नए साल का जश्न! राजधानी रांची में निकला सरहुल का जुलूस, देखिए तस्वीरें
झारखंड की राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में आज आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व सरहुल पारंपरिक धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस मौके पर राजधानी की सड़कों पर सरना धर्मावलंबियों ने भव्य शोभायात्रा निकाली, जिसमें ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग नाचते-गाते नजर आए।

झारखंड की राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में आज आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व सरहुल पारंपरिक धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस मौके पर राजधानी की सड़कों पर सरना धर्मावलंबियों ने भव्य शोभायात्रा निकाली, जिसमें ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग नाचते-गाते नजर आए।
जुलूस में दिखा परंपरा का रंग
यह शोभायात्रा शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए सिरमटोली स्थित मुख्य सरना स्थल की ओर बढ़ रही है। जुलूस में शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजे हुए हैं और सामूहिक गीत-नृत्य के जरिए अपनी संस्कृति की झलक पेश कर रहे हैं। रास्ते में जगह-जगह लगाए गए स्टॉल पर लोगों के लिए शर्बत, चना और बुंदिया का वितरण भी किया जा रहा है, जो इस उत्सव को और खास बना रहा है।

क्या है सरहुल त्योहार?
सरहुल आदिवासी समाज का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे खासतौर पर झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में मनाया जाता है। यह पर्व प्रकृति, धरती माता और जंगलों के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। इस दिन साल वृक्ष के फूलों की पूजा की जाती है, जो नए जीवन और समृद्धि का संकेत माने जाते हैं।

नए साल से क्या है संबंध?
सरहुल को आदिवासी समाज में नए साल की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। जब पेड़ों पर नए फूल आते हैं। खेतों में हरियाली लौटती है। मौसम बदलता है। ऐसे समय में माना जाता है कि प्रकृति एक नए चक्र की शुरुआत कर रही है- यही उनका “नया साल” है।


अन्य धर्मों में कब मनाए जाते हैं नव वर्ष
दुनिया के अलग-अलग धर्मों और समुदायों में नए साल को मनाने का समय अलग-अलग होता है। हिंदू धर्म में नया साल विक्रम संवत के रूप में मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च-अप्रैल (चैत्र मास) में आता है। मुस्लिम समुदाय इस्लामिक न्यू इयर को मुहर्रम महीने की शुरुआत के साथ मनाता है। सिख धर्म में वैशाखी 13 या 14 अप्रैल को नए साल और फसल उत्सव के रूप में मनाई जाती है। वहीं ईसाई समुदाय को 1 जनवरी को नए साल के रूप में सेलिब्रेट करता है।




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