नवरात्रि के बाद कलश में रखे नारियल से करें ये 3 काम, पूजा का संपूर्ण फल होगा प्राप्त
बहुत से लोगों को नहीं पता होता है कि नवरात्रि की पूजा के समापन के बाद कलश में रखे नारियल का कैसे इस्तेमाल किया जाए। आज हम आपको कुछ तरीके बता रहे हैं, जो आपको शुभ फल की प्राप्ति देंगे।

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अब समापन की ओर बढ़ रहा है। इन नौ दिनों बड़ी धूमधाम के साथ देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है और इसके साथ ही चौकी पर कलश स्थापित किया जाता है, जिसमें नारियल रखा जाता है। हालांकि बहुत से लोगों को नहीं पता होता कि नवरात्रि के समापन के बाद नारियल का क्या किया जाए। ज्योतिष की मानें तो कलश की स्थापना करना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी इसे श्रद्धापूर्वक हटाना भी है। यदि आप गलत तरीके से नारियल को हटाते हैं या उसका गलत उपयोग करते हैं, तो आपको नवरात्रि की पूजा-अर्चना का फल नहीं मिलता है। तो चलिए आज जानते हैं कि नवरात्रि के समापन के बाद कलश में रखे इस नारियल का क्या किया जाना उचित है।
मंदिर में रखें पूजा का नारियल
नवरात्रि के समापन के बाद आप कलश पर रखे नारियल को एक लाल कपड़े में बांध सकते हैं। इसके बाद इसे मंदिर पर ही माता रानी के पास रख दें। दरअसल पूरे नौ दिनों पूजा में स्थापित होने के कारण यह नारियल बहुत पवित्र माना जाता है। कहते हैं इसपर विशेष रूप से देवी का आशीर्वाद होता है। ऐसे में जब आप माता रानी के सम्मुख रखते हैं, तो मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
प्रसाद के रूप में करें ग्रहण
नवरात्रि का समापन हो जाने के बाद आप कलश में रखे नारियल को प्रसाद रूप में ग्रहण भी कर सकते हैं। दरअसल इसे ले कर कई लोगों की राय अलग है कुछ लोग इसे प्रसाद स्वरूप खाते हैं तो वहीं कुछ ऐसा करना शुभ नहीं मानते। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के बाद इस नारियल को प्रसाद स्वरूप देवी का भोग लगाकर ग्रहण करना शुभ माना जाता है। आप कन्या भोज में इस नारियल को प्रसाद स्वरूप छोटी-छोटी कंजकों को दे सकते हैं और इसके बाद ग्रहण कर सकते हैं।
जल में करें प्रवाहित
हवन हो या पूजा की सामग्री, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्हें जल में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है। ठीक उसी तरह आप कलश में रखे नारियल को भी पूजा के बाद साफ जल में प्रवाहित कर सकते हैं। यदि आप नारियल को रख भी रहे हैं तो कलश में रखी बाकी की चीजें जैसे अक्षत, पुष्प, आम के पत्ते आदि को जल में ही प्रवाहित करें। ऐसा करने से पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
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