मजदूर दिवस पर झारखंड श्रमिक संघ करेगा श्रम कानून में सुधार की मांग
झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े श्रमिक संघ ने श्रम कानूनों में सुधार की मांग की है। उन्होंने 18,000 रुपए तक वेतन वाले को कामगार मानने को गलत बताया और कहा कि वेतन का मानक बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा, ठेका मजदूरों को बोनस और स्थायी कामों को ठेका मजदूरों से कराने को दंडनीय अपराध मानने की भी मांग की गई।
झारखंड मुक्ति मोर्चा से संबद्ध झारखंड श्रमिक संघ और कुछ अन्य मजदूर संगठनों ने श्रम कानूनों में सुधार की मांग की है। उन्होंने 18, 000 रुपए तक वेतन या मानदेय वाले को ही कामगार मानने को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि पहले ऐसा नहीं था। सिर्फ दूसरे कर्मचारी पर कार्रवाई का अधिकार रखने वाले को ही कामगार नहीं माना जाता था। वेतन या उसका पद महत्वपूर्ण नहीं था। इसलिए इसमें सुधार होना चाहिए। इस आशय की मांग संघ के संयुक्त महामंत्री शैलेन्द्र मैती ने सोमवार को पुराना कोर्ट स्थित झामुमो के कैम्प कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में की।
उन्होंने इएसआईसी की सुविधा 21 हजार रुपए तक वेतन वाले को ही देने के नियम में भी सुधार की मांग की। कहा, आज की तारीख में केन्द्र सरकार ने अकुशल मजदूर की दैनिक मजदूरी भी 783 रुपए निर्धारित कर दी है। ऐसे में 21 हजार का मानक बना रहा, तो सारे मजदूर इसकी परिधि से बाहर हो जाएंगे। इसलिए इसे खत्म करने की जरूरत है। मैती ने ठेका मजदूरों को भी बोनस देने और इसका आधार मुख्य नियोजक को हुई लाभ-हानि को आधार बनाया जाए। उन्होंने स्थायी प्रकृति का काम ठेका मजदूरों से कराने को दंडनीय अपराध घोषित करने की मांग की है। झारखंड में नियोजन को लेकर विधान सभा से विशेष प्रावधान पारित करने और राज्य के द्वारा स्थापित या सहयोग से स्थापित उद्योगों का प्रधान कार्यालय झारखंड में स्थापित करने के लिए बाध्य करने की मांग की है।संघ की मांग का झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन, झारखंड वर्कर्स यूनियन और सिंहभूम ठेकेदार कामगार यूनियन ने भी समर्थन किया है। इस मौके पर ओम प्रकाश सिंह, नरसिंह राव और रमेश मुखी भी मौजूद थे।
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