झारखंड के 14 शहरी निकायों में महिलाओं के हाथ में जीत की चाबी! जानें कैसे निभाएंगी बड़ी भूमिका
राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों के लिए वोटिंग 23 फरवरी को होने हैं जबकि वोटों की गिनती 27 फरवरी को होगी। आपको बता दें कि झारखंड में यूएलबी चुनाव राजनीतिक दलों के चुनावी चिह्नों पर नहीं लड़े जाते हैं, लेकिन उम्मीदवारों को इन संगठनों का समर्थन प्राप्त होता है।

झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनावों में 14 शहरी स्थानीय निकाय ऐसे हैं जहां पर महिला वोटर्स की संख्या पुरुष वोटर्स से ज्यादा है। यानी यहां उम्मीदवारों की जीत और हार में महिला वोटर्स की अहम भूमिका हो सकती है। राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए वोटिंग 23 फरवरी को होनी हैं जबकि वोटों की गिनती 27 फरवरी को होगी। आपको बता दें कि झारखंड में यूएलबी चुनाव राजनीतिक दलों के चुनावी चिह्नों पर नहीं लड़े जाते हैं, लेकिन उम्मीदवारों को इन संगठनों का समर्थन प्राप्त होता है।
अधिकारियों ने बताया कि जिन नगर निकायों की वोटर लिस्ट में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है, उनमें गिरिडीह नगर निगम, मधुपुर नगर परिषद (देवघर), लोहरदगा नगर परिषद (लोहरदगा), गुमला नगर परिषद (गुमला), सिमडेगा नगर परिषद (सिमडेगा) और चक्रधरपुर नगर परिषद (पश्चिमी सिंहभूम) शामिल हैं।
इनके अलावा चाईबासा नगर परिषद (पश्चिमी सिंहभूम), कपाली नगर परिषद (सरायकेला-खरसावां), कोडरमा नगर पंचायत (कोडरमा), डोमचांच नगर पंचायत (कोडरमा), जामताड़ा नगर पंचायत (जामताड़ा), बुंडू नगर पंचायत (रांची), खूंटी नगर पंचायत (खूंटी) और चाकुलिया नगर पंचायत (पूर्वी सिंहभूम) में भी महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। वोटर लिस्ट के अनुसार, इन 14 नगर निकायों में गुमला नगर परिषद में महिला वोटर्स की संख्या सबसे ज्यादा 18,763 है जबकि पुरुष वोटर्स की संख्या 16,819 है।
मैदान में इतने उम्मीदवार
आपको बता दें कि राज्य के 9 नगर निगम समेत कुल 48 नगर निकायों में नामंकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 6,555 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। इनमें 598 प्रत्याशी महापौर और अध्यक्ष पद के हैं, जबकि 5,957 प्रत्याशी वार्ड पार्षद चुनाव के हैं।
मरांडी ने जताई है है आपत्ति
हेमंत सोरेन सरकार को चुनाव अक्टूबर 2024 की वोटर लिस्ट के आधार पर करवा रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ने कहा है कि अक्टूबर 2024 की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव करवाना गलत है। मरांडी के मुताबिक 1 अक्टूबर 2024 के बाद वोटर लिस्ट में जुड़े नए वोटर और वे वोट जिन्होंने अपना नाम एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर कराया है, चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे। लाखों वोटर्स, नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशी बनने या वोटिंग से वंचित रह जाएंगे। यानी पिछले करीब 15 महीनों में जुड़े लाखों मतदाता अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे, जो लोकतंत्र की भावना के बिल्कुल विपरीत है।'
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