माध्यमिक आचार्य नियुक्ति की पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इनकार
झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद के तहत जेएसएससी की पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि सभी इच्छुक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही, परीक्षा परिणाम जून 2026 तक जारी करने का निर्देश दिया गया है।

रांची, विशेष संवाददाता। माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की आठ और नौ मई को होने वाली पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि इच्छुक अभ्यर्थी पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और जेएसएससी को जून 2026 तक परीक्षा परिणाम जारी करने का भी निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और जेएसएससी की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उक्त परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी, जिसमें करीब 24 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
जांच में 2819 अभ्यर्थियों के आईपी एड्रेस में हैकिंग संबंधी अनियमितता पाई गई, जिसके आधार पर आयोग ने इन अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा आठ और नौ मई को कराने का निर्णय लिया है। सभी संबंधित अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया है। प्रार्थी अर्चना कुमारी और अन्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बिना दोषी अभ्यर्थियों और परीक्षा केंद्र के जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए बाध्य करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उनका कहना था कि वे किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों (अनफेयर मींस) के इस्तेमाल में शामिल नहीं रहे हैं, फिर भी उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। प्रार्थियों ने आग्रह किया कि आयोग पहले कथित अनियमितताओं में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करे।
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