Worrying Budget Cuts for School Education in Jharkhand Lack of Clarity on Funding जून बीतने को आया पर समग्र शिक्षा बजट का अबतक अता-पता नहीं, Gridih Hindi News - Hindustan
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जून बीतने को आया पर समग्र शिक्षा बजट का अबतक अता-पता नहीं

झारखंड में स्कूली शिक्षा के लिए केंद्र सरकार से स्वीकृत राशि का अब तक कोई स्पष्ट पता नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र पांडे ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में शिक्षा बजट में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे शिक्षकों के प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह स्थिति लाखों गरीब विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

Fri, 12 June 2026 04:14 PMNewswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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जून बीतने को आया पर समग्र शिक्षा बजट का अबतक अता-पता नहीं

गिरिडीह। झारखंड में स्कूली शिक्षा की व्यवस्था और विकास योजनाओं को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। नया वित्तीय वर्ष 2026-27 शुरू हुए ढाई महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन राज्य को अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस वर्ष केंद्र सरकार से 'समग्र शिक्षा योजना' के अंतर्गत कितनी राशि स्वीकृत की जाएगी। यह चौंकाने वाला खुलासा गिरिडीह के सजग नागरिक और आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र पांडे द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है। ​भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (F.No. 1-4/2024-IS.6) के अनुसार, झारखंड की वार्षिक कार्य योजना एवं बजट पर विचार करने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) की बैठक की कार्यवाही जुलाई 2026 के मध्य से पहले सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं हो सकेगी।

आमतौर पर वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से हो जाती है, लेकिन जून बीतने को है और बजट पर सस्पेंस बरकरार है। आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र पांडे ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि बजट की इस अनिश्चितता के कारण राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों में मिलने वाले विद्यालय अनुदान आधारभूत संरचना (बुनियादी ढांचे) के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। आरटीआई से प्राप्त आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के लिए स्वीकृत समग्र शिक्षा बजट में पिछले तीन वर्षों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में जहां राज्य के लिए 2734.42 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई थी, वह वर्ष 2025-26 में घटकर महज 2139.26 करोड़ रुपये रह गई। इस प्रकार पिछले तीन सालों में झारखंड के स्कूली शिक्षा बजट में 595.16 करोड़ रुपये की भारी कटौती की जा चुकी है। ​यह विषय सीधे तौर पर राज्य के लाखों गरीब और ग्रामीण विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस गंभीर प्रशासनिक देरी और बजट कटौती के कारण राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने के प्रयासों को करारा झटका लग सकता है।

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