डिलिस्टिंग के नाम पर राजनीतिक षड्यंत्र : गीताश्री
रांची में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि आरएसएस और भाजपा आदिवासियों की एकजुटता को समाप्त करने के लिए डिलिस्टिंग का राजनीतिक षड्यंत्र कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन तेज करने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि डिलिस्टिंग हुई, तो इसका संविधान की पांचवी अनुसूची और आदिवासियों के आरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

रांची। प्रमुख संवाददाता देश में आरएसएस और भाजपा की ओर से डिलिस्टिंग के नाम पर आदिवासियों की एकजुटता को समाप्त करने का राजनीतिक षड्यंत्र किया जा रहा है। आदिवासी समाज डिलिस्टिंग का विरोध करेगा और आंदोलन को तेज किया जाएगा। आदिवासियों को कभी वनवासी कहा गया तो कभी संविधान से मिले उनके अधिकार को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और प्रेम शाही मुंडा शनिवार को सिरमटोली सरना स्थल पर जनजाति सुरक्षा मंच एवं भाजपा की ओर से प्रस्तावित जनजाति संस्कृति समागम के विरोध में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर ईसाई की डिलिस्टिंग कर रहे हैं तो हिंदू की भी डिलिस्टिंग की जाए, ताकि मूल प्राकृतिक आदिवासी ही अधिकार का लाभ उठा सकें।
आदिवासियों पर यदि डिलिस्टिंग हुआ तो संविधान की पांचवी अनुसूची पर प्रभाव पड़ेगा। इससे आदिवासियों के आरक्षण पर खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग के बावजूद आदिवासियों को धर्म कोड नहीं दिया गया। प्रेस वार्ता में ज्योत्सना केरकेट्टा, सेलिना लकड़ा, प्रकाश मुंडा, शीला उरांव समेत अन्य मौजूद थे।
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