अमेरिका-ईरान के बीच क्यों नहीं बन रही बात, दूसरी वार्ता भी फेल; ट्रंप बोले- किसके पास पावर, पता नहीं
ट्रंप ने फ्लोरिडा में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने विटकॉफ और कुशनर की यात्रा इसलिए रद्द की क्योंकि इसमें बहुत अधिक यात्रा और खर्च शामिल था और ईरान का शांति प्रस्ताव पर्याप्त नहीं था।

अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व के तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पूरी तरह विफल हो गई है। शनिवार को ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बिना किसी सीधी बातचीत के वापस लौटने के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों की यात्रा रद्द कर दी और ईरान के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला।
आपको बता दें कि शनिवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का प्रतिनिधिमंडल बिना किसी अमेरिकी अधिकारी से मिले इस्लामाबाद से रवाना हो गया। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने विशेष दूतों, स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान के आंतरिक हालातों पर सवाल उठाए। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के भीतर भारी अंतर्कलह और भ्रम की स्थिति है। उन्होंने लिखा, "किसी को नहीं पता कि वहां प्रभारी कौन है, खुद उन्हें भी नहीं पता। हमारे पास सारे कार्ड्स हैं, उनके पास कुछ नहीं।"
यूएस ने क्यों रद्द की यात्रा?
ट्रंप ने फ्लोरिडा में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने विटकॉफ और कुशनर की यात्रा इसलिए रद्द की क्योंकि इसमें बहुत अधिक यात्रा और खर्च शामिल था और ईरान का शांति प्रस्ताव पर्याप्त नहीं था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर वे बात करना चाहते हैं, तो उन्हें बस फोन करना होगा।"
ईरान का क्या है स्टैंड?
शुक्रवार को जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद पहुंचे थे, तब उम्मीद जगी थी कि सीधी बातचीत होगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी स्टैंडबाय पर रखा गया था। लेकिन स्थिति बदल गई। अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बैठकों के बाद इस्लामाबाद छोड़ दिया। उन्होंने एक्स (X) पर लिखा कि उन्होंने शांति के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा साझा की है, लेकिन उन्हें अभी भी संदेह है कि क्या अमेरिका कूटनीति को लेकर वास्तव में गंभीर है।
ट्रंप ने दूतों को वापस बुलाते हुए कहा, "अब बेकार की बातों के लिए कोई भी 18 घंटे की उड़ान नहीं भरेगा।" उन्होंने संकेत दिया कि ईरान ने यात्रा रद्द होने के बाद अपने प्रस्ताव में सुधार किया है, लेकिन वह अभी भी अमेरिकी शर्तों के अनुरूप नहीं है।
आपको बता दें कि 11 और 12 अप्रैल को हुई 20 घंटे की वार्ता के विफल होने के बाद, दोनों देशों के बीच दो मुख्य मुद्दे युद्ध की वजह बने हुए हैं। अमेरिका ईरान के परमाणु संवर्धन को पूरी तरह रोकने की मांग कर रहा है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं। अमेरिका ने होर्मुज में माइंस बिछाने वाली ईरानी नौकाओं को 'शूट एंड किल' का आदेश दे रखा है।
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