भाषा सूची में मुंडारी की अनदेखी पर उलगुलान संघ ने जताया विरोध
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 के तहत जारी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा सूची में गंभीर त्रुटियों पर झारखंड उलगुलान संघ ने विरोध जताया है। संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि खूंटी और गुमला जिले में मुंडारी भाषा को अनदेखा किया गया है, जो भेदभावपूर्ण नीति का संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सुधार न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।

मुरहू, प्रतिनिधि। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली-2026 के तहत जारी जिलावार जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा सूची में गंभीर त्रुटियों को लेकर झारखंड उलगुलान संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि सूची में कई महत्वपूर्ण भाषाओं की अनदेखी की गई है, जो चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि खूंटी जिला, जिसे मुंडा जनजाति का हृदय स्थल माना जाता है, वहां की सूची में मुंडारी भाषा शामिल नहीं है। इसी प्रकार गुमला जिले की भाषा सूची में भी मुंडारी को जगह नहीं दी गई है, जबकि कमडारा, बसिया और सिसई प्रखंडों में मुंडा समुदाय की अच्छी-खासी आबादी निवास करती है।
बोदरा ने इसे सरकार की मुंडाओं के प्रति भेदभावपूर्ण नीति सोची समझी साजिश बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुंडा समाज ने कभी भी अपने हक एवं अधिकार के प्रति कभी भी समझौता नहीं किया है। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा और मुंडा समाज अपने अधिकारों के लिए निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि सत्ता का सिंहासन हिलाने से भी मुंडा समुदाय पीछे नहीं हटेगा।
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