 रहा, जो देश में सबसे अधिक है। नोएडा 425 AQI के साथ दूसरे स्थान पर और बहादुरगढ़ 421 AQI के साथ तीसरे स्थान पर रहा। दिल्ली और उत्तर भारत में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को स्वास्थ्य संबंधी दिशा निर्देश जारी करते हुए 33 पन्नों के दिशानिर्देश भेजे हैं। जिसके बाद सभी सरकारी अस्पतालों में चेस्ट क्लिनिक शुरू करने का आदेश दे दिया गया है। बता दें, वायु प्रदूषण का असर हमारे फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि त्वचा और बालों पर भी पड़ता है। भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल्स, रांची में सीनियर कंसल्टेंट और क्रिटिकल केयर मेडिसिन, डॉ. राजेश कुमार सिंह से जानने की कोशिश करते हैं आखिर कैसे बढ़ता प्रदूषण आपके फेफड़ों के साथ आपकी त्वचा और बालों की खूबसूरती को भी कम कर सकता है।
फेफड़े
वायु प्रदूषण का सबसे पहला बुरा असर व्यक्ति के फेफड़ों पर पड़ता हैं। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण और विषैली गैस फेफड़ों की नलिकाओं को उत्तेजित करते हैं, जिससे अस्थमा, सीओपीडी (COPD) और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि ठंड का मौसम इन लक्षणों को और अधिक बढ़ा देता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से, खासकर कोयला-खनन क्षेत्रों में, गंभीर सीओपीडी, पल्मोनरी हाइपरटेंशन और फेफड़ों से जुड़ी हृदय विफलता जैसी गंभीर स्थितियां तक उत्पन्न हो सकती हैं।
पल्मोनोलॉजिस्ट ने जताई चिंता
मणिपाल हॉस्पिटल्स के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. देबराज जश कहते हैं कि सर्दियों का मौसम शुरू होते ही वायु प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ने लगता है। यह समस्या खासतौर पर उत्तर और पूर्व भारत में ज्यादा देखने को मिलती है, जहां सुबह के समय धुंध और धूल अधिक बनी रहती है। यह खराब वायु गुणवत्ता न केवल अस्थमा या सीओपीडी जैसे रोगियों के लिए हानिकारक है, बल्कि सामान्य स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकती है। हम इस समय सांस से जुड़ी संक्रमणों, एलर्जी और यहां तक कि गंभीर निमोनिया के मामलों में भी वृद्धि देख रहे हैं। बदलते जलवायु और वातावरण में बढ़ते सूक्ष्म कण हमारी फेफड़ों की क्षमता और प्रतिरोधक शक्ति पर गहरा असर डाल रहे हैं, इसलिए फेफड़ों की देखभाल पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।
त्वचा
प्रदूषण का दूसरा बुरा असर शरीर की सुरक्षा दीवार यानी त्वचा पर पड़ता है। हमारी त्वचा, शरीर की सबसे बड़ी सुरक्षा परत है, जो दिनभर प्रदूषकों को अवशोषित करती रहती है। हवा में मौजूद विषैले कण त्वचा के रोमछिद्रों को बंद करके त्वचा को बेजान बनाने लगते हैं। जिसकी वजह से एलर्जी, जलन और सूजन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से त्वचा की प्राकृतिक बाधा कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण, एलर्जी और दाग-धब्बों का खतरा बढ़ जाता है। आज प्रदूषण के कारण त्वचा की देखभाल केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की सुरक्षा का हिस्सा बन गई है।
बाल
आज ज्यादातर लोग हेयर फॉल की समस्या से परेशान रहते हैं। जिसके पीछे प्रदूषण भी एक बड़ा कारण हो सकता है। प्रदूषण बालों को जड़ों से कमजोर बनाता है। हवा में मौजूद धूल और रासायनिक कण खोपड़ी पर जमा होकर सूखापन, जलन और रूसी जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। इससे बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं, और बाल झड़ने, टूटने और समय से पहले पतले होने लगते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से बालों का प्राकृतिक विकास चक्र बाधित हो जाता है, जिससे वे बेजान और निर्जीव लगने लगते हैं।
क्या हैं डर्मेटोलॉजिस्ट के सुझाव ?
मणिपाल हॉस्पिटल (कोलकाता) की डर्मेटोलॉजिस्ट एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पियाली चट्टर्जी कहती हैं कि वायु प्रदूषण का हमारी त्वचा, बाल और फेफड़ों पर गहरा असर पड़ता है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, वाहनों से निकलने वाला धुआं और ओजोन परत की कमी मिलकर त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा पर असर डालते हैं, जिससे त्वचा रूखी, समय से पहले बूढ़ी और संवेदनशील हो जाती है। लंबे समय तक संपर्क में रहने से एक्जिमा और सोरायसिस जैसी स्थितियां भी बढ़ सकती हैं। इसी तरह प्रदूषण खोपड़ी और बालों को भी कमजोर कर देता है, जिससे बालों में सूखापन, संक्रमण और बाल झड़ने की समस्या बढ़ने लगती है। बालों और स्कैल्प की सुरक्षा के लिए सही कंडीशनर, लीव-ऑन हेयर मास्क का उपयोग और हर दूसरे दिन हल्के शैम्पू से बाल धोना फायदेमंद हो सकता है। नियमित रूप से सनस्क्रीन और मॉइस्चराइजर का प्रयोग, पर्याप्त पानी पीना, बाहर निकलते समय बालों को ढकना और त्वचा को स्वच्छ रखना जैसे छोटे लेकिन प्रभावी उपाय प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से हमारी त्वचा और बालों को सुरक्षित रख सकते हैं।
प्रदूषण से बचाव के उपाय
वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि हमारी सेहत और रूप-रंग दोनों के लिए चुनौती बन गया है। नियमित रूप से मास्क पहनना, वायु शोधक का उपयोग करना, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार लेना और त्वचा व बालों की नियमित देखभाल करने से प्रदूषण के प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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