टंडाबाड़ी-केंदुआडीह खतरनाक, पुनर्वास में सहयोग करें: कोयला राज्य मंत्री
धनबाद में कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में भू-धंसान और गैस उत्सर्जन की समस्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुनर्वास को स्थायी समाधान बताया और राज्य सरकार के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। बेलगड़िया टाउनशिप में बेहतर जीवन स्तर के लिए पुनर्वास का समर्थन किया गया।

धनबाद, विशेष संवाददाता। टांडाबाड़ी, केंदुआडीह समेत अन्य अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में भू-धंसान और गैस उत्सर्जन की समस्या गंभीर है। तकनीकी संस्थानों और विशेषज्ञों ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों को अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक घोषित किया है। व्याप्त जटिल भू-गर्भीय परिस्थितियों में पुनर्वास ही एकमात्र स्थायी और सुरक्षित समाधान है। बीसीसीएल और जिला प्रशासन नागरिकों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए प्रयासरत है। इसके लिए सभी प्रभावित परिवारों को आगे आना चाहिए। पुनर्वास में राज्य सरकार का सहयोग जरूरी है। बिना राज्य सरकार के सहयोग के यह संभव नहीं है। बीसीसीएल और जिला प्रशासन समन्वय बनाकर काम करे। उक्त बातें कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बुधवार को धनबाद दौरे पर कहीं। उन्होंने बेलगड़िया का दौरा किया। साथ ही जनसुविधाओं का जायजा लिया। इसके अलावा बीसीसीएल मुख्यालय में पुनर्वास पर समीक्षा बैठक की.
पुनर्वास की प्रक्रिया
कोयला राज्य मंत्री ने कहा कि अग्नि प्रभावित क्षेत्र के विस्थापितों को बेलगड़िया टाउनशिप में पुनर्वासित करने का प्रयास केवल स्थानांतरण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन स्तर में समग्र सुधार की सार्थक पहल है। उन्होंने प्रभावित परिवारों से आग्रह किया कि वे पुनर्वास की प्रक्रिया में सहयोग दें और बेहतर जीवन स्तर के लिए बेलगड़िया टाउनशिप में पुनर्वासित हो। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि किसी भी पात्र परिवार को पुनर्वास से वंचित न रखा जाए तथा सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं।
सरकार का उद्देश्य
मंत्री ने कहा कि कोयला क्षेत्र देश की ऊर्जा सुरक्षा का आधार है और इसके विकास में उत्पादन के साथ मानवीय पहलुओं पर समान ध्यान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन वृद्धि नहीं, बल्कि पुनर्वास, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और श्रमिक कल्याण को भी प्राथमिकता देना है। झरिया पुनर्वास योजना को मानवीय पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य प्रभावित परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी जीवन देना है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं को पारदर्शी, समन्वित और समयबद्ध ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। इस दिशा में बीसीसीएल और जेआरडीए के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण बताते हुए संयुक्त प्रयास पर बल दिया। बेलगड़िया टाउनशिप में झरिया मास्टर प्लान-2.0 के तहत लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। पुनर्वासित परिवारों के लिए रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी हो रही है। मंत्री ने बेलगड़िया में लाइवलीहुड एंड एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। पांच ई-रिक्शा का भी वितरण किया। बीसीसीएल सीएसआर परियोजना की सहायता से संचालित विभिन्न योजनाओं से सम्बद्ध महिला उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने इस पहल को स्थानीय समुदाय के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और सराहना की। मौके पर उपायुक्त आदित्य रंजन, बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, बीसीसीएल निदेशक, एसएसपी प्रभात कुमार सहित बीसीसीएल व जेआरडीए के पदाधिकारी मौजूद थे.
बेलगड़िया की स्थिति में सुधार
बेलगड़िया की स्थिति में काफी सुधार : झरिया विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि पहले के बेलगड़िया और वर्तमान बेलगड़िया में काफी बदलाव है। अब आवास, बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले की तुलना में बेहतर हुई हैं। झरिया और धनबाद के लिए शुरू हुई निःशुल्क बस सेवा बीच में बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द बस सेवा पुनः शुरू कर लोगों को राहत दी जाए। उन्होंने बेलगड़िया टाउनशिप को बेहतर और स्मार्ट बनाने की कोशिश की सराहना की। कोयला राज्य मंत्री का उन्होंने आभार जताया.
आवश्यक सुविधाएं
बेलगड़िया में सभी जरूरी सुविधाएं मिलेगी: उपायुक्त ने कहा कि संशोधित झरिया मास्टर प्लान के अनुसार टाउनशिप के निवासियों को बिजली, पानी, सड़क नेटवर्क, स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई, स्वरोजगार, ई-रिक्शा, बस सेवा, कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। जनकल्याणकारी योजनाओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। कहा कि यहां स्थायी प्रशासनिक कार्यालय व टीओपी बनने से निवासियों को राहत मिली है।
रोजगार के अवसर
रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे : बीसीसीएल सीएमडी ने कहा कि बेलगड़िया में आईआईटी आईएसएम समेत अन्य संस्थाओं द्वारा लोगों का कौशल विकास कर उनको रोजगार से जोड़ा जा रहा है। कहा कि वर्तमान उपायुक्त के कार्यकाल में यह टाउनशिप एक शहर का रूप धारण करने लगी है। संशोधित झरिया मास्टर प्लान के बाद टाउनशिप में अमूल परिवर्तन हुआ है। लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। टाउनशिप जीवंत हो उठी है। रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे.
कोल कंपनियों की जिम्मेदारी
कोकिंग कोल के कारण बीसीसीएल पर अहम जिम्मेदारी: कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बुधवार को अपने व्यस्त कार्यक्रम के तहत बीसीसीएल और ईसीएल की समीक्षा की। उन्होंने कोल कंपनियों को कई दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परिचालन के क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी प्रमुख सूचकांकों पर निरंतर प्रगति सुनिश्चित करें। कोकिंग कोल की प्रमुख उत्पादक कंपनी के रूप में बीसीसीएल पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास से प्रभावी ढंग से निभाया जाना चाहिए। वैश्विक संकट और संसाधन की बढ़ती चुनौतियों पर कोयला राज्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जरूरी वस्तुओं के सीमित उपयोग और पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति में संसाधन का संरक्षण बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भी अब केवल दो ई-कार का इस्तेमाल किया जा रहा है। कोरोना काल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील से उस समय भी देश में सकारात्मक माहौल बना था। मौजूदा स्थिति में देशहित में ईंधन की बचत जरूरी है। मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष का काम अच्छे कार्यों का विरोध करना बन गया है। कोयला राज्य मंत्री ने मौजूदा समय में कोल कंपनियों को भी ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने को कहा.
ईंधन उत्पादन बढ़ाने का संकेत
ईंधन आपूर्ति पर दबाव देख कोयला उत्पादन बढ़ाने का संकेत: धनबाद, विशेष संवाददाता। केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने समीक्षा बैठक के दौरान बीसीसीएल प्रबंधन से कहा कि मौजूदा विश्व की स्थिति में ईंधन आपूर्ति पर दबाव को देखते हुए कोयला उत्पादन बढ़ने पर जोर देना चाहिए। वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन आपूर्ति पर दबाव है। भारत में पेट्रोलियम का उत्पादन नहीं होता है। ऐसे में पेट्रोलियम का कम उपयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल पर जोर देने की जरूरत है। कोयला भारत के लिए इस दिशा में महत्वपूर्ण है.
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