बोले रांची: पानी का गंभीर संकट, पाइप बिछे लेकिन आपूर्ति ही नहीं
रांची नगर निगम के वार्ड संख्या-34 स्थित विद्यानगर की करीब 50 हजार आबादी पिछले 15 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर है। हिन्दुस्तान के बोले रांची में स्थानीयों ने कहा कि सड़क, नाली, पानी, सफाई और सुरक्षा जैसी मूल जरूरतें आज भी अधूरी हैं।

रांची, संवाददाता। रांची नगर निगम के वार्ड संख्या-34 स्थित विद्यानगर की करीब 50 हजार आबादी पिछले 15 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर है। हिन्दुस्तान के बोले रांची में स्थानीयों ने कहा कि सड़क, नाली, पानी, सफाई और सुरक्षा जैसी मूल जरूरतें आज भी अधूरी हैं। चुनाव दर चुनाव जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन हालात नहीं बदले। यह इलाका लगभग ड्राई जोन घोषित हो चुका है, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं। पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन उससे पानी मिलता ही नहीं। यहां नशा और असामाजिक गतिविधियों ने महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। रांची नगर निगम के वार्ड 34 स्थित विद्यानगर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। स्थानीय लोगों ने कहा कि 2008 से अब तक यहां कई बार जनप्रतिनिधि चुने गए, लेकिन वार्ड का समग्र विकास आज भी एक अधूरा सपना बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विद्यानगर की सबसे गंभीर समस्या जर्जर सड़कें और क्षतिग्रस्त पुल हैं। वार्ड की मुख्य सड़क और उस पर बना पुल बेहद खराब स्थिति में है। जगह-जगह गड्ढे और टूटे हिस्से हर समय दुर्घटना को न्योता देते रहते हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है। ऐसे में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक परेशान हैं। नालियां कचरे और मिट्टी से भरी पड़ी स्थानीय लोगों का कहना है कि आवागमन में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था लगभग नहीं के बराबर है। कई इलाकों में नालियां बनी ही नहीं हैं और जहां बनी भी हैं, वहां वर्षों से सफाई नहीं हुई। नालियां कचरे और मिट्टी से भरी पड़ी हैं। बारिश होते ही घरों के सामने कई-कई दिनों तक पानी जमा रहता है। इससे न केवल आवागमन बाधित होता है, बल्कि मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम सिर्फ कागजी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर रहा है। क्षेत्र में ड्राई जोन, पानी की समस्या पीने के पानी की समस्या ने विद्यानगर को अब ड्राई जोन में तब्दील कर दी है। क्षेत्र में न तो पर्याप्त डीप बोरिंग कराई गई है और न ही नियमित पाइपलाइन जलापूर्ति की व्यवस्था है। नल महीनों सूखे पड़े रहते हैं। मजबूरी में लोगों को निजी टैंकरों से महंगे दाम पर पानी खरीदना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा बोझ महिलाओं पर पड़ता है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की व्यवस्था करनी होती है। गर्मी में समस्या और बढ़ जाती है। लोग घंटों तक पानी के लिए लाइन में लगे रहते हैं। गर्मी के शुरू होते ही यहां के लोग टैंकर पर आश्रित हो जाते हैं। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में सफाई और कचरा उठाव की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। हर घर से नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जाता, जिसके कारण सड़कों के किनारे और खाली प्लॉटों पर गंदगी के ढेर लग जाते हैं। यही कचरा नालियों को जाम करता है और पूरे इलाके में दुर्गंध फैलाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद सफाईकर्मी नहीं पहुंचते। क्षेत्र में नशाखोरी बड़ी समस्या सामाजिक स्तर पर नशाखोरी विद्यानगर की एक बड़ी और गंभीर चुनौती बन चुकी है। इलाके में ब्राउन शुगर, गांजा और अफीम जैसे नशीले पदार्थों का खुलेआम सेवन हो रहा है। इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य और महिलाओं-बच्चियों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। शाम ढलते ही महिलाएं घर से निकलने में डर महसूस करती हैं। स्थिति को और गंभीर बनाती हैं खराब स्ट्रीट लाइटें। कई जगहों पर लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। इस अंधेरे का फायदा असामाजिक तत्व उठाते हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन केवल औपचारिकता निभा रहा है। क्षेत्र में नियमित कार्रवाई नहीं होती है। समस्याएं 1. सड़क, नाली, पानी, रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं में कोई ठोस सुधार नहीं 2. जर्जर सड़कें और क्षतिग्रस्त पुल से दुर्घटनाओं का खतरा, आवागमन मुश्किल 3. जल निकासी और पेयजल संकट, बारिश में जलजमाव और गर्मी में क्षेत्र ड्राई जोन 4. सफाई व्यवस्था की बदहाली अनियमित कचरा उठाव, गंदगी, बीमारियों का खतरा 5. नशा, असामाजिक तत्व और सुरक्षा का संकट, अपराध और डर का माहौल सुझाव 1. सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति को एक साथ जोड़ा जाए। 2. तत्काल सड़क–पुल मरम्मत और नई नालियों का निर्माण किया जाए 3. डीप बोरिंग और नियमित जलापूर्ति व्यवस्था किया जाए, जिससे टैंकर पर निर्भरता न रहे 4. नियमित सफाई और कचरा उठाव की मॉनिटरिंग हो, वार्ड स्तर पर सफाई व्यवस्था तय हो 5. नशा विरोधी अभियान और पुलिस गश्त बढ़े। खराब स्ट्रीट लाइट तुरंत ठीक हों रखीं समस्याएं पिछले 20 साल से विद्या नगर में रह रहा हूं, लेकिन पिछले 15 वर्षों में यहां कोई ठोस विकास नहीं हुआ। हर चुनाव में नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, मगर जीतने के बाद इलाके में नजर तक नहीं आते। सड़कें टूटी हुई हैं, नालियां नहीं हैं और बारिश में पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। पानी, सफाई और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी हमें संघर्ष करना पड़ता है। -सचिता नंद प्रसाद महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या पानी की है। कई-कई दिनों तक नल से एक बूंद पानी नहीं आता। मजबूरी में टैंकर से पानी खरीदना पड़ता है, जो बहुत महंगा है। कई बार दूर से पानी लाना पड़ता है। विद्या नगर ड्राई जोन होने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। लोगों ने कहा कि इस क्षेत्र में निगम की ओर से जलापूर्ति शुरू करनी चाहिए। -पम्मी देवी यहां की सड़कें इतनी खराब हैं कि अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। खासकर पुल की हालत बहुत जर्जर है। रात में आवागमन मुश्किल है। -अजय कुमार शाम ढलते ही नशेड़ियों का जमावड़ा लग जाता है। सुनसान रास्तों पर छेड़खानी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। क्षेत्र में कार्रवाई नहीं होती। -आयुष कुमार खराब स्ट्रीट लाइट की वजह से क्षेत्र में अंधेरा बढ़ जाता है। इससे महिलाओं का डर और बढ़ जाता है। लोगाें ने लाइट लगाने की मांग की है। -विवेक सफाई और कचरा उठाव की स्थिति बहुत खराब है। हर घर से कचरा नहीं उठता, इसलिए लोग सड़क किनारे कचरा फेंक देते हैं। -मनोज गुप्ता इस क्षेत्र में न सड़क है, न नाली, न पानी। क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और बढ़ जाती है। -जितेंद्र मेहता नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों की वजह से माहौल खराब है। सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। पुलिस गश्त बढ़ानी चाहिए। -ज्योति बारिश के दिनों में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। चारों तरफ पानी भरा रहता है। मच्छर बढ़ जाते हैं और बीमारियां फैलती हैं। -अजय मुंडा नालियां नहीं होने की वजह से सड़कें जल्दी टूट जाती हैं। हर साल वही समस्या दोहराई जाती है। स्थायी समाधान के बिना विकास संभव नहीं है। -अशोक नशा युवाओं को बर्बाद कर रहा है। खुलेआम ब्राउन शुगर और गांजा बिकता है। पुलिस प्रशासन को अभियान चलाकर कार्रवाई करनी चाहिए। -पप्पू यादव ऑफिस से लौटते समय डर लगता है। अंधेरा और नशेड़ियों की मौजूदगी मानसिक तनाव बढ़ाती है। क्षेत्र में सुरक्षा के इंतेजाम होने चाहिए। -मुन्ना स्ट्रीट लाइट महीनों से खराब पड़ी रहती हैं। रात में पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। महिलाएं और बच्चे बाहर निकलने से डरते हैं। -पिंकी देवी गंदगी, पानी की कमी और खराब सड़क की वजह से इलाके की छवि खराब हो रही है। बाहर से आने वाले लोग यहां बसना नहीं चाहते। -राजीव
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