सावधान! मस्से या स्किन टैग? जानें कब आपकी त्वचा देती है किसी अंदरूनी बीमारी की दस्तक Beware warts or skin tags know when your skin indicate sign of an diseases neurosurgeon explains, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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सावधान! मस्से या स्किन टैग? जानें कब आपकी त्वचा देती है किसी अंदरूनी बीमारी की दस्तक

अपनी त्वचा की इस भाषा को समझना सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवन के लिए भी बेहद जरूरी है। ऐसे में क्या होता है एक्रोकोर्डन और सेहत को कैसे प्रभावित करता है, जैसे सवालों का जवाब जानने के लिए हमने बात की ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी गुप्ता से।

Tue, 24 Feb 2026 11:03 AMManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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सावधान! मस्से या स्किन टैग? जानें कब आपकी त्वचा देती है किसी अंदरूनी बीमारी की दस्तक

कई बार हम अपनी त्वचा पर होने वाले छोटे-छोटे उभारों को मामूली मस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेडिकल साइंस में 'एक्रोकोर्डन' कहे जाने वाले ये स्किन टैग्स आपकी सेहत से जुड़े कई अहम राज खोल रहे होते हैं। गर्दन, बगल या शरीर के उन हिस्सों पर जहां त्वचा आपस में रगड़ खाती है, ये छोटे और मुलायम दाने अक्सर बिना किसी दर्द के उभर आते हैं। हालांकि ये दिखने में केवल एक सौंदर्य (Cosmetic) से जुड़ी समस्या लग सकते हैं, पर अगर इनकी संख्या अचानक बढ़ने लगे, तो यह आपके शरीर के अंदर छिपे किसी असंतुलन, जैसे शुगर लेवल या मेटाबॉलिज्म से जुड़ी चुनौतियों का भी एक इशारा हो सकते हैं। अपनी त्वचा की इस भाषा को समझना सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवन के लिए भी बेहद जरूरी है। ऐसे में क्या होता है एक्रोकोर्डन और सेहत को कैसे प्रभावित करता है, जैसे सवालों का जवाब जानने के लिए हमने बात की ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी गुप्ता से। इसके अलावा सोशल मीडिया पर पोस्ट न्यूरोसर्जन डॉ प्रशांत काटकोल का एक वीडियो भी इस समस्या के बारे में अच्छी समझ रखने में मदद करता है।

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क्या होते हैं स्किन टैग

डॉ. साक्षी गुप्ता कहती है कि स्किन टैग, जिन्हें डॉक्टर तकनीकी भाषा में एक्रोकोर्डन कहते हैं, असल में त्‍वचा पर छोटे-छोटे मुलायम उभार होते हैं जो अक्सर गर्दन, बगल, ऊंची चोटी वाले घाव (groin) जैसी उन जगहों पर दिखते हैं, जहां त्वचा एक-दूसरे या कपड़ों से रगड़ खाती है। आमतौर पर ये ज्यादा खतरनाक नहीं होते और दर्द भी नहीं देते, लेकिन यदि शरीर पर अचानक बहुत अधिक संख्या में नजर आने लगें तो यह सिर्फ सौंदर्य की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़े संकेत भी हो सकते हैं।

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क्लीवलैंड क्लिनिक की वेबसाइट के अनुसार, इंसुलिन प्रतिरोध एक जटिल स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब मांसपेशियों, वसा और यकृत की कोशिकाएं इंसुलिन पर उस तरह प्रतिक्रिया नहीं करतीं जैसा उन्हें करना चाहिए। इंसुलिन अग्न्याशय द्वारा स्रावित एक हार्मोन है जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होता है।

डॉ. काटकोल अपने वीडियो में कहते हैं कि, इंसुलिन प्रतिरोध का संबंध पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), फैटी लिवर, टाइप 2 मधुमेह, मोटापा और शरीर में हार्मोनल असंतुलन जैसी स्थितियों से जुड़ा हुआ है।' चिंता की बात यह कि ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि इंसुलिन प्रतिरोध की शुरुआत रक्त परीक्षण रिपोर्ट में असामान्यता आने से कई साल पहले ही हो जाती है। डॉ. काटकोल कहते हैं कि अच्छी बात यह है कि इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाया जा सकता है और सही जीवनशैली में बदलाव से इस स्थिति को ठीक भी किया जा सकता है।

इंसुलिन-प्रतिरोध

डॉ. साक्षी गुप्ता कहती हैं कि त्वचा पर स्किन टैग का दिखना अक्सर इंसुलिन-प्रतिरोध (insulin resistance) या मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसे स्वास्थ्य मुद्दों से जुड़ा हुआ पाया गया है। कई शोध में संकेत मिले हैं कि जिन लोगों के शरीर में इंसुलिन सही तरह से काम नहीं करता जैसे मधुमेह या प्री-डायबिटीज की स्थिति में, उन्हें स्किन टैग अधिक होते हैं।

मेटाबोलिक सिंड्रोम

जब इंसुलिन का स्तर शरीर में ज्यादा बना रहता है और कोशिकाएं उसका सही से उपयोग नहीं कर पातीं, तब शरीर में एक तरह का 'इंसुलिन प्रतिरोध' बन जाता है। यही स्थिति मेटाबोलिक सिंड्रोम की ओर ले जा सकती है, जिसमें मोटापा, उच्च रक्तचाप, खराब कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल और ब्लड शुगर की असमानता प्रमुख लक्षण हैं। शोध बताते हैं कि जिन मरीजों के शरीर पर स्किन टैग की संख्या अधिक होती है, उनमें मेटाबोलिक सिंड्रोम और डायबिटीज का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी ज़्यादा होता है जिनके शरीर पर टैग कम या नहीं हैं।

शरीर के परिवर्तन का संकेत

स्किन टैग खुद कोई बीमारी नहीं हैं। यह त्‍वचा की ऊपरी परत पर बनने वाले छोटे-मोटे, आम तौर पर बेनेगिन (गैर-कैंसरस) ग्रोथ हैं लेकिन उनका अचानक या असामान्य रूप से बढ़ना शरीर के भीतरी तौर पर किसी परिवर्तन का संकेत दे सकता है।

सेहत का कनेक्शन

हमारा शरीर अकसर शरीर से जुड़ी समस्याओं का संकेत हमें पहले ही देने लगता है। उदाहरण के लिए, यदि शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़कर कोशिकाओं पर असर नहीं कर पा रही, तो यह स्किन टैग के रूप में त्वचा को भी संकेत दे सकता है। यानी, स्किन टैग होना हमेशा डायबिटीज की गारंटी नहीं है, लेकिन यह एक चेतावनी की घंटी जरूर हो सकता है कि आपको अपने ब्लड शुगर, वजन, ब्लड प्रेशर और जीवनशैली की ओर थोड़ा ध्यान देना चाहिए।

कब सावधान हों -

अच्छी बात यह है कि शुरुआती घरेलू जीवनशैली बदलाव और सही आहार के साथ इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारा जा सकता है, जिससे संभावित जोखिमों को कम किया जा सकता है। इसलिए यदि आप देखते हैं कि आपकी त्वचा पर अचानक स्किन टैग बढ़ रहे हैं, तो बिना घबराए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। यह आपके स्वास्थ्य का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

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