झारखंड की लोक कला बिखेरेगी वैश्विक चमक, कलाकारों का हुआ ऑडिशन
झारखंड के लोक एवं पारंपरिक कलाकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक बड़ा अवसर आया है। आईसीसीआर और झारखंड सरकार के बीच एमओयू के तहत कलाकारों के चयन हेतु ऑडिशन 17 फरवरी को आयोजित किया गया। चयनित कलाकार झारखंड की लोक कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेंगे।

रांची, वरीय संवाददाता। झारखंड के लोक एवं पारंपरिक कलाकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक बड़ा अवसर सामने आया है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली और झारखंड सरकार के बीच हुए एमओयू के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों के चयन हेतु ऑडिशन आयोजित किया गया। इस चयन प्रक्रिया के आधार पर उन कलादलों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जो विभिन्न वैश्विक मंचों और विशेष अवसरों पर देश-विदेश में झारखंड की समृद्ध लोक कला का प्रतिनिधित्व करेंगे। सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की ओर से यह ऑडिशन 17 फरवरी को ऑड्रे हाउस में आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न लोक नृत्य विधाओं के प्रतिष्ठित कलाकारों और दलों को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए आमंत्रित किया गया था।
ऑडिशन में सरायकेला छऊ (तपन कुमार पटनायक, पद्मश्री शशधर आचार्य एवं दल), मानभूम छऊ (प्रभात कुमार महतो एवं दल), पाइका नृत्य (अशोक कच्छप, गुलाब सिंह मुंडा, शिवशंकर महली एवं दल), मुंडारी नृत्य (गुंजल इकिर मुंडा, सुखराम पाहन, लखन गुड़िया एवं दल) और घोड़ा नृत्य (विनोद कुमार महतो एवं दल) सहित कई प्रमुख विधाओं के कलाकारों ने हिस्सा लिया। यह पहल न केवल झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि इससे स्थानीय कलाकारों को नई ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रोत्साहन भी प्राप्त होगा। चयनित कलाकार अब अंतरराष्ट्रीय फलक पर झारखंड की माटी की खुशबू और यहां की पारंपरिक कलाओं का परचम लहराएंगे।
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