पाकिस्तान के F-16 बेड़े को और घातक बनाएगा अमेरिका, भारत की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अप्रैल 2026 में घोषित इस ठेके का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के पुराने हो रहे रडार सिस्टम को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना है, जिससे इन लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता और टोही क्षमता में भारी इजाफा होगा।

अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। भारत की चिंताओं को दरकिनार करते हुए अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान के लगभग 75 से 85 तक F-16 विमानों के लिए एक रडार अपग्रेड प्रोग्राम को मंजूरी दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दक्षिण एशिया में तनाव चरम पर है।
अमेरिकी रक्षा दिग्गज नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्प को इस परियोजना के लिए 488 मिलियन डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये से अधिक) का ठेका सौंपा गया है। इस सौदे के तहत, अमेरिकी वायु सेना (USAF) के फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रोग्राम के माध्यम से पाकिस्तान और अन्य लाभार्थी देशों को F-16 रडार सिस्टम के लिए इंजीनियरिंग और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
अप्रैल 2026 में घोषित इस ठेके का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के पुराने हो रहे रडार सिस्टम को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना है, जिससे इन लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता और टोही क्षमता में भारी इजाफा होगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस अपग्रेड कार्य को पूरा करने की समय सीमा 31 मार्च, 2036 तय की गई है।
यह घोषणा एक अत्यंत संवेदनशील समय पर हुई है। हाल ही में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था, जिसके तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों और उनके हवाई अड्डों सहित सैन्य संपत्तियों पर मिसाइल हमले किए गए थे। इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह भी है कि यह रक्षा सौदा उस वक्त सामने आया है जब पाकिस्तान पश्चिम एशिया संकट को समाप्त करने के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों की शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका शायद इस कूटनीतिक मदद के बदले पाकिस्तान को यह सैन्य उपहार दे रहा है।
भारत के लिए चिंता की बात क्यों?
भारतीय वायुसेना (IAF) वर्तमान में विमानों की कमी से जूझ रही है। वर्तमान में भारत के पास लड़ाकू विमानों के केवल 29 स्क्वाड्रन बचे हैं, जबकि चीन और पाकिस्तान के साथ 'टू-फ्रंट वॉर' (दोतरफा युद्ध) की स्थिति से निपटने के लिए कम से कम 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है। भारत हमेशा से यह तर्क देता रहा है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता और F-16 का इस्तेमाल आतंकवाद के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत के विरुद्ध किया जाता है।
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ऐसी मदद दी है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने पाकिस्तान के F-16 बेड़े के रख-रखाव के लिए 686 मिलियन डॉलर के सहायता पैकेज की घोषणा की थी।
हालांकि इस सौदे का केंद्र पाकिस्तान है, लेकिन अप्रैल 2026 के इस अनुबंध में अन्य देश भी शामिल हैं। पाकिस्तान के अलावा बहरीन, मिस्र, इंडोनेशिया, इराक, इजरायल, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ओमान, पोलैंड और तुर्की भी इस रडार अपग्रेड प्रोग्राम से लाभान्वित होंगे।
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