Why America soft towards Pakistan and taking action against Iran ईरान से दुश्मनी तो पाकिस्तान से प्यार, अमेरिका का कैसा डबल स्टैंडर्ड; किसने खोली पोल, International Hindi News - Hindustan
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ईरान से दुश्मनी तो पाकिस्तान से प्यार, अमेरिका का कैसा डबल स्टैंडर्ड; किसने खोली पोल

ईरान और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। लेकिन अमेरिका सारे प्रतिबंध ईरान पर लगाता है और पाकिस्तान की पीठ ठोकता रहता है। अमेरिका के इस दोहरे मानदंड को लेकर लेखक ब्रह्मा चेलानी ने एक लेख लिखा है।

Fri, 17 April 2026 04:19 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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ईरान से दुश्मनी तो पाकिस्तान से प्यार, अमेरिका का कैसा डबल स्टैंडर्ड; किसने खोली पोल

ईरान और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। लेकिन अमेरिका सारे प्रतिबंध ईरान पर लगाता है और पाकिस्तान की पीठ ठोकता रहता है। अमेरिका के इस दोहरे मानदंड को लेकर लेखक ब्रह्मा चेलानी ने एक लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने अमेरिका की पोल खोलकर रख दी है। उन्होंने लिखा है कि दोनों ही इस्लामी गणराज्य हैं। दोनों ही तानाशाही अंदाज में देश चलाते रहे हैं। लेकिन अमेरिका के साथ दोनों के रिश्तों में अंतर है। चेलानी ने लिखा है कि सियासी रूप से तो यह और भी ज्यादा हैरान करने वाला है। हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता में हिस्सा लिया। उन्होंने लिखा है कि दूसरे शब्दों में, पाकिस्तान से कहा गया कि वह ईरान को चेतावनी दे कि वह एक और पाकिस्तान न बन जाए।

एक पर प्रतिबंध, दूसरे को बढ़ावा
चेलानी ने लिखा है कि एक तरफ ईरान पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उसे धमकियां दी जा रही हैं। यहां तक कि उसे सिविलियन न्यूक्लियर राइट्स से भी वंचित किया जा रहा है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान को तवज्जो दी जा रही है। उसे बार-बार माफी दी जा रही है। यह सब तक किया जा रहा है कि जबकि वह अपने यहां प्रॉक्सी आतंकी शिविर चलाता रहा है। चेलानी ने लिखा है कि वास्तव में, वॉशिंगटन एक को अस्वीकार्य परमाणु खतरा मानता है जबकि दूसरे के बढ़ते परमाणु शस्त्रागार की अनदेखी करता है।

इस्लामिक क्रांति का हवाला
उन्होंने आगे लिखा कि पश्चिमी राजनीतिक विमर्श में, ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ ईरान के लिए संक्षिप्त रूप बन गया है। हालांकि यह ऐतिहासिक रूप से गलत है। उत्तर-उपनिवेशवादी युग का पहला इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान था, जिसने 1956 में यह उपनाम अपनाया। यह ईरान में साल 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति से दो दशक पहले हुआ था।

दशकों तक, वॉशिंगटन तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को खतरे के रूप में देखा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के सत्यापित अनुपालन के बावजूद 2015 के ओबामा-युग के परमाणु समझौते को रद्द कर दिया। उस समझौते के तहत, तेहरान ने अपना अधिकांश समृद्ध यूरेनियम भेज दिया, समृद्धि स्तरों को सीमित किया और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों को भी स्वीकार किया। दूसरी तरफ पाकिस्तान की बात करें तो वह दुनिया का एकमात्र देश है, जिसने आतंकियों को पालते हुए, परमाणु हथियार बनाए। उसने संधियों का भी उल्लंघन किया। यहां तक कि युद्ध में इस्तेमाल होने वाले परमाणु हथियार भी विकसित किए। लेकिन अमेरिका उसे लगातार नजरअंदाज करता रहा है।

उठाए गए हैं कई सवाल
इस लेख में आगे भी कई सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान और ईरान, दोनों ही अलोकतांत्रिक हैं। लेकिन अमेरिका राजनीतिक तौर दोनों को अलग ढंग से ट्रीट करता है। इसमें पिछले नवंबर का जिक्र किया गया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख, आसिम मुनीर ने प्रभावशाली ढंग से एक संवैधानिक तख्तापलट किया। मुनीर ने वह हासिल किया जो पाकिस्तान के पिछले सैन्य तानाशाह कभी पूरी तरह से नहीं कर पाए। उन्होंने संवैधानिक वैधता के आवरण में पूरी शक्ति हासिल कर ली।

इन सारी चीजों के बावजूद अमेरिका ने आंखें बंद रखीं। इसके उलट, ट्रंप ने लगातार मुनीर की तारीफें की हैं। उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल बताया है। एक महान शख्सियत बताया है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने मुनीर को एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व तक बता डाला। मुनीर के ताकतवर होने के महज चार महीने बाद ही, 28 फरवरी 2026 को ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक सैन्य अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत उन्होंने ईरान के खिलाफ सत्ता बदलने का अभियान चला दिया।

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