जनवरी में कोयला राजस्व में छत्तीसगढ़ से पिछड़ा झारखंड
झारखंड कोयला राजस्व में अप्रैल से दिसंबर तक पहले स्थान पर था, लेकिन जनवरी में छत्तीसगढ़ ने इसे पीछे छोड़ दिया। झारखंड की कोयला कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन के कारण राजस्व में कमी आई है, जहां जनवरी में झारखंड का हिस्सा 18.57 प्रतिशत पर गिर गया। कंपनियों को अपने प्रदर्शन में सुधार की आवश्यकता है।

कोयला राजस्व में झारखंड चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर महीने तक पहले नंबर पर रहा। जनवरी में झारखंड पिछड़ गया है और छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर आ गया। झारखंड स्थित कोयला कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन के कारण झारखंड को मिलने वाले राजस्व में कमी है। अप्रैल से दिसंबर तक कुल कोयला राजस्व का झारखंड को 25 से 27 प्रतिशत मिला। जनवरी में अचानक भारी गिरावट से कुल राजस्व में झारखंड का शेयर 18.57 प्रतिशत पर आ गया। यह झारखंड के लिए चिंताजनक है। वहीं कोयला कंपनियों को भी अपने प्रदर्शन पर मंथन करने की जरूरत है। जनवरी में झारखंड स्थित कोयला कंपनियों के प्रदर्शन पर गौर करें तो डिस्पैच में तीनों कंपनियों का निगेटिव ग्रोथ है।
ईसीएल 4.80, बीसीसीएल 10.95 एवं सीसीएल 13.72 प्रतिशत निगेटिव ग्रोथ में है। ईसीएल को जनवरी में 5.43 मिलियन टन डिस्पैच का लक्ष्य था,हुआ 4.36 यानी लक्ष्य का 90.31 प्रतिशत। इसी तरह बीसीसीएल ने लक्ष्य 3.88 के मुकाबले 2.41 मिलियन टन डिस्पैच किया, जो लक्ष्य 62.04 प्रतिशत है। इसी तरह सीसीएल की भी स्थिति खराब रही। सीसीएल ने लक्ष्य 9.92 मिलियन टन के मुकाबले 7.90 मिलियन टन डिस्पैच किया। लक्ष्य का 70.61 मिलियन टन है।
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