Displaced Families at Dhurwa Dam in Ranchi Demand Justice and Rehabilitation बोले रांची: कहां जाएं हुजूर! पुनर्वास के बिना बेदखल करने की तैयारी, Ranchi Hindi News - Hindustan
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बोले रांची: कहां जाएं हुजूर! पुनर्वास के बिना बेदखल करने की तैयारी

रांची के धुर्वा डैम के विस्थापित परिवारों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन खो दी, लेकिन अब बिना पुनर्वास के उन्हें हटाने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और भय है, क्योंकि उन्हें नोटिस जारी किया गया है।

Fri, 31 Oct 2025 05:54 PMNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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बोले रांची: कहां जाएं हुजूर! पुनर्वास के बिना बेदखल करने की तैयारी

रांची, संवाददाता। हिन्दुस्तान के बोले रांची कार्यक्रम में सीठियो पंचायत में धुर्वा डैम के विस्थापितों ने अपनी पीड़ा बताई तो यह परेशान करनी वाली थी। नामकुम अंचल कार्यालय से हाल ही में जारी नोटिस ने इन परिवारों में बेदखली की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का आरोप है कि वे डैम निर्माण में अपनी पुश्तैनी जमीन गंवा चुके हैं, लेकिन उन्हें न तो वैकल्पिक भूमि मिली और न ही पुनर्वास की व्यवस्था की गई है। लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया है। कहा कि, वे डैम से पांच सौ मीटर दूर हैं, फिर भी उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

जिम्मेवारों से गुहार लगाते हुए कहा- पुनर्वास के बिना बेदखली करना कानून का भी उल्लंघन है। कठित परिस्थितियों से गुजर रहे रांची के धुर्वा डैम से विस्थापित हुए परिवारों का जीवन काफी कठित परिस्थितियों से गुजर रहा है। हालात ये हैं कि मुश्किलें कम होने की जगह दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि धुर्वा की सीठियो पंचायत के 35 से अधिक घरों को हटाने का नामकुम अंचल अधिकारी की ओर से जारी नोटिस ने बस्तीवासियों में काफी नाराजगी व भय पैदा कर दिया है। पुनर्वास के फिर से उजाड़ने की कोशिश यहां रहने वाले परिवारों का कहना है कि वे पहले ही डैम निर्माण के दौरान अपनी पुश्तैनी जमीन को खो चुके हैं। अब उन्हें बिना पुनर्वास के फिर से उजाड़ने की कोशिश की जा रही है। हिन्दुस्तान के बोले रांची कार्यक्रम में शामिल होकर विस्थापितों ने प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे सभी धुर्वा डैम के मूल खतियानी निवासी हैं, जिनकी जमीनें 1959 से 1961 के बीच सरकार ने डैम निर्माण के लिए ली थी। उनके नाम पर आज भी राजस्व विभाग से रसीद कट रही है। फिर भी उन्हें नोटिस देकर हटाने की कोशिश न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है। अधिक जमीन उनके पुर्खों की सीठियो के लोगों ने आरोप लगाया कि रांची शहर में नदी किनारे और डैम क्षेत्र के पास बहुमंजिली इमारतें और कॉलोनियां बन गई हैं, पर उन्हें नहीं हटाया जा रहा है। हम गरीब हैं इसलिए प्रशासन हमें निशाना बना रहा है। क्षेत्र के पाहन पुशन कच्छप बोले, सीठियो मौजा की 50 एकड़ से अधिक जमीन उनके पुर्खों की है। उन्होंने यहां पर लोगों को बसाया है। लेकिन आज अपनी जमीन से हटने के लिए नोटिस मिल रहा है। कहा कि वे डैम के जल क्षेत्र से करीब 500 मीटर दूर हैं और उनके घर कच्चे व झोपड़ीनुमा हैं। ऐसे में यह कहना कि वे डैम क्षेत्र पर कब्जा किए हुए हैं, गलत है। विस्थापन का पुराना जख्म फिर ताजा धुर्वा डैम निर्माण के समय हजारों परिवारों की जमीनें अधिग्रहित की गई थीं। सरकारी दस्तावेजों में इन लोगों को धुर्वा डैम विस्थापित के रूप में दर्ज किया गया और विस्थापित प्रमाणपत्र भी जारी किए गए। लेकिन छह दशक बीत जाने के बाद भी इन परिवारों को न तो वैकल्पिक जमीन दी गई, न ही कोई पुनर्वास योजना का लाभ मिला। स्थानीयों ने कहा कि हमारे दादा ने धुर्वा डैम के लिए अपनी खेती की जमीन दी। उस समय कहा गया था कि बाद में जमीन या घर दिया जाएगा, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला। पुनर्वास के बिना बेदखली असंवैधानिक विस्थापितों ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पुनर्वास के बिना किसी को भी जबरन बेदखल करना असंवैधानिक है। उनका कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। स्थानीयों ने कहा कि सरकार पहले हमें वैकल्पिक भूमि या आवास दे, उसके बाद ही कोई कार्रवाई करे। सीठियो पंचायत के अधिकांश परिवार दैनिक मजदूरी, रिक्शा चलाने या छोटे-मोटे काम से गुजर-बसर करते हैं। उनके पास पक्के मकान नहीं हैं। ऐसे में अगर झोपड़ियां भी तोड़ी गईं तो उनके पास सिर छुपाने की जगह नहीं बचेगी। लोगों का कहना है कि वो सालों से इस बस्ती में रह रहे हैं। अब अगर उन्हें हटा दिया जाएगा तो वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएंगे। उनके पास किराया देने के भी पैसे नहीं हैं। समस्याएं 1. डैम निर्माण के 60 साल बाद भी विस्थापित परिवारों को वैकल्पिक भूमि नहीं मिली। 2. नामकुम अंचल की ओर से जारी नोटिस से परिवारों में भय और असुरक्षा की स्थिति। 3. डैम के पास होने के बावजूद बस्ती में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था आज भी नहीं है। 4. अधिकतर परिवारों को आवास पेंशन और राशन कार्ड योजनाओं का लाभ नहीं। 5. मजदूरी कार्य पर निर्भर परिवारों के सामने विस्थापन से आजीविका का खतरा। सुझाव 1. डैम विस्थापितों को वैकल्पिक आवास और भूमि आवंटन तुरंत किया जाए। 2. जिला प्रशासन पहले सर्वे कराकर वास्तविक डैम क्षेत्र की सीमा को तय करे। 3. सीठियो पंचायत को धुर्वा जलापूर्ति नेटवर्क से जोड़कर पानी की आपूर्ति की जाए। 4. हर परिवार को आवास, पेंशन, राशन और बीमा योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए। 5. विस्थापितों और प्रशासन के बीच वार्ता कर समाधान निकाला जाना जरूरी। :: किसने क्या कहा :: वर्ष 1959-1961 के दौरान सरकार ने प्रार्थियों के पुश्तैनी कृषि भूखंडों का अधिग्रहण धुर्वा डैम, उसके कैचमेंट निर्माण के लिए किया था। उन्हें विस्थापित प्रमाणपत्र भी जारी किए गए, लेकिन अब तक किसी को वैकल्पिक भूमि या आवास नहीं दिया गया है। फिर भी हाल में नोटिस जारी कर क्षेत्र खाली करने को कहा दिया गया। -मास्टर आकाश हमारे पूर्वज सीठियो मौजा के पहले मालिक थे। उन्होंने ही यहां लोगों को बसाया था। डैम बनाने के नाम पर जमीन चली गई। अब उसी जगह से हमें हटाया जा रहा है। हमारे घर जल क्षेत्र से काफी दूर हैं। यह प्रशासन की नाइंसाफी है। हम मांग करते हैं कि पहल पुनर्वास की व्यवस्था की जाए, उसके बाद कोई कार्रवाई हो। -पुशन कच्छप हमारा घर झोपड़ी का है, कोई पक्का मकान नहीं। अगर यह भी तोड़ दिया गया तो हम कहां जाएंगे। किराया देने के पैसे तक नहीं हैं। -खबिरुद्दीन अंसारी हर दिन डर लगता है कि कहीं अधिकारी बुलडोजर लेकर न आ जाएं। हमें घर नहीं चाहिए तो वैकल्पिक जगह ही दे दें। -सुखराम हमारे पूर्वजों ने डैम के लिए अपनी जमीन दी। कहा गया था कि बाद में मकान मिलेगा, पर अब घर उजाड़ने की बात हो रही है। -मुजाकिर आलम हम डैम से 500 मीटर दूरी पर रहते हैं, फिर भी हमें ही अतिक्रमणकारी बताया जा रहा है। जिनके पास बंगले हैं, उन्हें कोई नहीं छेड़ता। -मंजूर आलम बस्ती में न पक्की सड़क है न ही स्ट्रीट लाइट। यहां के लोग दैनिक मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं। किसी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। -सुखराम तिग्गा 1959 में हमारी जमीन सरकार ने ली थी। अब फिर से घर छीनने की नौबत आ गई है। क्षेत्र में सरकारी योजनाओं को लाभ नहीं मिलता। -संजय हमारा घर कच्चा है, कोई पक्का निर्माण नहीं। फिर भी हमें नोटिस दिया गया। हमें समझ नहीं आता, गरीब होना ही क्या गुनाह है। -अंजू तिग्गा अगर हमें हटाना ही है तो पहले आवास योजना का लाभ दें। सड़क पर आ जाएंगे तो बच्चे भूखे मरेंगे। सरकार मानवता दिखाए। -मुजाहिद अंसारी डैम निर्माण के समय हमें विस्थापन प्रमाणपत्र मिला था। अब वही सरकार कह रही है कि हम अतिक्रमणकारी हैं। यह दोहरी नीति है। -भुनेश्वर राम

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