बच्चा चोरी के शक में 4 लोगों की हुई थी हत्या, आरोपियों के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची झारखंड सरकार
जमशेदपुर में 9 साल पहले हुए हत्याकांड में बड़ा अपडेट सामने आया है। बागबेड़ा के नागाडीह में चार लोगों की हत्या मामले में 28 में 23 आरोपियों के साक्ष्य के अभाव में रिहा होने के खिलाफ सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में अर्जी दी है।

जमशेदपुर में 9 साल पहले हुए हत्याकांड में बड़ा अपडेट सामने आया है। बागबेड़ा के नागाडीह में चार लोगों की हत्या मामले में 28 में से 23 आरोपियों के साक्ष्य के अभाव में रिहा होने के खिलाफ सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में अर्जी दी है। इससे हत्या के आरोप से बरी 22 लोगों पर फिर से कानून का शिकंजा कस सकता है। इनमें एक आरोपी की मौत हो चुकी है। इस मामले में पिछले साल 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई थी। इनमें से चार आरोपियों की जमानत मंजूर हो गई है और एक सजायाफ्ता जेल में है।
इधर, पीड़ित परिवार ने हत्याकांड से रिहा होने वालों के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पत्र भेजकर मामले की फिर से सुनवाई की मांग की है। हत्या का मामला दर्ज कराने वाले उत्तम वर्मा के अनुसार, गवाही के बावजूद चार लोगों की हत्या में आरोपियों की रिहाई से न्याय नहीं हुआ। सरकार की पहल से चार लोगों की हत्या मामले में फिर से न्यायिक प्रक्रिया शुरू होने पर पीड़ित परिवार में न्याय मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पांच सजायाफ्ता में से चार की अपील हाईकोर्ट में मंजूर हो गई है। सिर्फ एक सजायाफ्ता जेल में है। इधर हत्या केस में आठ वर्ष बाद अदालत में सरेंडर करने वाले आरोपी डॉक्टर मार्डी की जमानत अर्जी भी हाईकोर्ट से मंजूर हो गई है।
8 अक्तूबर 2025 को पांच आरोपी को हुई सजा
नागाडीह हत्याकांड के बाद पुलिस ने हत्या के साथ सरकारी कार्य में बाधा डालने और हमला करने के दो मामले बागबेड़ा थाना में दर्ज किए। अदालत से दोष सिद्ध होने पर 8 अक्तूबर 2025 को राजाराम हांसदा, रेंगो पूर्ति, गोपाल हांसदा, सुनील सरदार और तारा मंडल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अन्य आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हुए थे। पांच सजायफ्ता में से चार दोषी हाईकोर्ट में अपील अर्जी मंजूर होने से जेल से निकल गए। वहीं, एक दोषी अब भी जेल में बंद है।
18 मई 2017 को भीड़ ने पीट-पीटकर की थी हत्या
18 मई 2017 की शाम बच्चा चोरी की अफवाह पर ग्रामीणों की भीड़ ने लाठी, डंडे व पत्थर से मारकर एक वृद्धा और तीन युवकों की हत्या कर दी थी। पुलिस की मौजूदगी में भीड़ की पिटाई से जुगसलाई नयाबाजार के विकास वर्मा, गौतम वर्मा व गंगेश की मौके पर मौत हुई थी। वहीं, विकास और गौतम की दादी रामसखी देवी की टीएमएच में इलाज के दौरान 20 जून 2017 को मौत हुई थी।




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